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गाड़िया लोहार: प्रतिज्ञा तोड़कर आगे बढ़ने का समय

Yogita Yadavयोगिता यादव Updated Mon, 30 Mar 2020 06:01 PM IST
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गाडि़या लोहारों के पूर्वज महाराणा की ही सेना में थे।
गाडि़या लोहारों के पूर्वज महाराणा की ही सेना में थे। - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में लगभग चालीस हजार गाड़िया लोहार रहते हैं। महाराणा प्रताप की प्रतिज्ञा से बंधे ये लोग अब चाहते हैं कि इनके बच्चे भी व्यवस्था में शामिल हों और अपना भविष्य संवारें। बच्चों के भविष्य की खातिर अगर पुरानी परंपराएं तोड़नी पड़ें, तो पुरखे नाराज नहीं होते, बल्कि आशीष बनकर बरसते हैं। 
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प्रतिज्ञा के मूल में एक लंबी कथा सांस लेती है। इसमें गहन दुख, आक्रोश, हिम्मत और भविष्य की सुखद आस एक साथ महसूस होती है। यह अपने वर्तमान का प्रतिरोध भी हो सकती है और एक सुंदर सपने की परिकल्पना भी। ऐसी ही एक प्रतिज्ञा गाड़िया लोहारों ने भी ली थी। जो समय के साथ और इस्पाती होती गई। पर अब लगता है कि महाराणा के वंशजों के लिए प्रतिज्ञा तोड़ने का सही समय आ गया है। वे पढ़ रहे हैं, बढ़ रहे हैं और अपने डेरे के स्थायी होने का सपना भी देख रहे हैं।
 
 गाड़िया लोहार’ एक ऐसा समुदाय जिसकी गाड़ी ही उसका घर है। इनकी सजी-धजी गाडि़यां इनकी पहचान हैं। इन्हीं गाड़ी के चक्कों में इनके घर-परिवार के लगातार चलते रहने की कील लगी है। इसी कील में कहीं बरसों पुरानी प्रतिज्ञा आज भी बंधी है। आखिर क्या़ थी वह प्रतिज्ञा।
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