कोरोनोवायरस से ज्यादा घातक है वायु प्रदूषण? जानिए क्या कहती है रिपोर्ट?

Amalendu Upadhyayअमलेंदु उपाध्याय Updated Fri, 28 Feb 2020 08:58 AM IST
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corona - फोटो : अमर उजाला

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पहले भी कई रिपोर्ट्स में कहा जा चुका है कि विश्व की नब्बे फीसदी आबादी असुरक्षित हवा में सांस ले रही है और वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। हाल ही में जारी 2019 विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट और आईआक्यू एयर द्वारा संकलित नवीनतम आंकड़ों के आधार पर सबसे प्रदूषित शहरों की रैंकिंग से 2019 के दौरान दुनिया भर में कण प्रदूषण (PM2.5) की बदलती स्थिति का पता चलता है।
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नया डाटासेट जलवायु परिवर्तन की घटनाओं जैसे कि सैंडस्टॉर्म और वाइल्डफायर, और दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रों में शहरों के तेजी से शहरीकरण से प्रदूषण, के परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि को दर्शाता है।
आईआक्यू एयर एक वैश्विक वायु गुणवत्ता सूचना मंच है, जो सरकारों, निजी व्यक्तियों और गैर-सरकारी संगठनों से वायु गुणवत्ता डेटा को एकत्र करता है। आईआक्यू एयर के सीईओ फ्रैंक हैम्स के मुताबिक, नए कोरोना वायरस अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छाया हुआ है, जबकि वायु प्रदूषण एक मूक हत्यारा है जिसके कारण एक वर्ष में लगभग 7 मिलियन से अधिक मौतें हो रही हैं।
उनका दावा है कि हजारों वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों से डेटा को संकलित करने और उसका अध्ययन करने से विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2019 दुनिया के प्रमुख पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरे को नया संदर्भ देती है। वायु गुणवत्ता डेटा 2019  स्पष्ट संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन जंगल की आग और सैंडस्टॉर्म की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता के माध्यम से सीधे वायु प्रदूषण के जोखिम को बढ़ा सकता है।
 
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