मध्य प्रदेश में घमासान, खतरे में कमलनाथ सरकार

Sharad Guptaशरद गुप्ता Updated Thu, 19 Mar 2020 09:26 PM IST
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मध्य प्रदेश राजनीति में उथल-पुथल का दौर
मध्य प्रदेश राजनीति में उथल-पुथल का दौर - फोटो : फाइल फोटो

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कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के अपने इस्तीफे पर अड़े रहने से कमलनाथ सरकार का जाना लगभग तय हो गया है। अब कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता है। अदालती कार्रवाई में फंसे होने से विधानसभा में शक्ति परीक्षण होने में कुछ देर भले ही हो रही हो, लेकिन इससे कई संवैधानिक बिंदु निकल कर आ रहे हैं जिनका निदान होना निकट भविष्य में आवश्यक होगा।
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लोकतंत्र की प्रक्रिया संवाद पर आधारित है। लेकिन जिस तरह से बागी विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में रखा गया है और उन्हें उनके परिजनों से भी बात नहीं करने दी जा रहा, वह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके फोन भी बंद कर दिए गए हैं और उन्हें बाहरी दुनिया में किसी से भी बात नहीं करने दी जा रही। 
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो संदेशों के जरिए बागी विधायकों के खुद के सुरक्षित और अपनी मर्जी से बगावत करने की दलील को साफ खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता यह वीडियो संदेश बिना किसी दबाव के रिकॉर्ड किए गए। कोर्ट ने यह भी माना कि स्पीकर को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि इस्तीफा देने वाले विधायकों ने बिना किसी दबाव के इस्तीफे दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने कमलनाथ को शुक्रवार शाम 5 बजे तक अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया।
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