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अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर का ब्लॉग: कोविड-19 से लड़ने के लिए दुनिया को एक होना होगा

Guy Ryderगाय राइडर Updated Fri, 27 Mar 2020 12:23 PM IST
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आईएलओ का अनुमान है कि श्रमिकों की आमदनी में 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक की क्षति हो सकती है।
आईएलओ का अनुमान है कि श्रमिकों की आमदनी में 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक की क्षति हो सकती है। - फोटो : PTI
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कार्यस्थलों से लेकर, उद्यमों, राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं तक इस महामारी के परिणामों का सही आकलन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है और सरकार व कामकाजी दुनिया के अग्रणी नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच सामाजिक संवाद से ही यह संभव है। यह ज़रूरी है ताकि 2020 का दशक 1930 के दशक में न तब्दील जाए।

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आईएलओ का अनुमान है कि श्रमिकों की आमदनी में 3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक की क्षति हो सकती है और साथ ही ढाई करोड़ से अधिक लोग बेरोज़गार हो सकते हैं। हालांकि, अब तो ये भी लग रहा है कि ये संख्या भी कम करके आंकी गई है।
कितनी असर होगा महामारी का 
इस महामारी ने हमारे श्रम बाज़ारों की दुर्व्यवस्था को बड़े बेरहम तरीक़े से उजागर किया है। विभिन्न आकारों के सभी उद्यमों ने पहले ही संचालन बंद कर दिया है, काम के घंटों में कटौती की है और कर्मचारियों की संख्या घटाई है। अनेक व्यवसाय ढहने के कगार पर हैं,  दुकानें और रेस्तरांं बंद हो गए हैं, हवाई उड़ानें और होटल बुकिंग रद्द हो गई हैं, और दफ़्तरी कामकाज घर से किए जा रहे हैं। अक्सर रोज़गार ख़त्म होने की बारी पहले उनकी आती है जिनके रोज़गार पहले से ही अनिश्चित या कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर होते हैं - जैसे की सफ़ाई कर्मचारी या सामान ढ़ोने वाले, क्लर्क, वेटर या अन्य किचन स्टाफ़। 

हमारी दुनिया में पांंच में से केवल एक ही व्यक्ति को बेरोज़गारी लाभ मिल पाता है और ऐसे आपदा के समय में  नौकरियों से निकाला जाना लाखों परिवारों की तबाही का कारण बन सकता है। आरोग्य तथा आवश्यक वस्तुओं का वितरण करने वाले अनेक श्रमिकों के पास भी बीमारी के लिए सवैतनिक अवकाश पाने का प्रावधान नहीं है। जिन लोगों के कामकाज पर हम इस समय निर्भर हैं - वे अक्सर बीमार होने पर भी काम जारी रखने के दबाव में रहते हैं। 

विकासशील देशों में, दिहाड़ी मज़दूर और अनौपचारिक व्यापारी भी आवश्यक सेवाओं और खाद्य आपूर्ति जारी रखने के लिए दबाव में आ सकते हैं। इसका ख़ामियाज़ा हम सभी को भुगतना पड़ेगा। यह न केवल वायरस के प्रसार को बढ़ाएगा बल्कि लंबे समय तक ग़रीबी और असमानता के चक्र में भी वृद्धि करेगा।

 

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