"जय भीम-जय लोहिया" का नारा और माया-अखिलेश की राजनीति में इतिहास की एक भूल

Amalendu Upadhyayअमलेंदु उपाध्याय Updated Wed, 01 May 2019 05:35 PM IST
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मायावती के "जय भीम-जय लोहिया" के नारे में कौन सी राजनीति छिपी है?
मायावती के "जय भीम-जय लोहिया" के नारे में कौन सी राजनीति छिपी है? - फोटो : अमर उजाला

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पिछले दिनों बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक चुनावी जनसभा में जय भीम के साथ जय लोहिया बोलकर अपने भाषण का समापन किया। मायावती के "जय भीम-जय लोहिया" पर अचानक सियासी पारा गर्म हो गया। समीक्षाएं की जाने लगीं कि समाजवादी पार्टी के वोटों के लालच में मायावती अब डॉ. अंबेडकर के साथ डॉ. लोहिया का नाम जप रही हैं।
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हम इस विवाद में कतई जाना नहीं चाहेंगे कि मुलायम सिंह यादव कितने लोहियावादी हैं और अखिलेश यादव का विक्टोरियन समाजवाद कितना लोहियावादी है या मायावती की सोशल इंजीनियरिंग कितनी डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों के नजदीक है। याद दिला दें माया-मुलायम की निजी दुश्मनी इस कदर परवान चढ़ी थी कि मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में डॉ. लोहिया की जन्मस्थली का नामकरण अम्बेडकरनगर कर दिया था। 
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