सोशल मीडिया पर जिस इमरती देवी का मजाक बना, आप उनके बारे में कितना जानते हैं?

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Wed, 09 Oct 2019 10:25 AM IST
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पिछले 15 अगस्त को वह देश भर की मीडिया में इसलिए चर्चा में आ चुकी है क्योंकि वह मुख्यमंत्री कमलनाथ  के संदेश को पढ़ नही पाई थीं।
पिछले 15 अगस्त को वह देश भर की मीडिया में इसलिए चर्चा में आ चुकी है क्योंकि वह मुख्यमंत्री कमलनाथ  के संदेश को पढ़ नही पाई थीं। - फोटो : सोशल मीडिया

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मध्य प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी सुमन अनुसूचित जाति से आती हैं। 15 अगस्त को वह देश भर की मीडिया में इसलिए चर्चा में आई क्योंकि वह मुख्यमंत्री कमलनाथ के संदेश को पढ़ नही पाई थीं। सोशल मीडिया पर उनका जमकर मजाक उड़ाया गया। उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए गए। उनके समर्थन में कतिपय लोगों ने उनकी अनुसूचित पृष्ठभूमि को लेकर बचाव का प्रयास किया और आलोचकों को हड़काने की कोशिश की। लेकिन इस सबसे इतर इमरती देवी के एक मौलिक पक्ष को दरकिनार कर दिया गया जो पिछले दिनों भोपाल में आयोजित एक समारोह में देखने को मिला। दरअसल, इमरती देवी कभी भी अपनी गैर शैक्षणिक और गरीबी की पृष्ठभूमि पर मलाल नहीं करती हैं।
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न ही इसे छिपाने की कोशिश करती हैं। एक राजनेता की जो बातें आम जनता को उसके नकलीपन, उसकी कथनी करनी में अंतर को रेखांकित करती है उससे इमरती देवी कोसों दूर नजर आती है, इसलिये अक्सर उनकी बातों को लोग मनोरंजन का माध्यम बनाकर उपयोग करते रहे है।
पिछले दिनों भोपाल की प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यशाला में वह मुख्य अतिथि थीं। मंच पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी के अलावा जस्टिस सुजॉय पाल, अंजली पालो, जस्टिस अहुलवालिया और मुख्यसचिव एस आर मोहंती जैसे बड़े लोग मौजूद थे। इमरती देवी ने साहस और गर्व के साथ कहा कि आज जो फोटो इस सेमिनार के पार्श्व में बैनर पर छपे हैं कभी वे खुद भी इसी श्रेणी में थी, उनके पास न पढ़ने की सुविधाएं थी, न खाने पीने और पहनने की लेकिन आज वह यहां मंत्री बनकर खड़ी है। मंत्री के रूप में उन्होंने साफ कहा कि हमारा विभाग आज भी अमीरी- गरीबी में विभाजन की रेखा को मजबूत करता है।
आंगनबाड़ी में गरीबों के बच्चे आते हैं। उन्हें एक-दो रोटी पकड़ाकर विदा कर दिया जाता है। उनकी पढ़ाई लिखाई की तुलना बस से स्कूल आते- जाते बच्चों से की जा सकती है ?
 
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