अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस: छलावे और सत्ता की मशीनरी के बीच दुनिया में लोकतंत्र की यात्रा

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Sun, 15 Sep 2019 11:27 AM IST
विज्ञापन
पूरी दुनिया में 15 सितंबर को लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है।
पूरी दुनिया में 15 सितंबर को लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है। - फोटो : Pixabay

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
पूरी दुनिया में 15 सितंबर को लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य इस बेहतरीन जीवन और सुशासन पद्धति को दुनिया में अंतिम छोर तक स्थापित करने का आह्वान है। लोकतंत्र का आधुनिक स्वरूप आज चुनाव प्रक्रिया और उसके  लोकतांत्रिक प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होता है।
विज्ञापन

किस देश मे किस शासन व्यवस्था को अंगीकार किया गया है यह उसकी चुनाव प्रक्रिया से ही पता चलता है। मसलन ब्रिटेन, यूएसए, भारत, तीनों में लोकतंत्र है लेकिन बड़ी बुनियादी विभिन्नता के साथ। यूके यानी इंग्लैंड में राजशाही के महीन आवरण में छिपा लोकतंत्र है जो बंकिघम पैलेस के अपने शाही क्राउन (राजमुकुट) को  हर स्थिति में जीवित रखना चाहता है।
दुनिया भर में लोकशाही के नाम से दारोगाई करने वाले अमेरिका में अध्यक्ष प्रणाली वाला लोकतंत्र है जहां जनता एक इलेक्ट्रॉलर के जरिये राष्ट्रपति को चुनती है। भारत के लोकतंत्र को हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र इस अर्थ में तो कह ही सकते हैं कि एक साथ 60 करोड़ वोटर अपने वोटिंग राइट का इस्तेमाल कर सरकार चुनते हैं। वैसे दुनिया मे अप्रत्यक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था ही व्यवहारिक है लेकिन स्विटरजरलैंड एक ऐसा देश भी है जहां प्रत्यक्ष लोकतंत्र के दर्शन होते हैं, वहां कुछ केंटनो में राज्य की नीतियां जनता के मतानुसार निर्धारित की जाती है। इसे आप रेफरेंडम कह सकते है। यानी जनमत संग्रह।
लेकिन यह बड़े राज्यों में संभव नही है। प्रसिद्ध विचारक अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र की विश्वविख्यात परिभाषा दी थी।"लोकतंत्र जनता का जनता द्वारा जनता के लिये किया जाने वाला शासन है" अगर इस परिभाषा के आलोक में आज के वैश्विक लोकतांत्रिक परिदृश्य का ईमानदारी के साथ आंकलन किया जाए तो लोकतंत्र के प्रति हमारी अवधारणा हिल सकती है।क्योंकि न केवल भारत बल्कि दुनिया के किसी मुल्क में लोकतंत्र उसकी अंतर्निहित अवधारणा पर काम नहीं कर पा रहा है ,अधिकतर देशों में जम्हूरियत का आवरण है और सिर्फ चुनावी उपक्रम से ज्यादा महत्व लोकतांत्रिक व्यवस्था को हांसिल नही है।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us