शराब बंदी से बिगड़ी राज्यों की आर्थिक सेहत, और कितना पड़ेगा असर

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Fri, 08 May 2020 12:17 PM IST
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दिल्ली में शराब की दुकान के बाहर सुबह से लगी भीड़
दिल्ली में शराब की दुकान के बाहर सुबह से लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

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शराब और शराबियों के बारे में आप चाहे जितना भला-बुरा कह लो, मगर सच्चाई 4 मई को देशभर में तब सामने आई जब 40 दिन तक घरों में बैठे लोग शराब की दुकानों पर ऐसे टूट पड़े मानों कि वे न जाने कब से प्यासे हों।
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इस अफरातफरी को देख कर साफ लग रहा था कि भले ही समाज शराब को एक बुराई मानें मगर पीने वालों के साथ ही राज्य सरकारों के लिए यह एक आवश्यक चीज है। पीने वालों के साथ ही महामारी के कारण आर्थिक संकट झेल रही राज्य सरकारों के लिए तो शराब अभिशाप नहीं बल्कि एक वरदान ही है।
बेंगलूरू के तवारेकरे क्षेत्र की दुकान से एक शख्श 4 मई को 52,841 रुपये की शराब खरीद कर ले गया। उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर में शराब की दुकान खुलते ही दुकान संचालकों द्वारा शुभ बोनी के प्रतीक के रूप में ग्राहकों पर पुष्प वर्षा का वीडियो सोशियल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।
कर्नाटक के कोलार की एक दुकान पर जब 75 वर्षीय महिला लक्षमम्मा पहुंची तो उसे लक्ष्मी का प्रतीक मानकर दुकानदार ने उसे अपनी पहली ग्राहक बना कर सम्मानित किया ताकि दुकान पर इसी तरह धनवर्षा होती रहे।

अब तक तो पुरुष ही शराब के लिए बदनाम रहे हैं। शराबियों पर पत्नियों के उत्पीड़न का आरोप लगता रहा है, लेकिन देश के कई हिस्सों में शराब की दुकानों के आगे जहां पुरुषों की कई किमी. लंबी कतारें देखीं गई वहीं महिलाओं के लिए उनकी मांग पर अलग से लंबी कतारें सजाई गईं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो लाॅकडाउन में ढील के पहले दिन लाखों नहीं बल्कि करोड़ों देशवासी सोशियल डिस्टेंसिंग की परवाह न करते हुए शराब की दुकानों पर उमड़ते नजर आए। यही नहीं लोगों ने अगले दिन शराब की दुकानों के आगे सुबह 6 बजे से ही लाइनें लगानीं शुरू कर दीं, जबकि दुकानों को 10 बजे पूर्वाहन पर खुलना था। शराब के दीवानों को न तो महामारी का डर और ना ही आर्थिक संकट की चिंता।
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