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मध्य प्रदेशः इन वजहों से आमने-सामने हैं सिंधिया और सीएम कमलनाथ?

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Mon, 17 Feb 2020 03:13 PM IST
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कमलनाथ के दिल्ली आवास पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ समन्वय बैठक में हुए कथित टकराव के बाद मप्र में सिंधिया समर्थक आग बबूला हैं।
कमलनाथ के दिल्ली आवास पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ समन्वय बैठक में हुए कथित टकराव के बाद मप्र में सिंधिया समर्थक आग बबूला हैं। - फोटो : PTI
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मप्र के उत्तरी औऱ मालवा इलाके में  सोशल मीडिया पर एक नारा ट्रेंड कर रहा है "माफ करो कमलनाथ ...हमारे नेता तो महाराज"
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कमलनाथ के दिल्ली आवास पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ समन्वय बैठक में हुए कथित टकराव के बाद मप्र में सिंधिया समर्थक आग बबूला हैं। खुलेआम मुख्यमंत्री कमलनाथ के विरुद्ध मुखर होकर बयानबाजी हो रही है। दावा किया जा रहा है कि अभी तो सिंधिया समन्वय बैठक से बाहर निकलकर आएं है अगर पार्टी से बाहर चले गए तो मप्र में दिल्ली जैसे हालात हो जाएंगे।

असल मे मप्र कांग्रेस की अंदरुनी लड़ाई अब सड़कों पर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी खुलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुनौती को स्वीकार कर उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए कह दिया है। 15 वर्षो तक सत्ता से बाहर रही कांग्रेस के लिए मप्र में मुसीबत बीजेपी से कहीं ज्यादा खुद कांग्रेसियों से खड़ी होती रही है।

आखिर कहां है समस्या? 
दरअसल, सीएम पद की रेस में रहे सिंधिया लोकसभा का चुनाव हारने के बाद खुद को मप्र में अलग-थलग महसूस करते हैं। सरकार के स्तर पर मामला चाहे राजनीतिक नियुक्तियों का हो या प्रशासन में, जो महत्व दिग्विजय सिंह को मिलता है वह सिंधिया को नहीं, इसलिए समानान्तर सत्ता केन्द्र के लिए समर्थकों द्वारा पिछले एक वर्ष से उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने के लिए आलाकमान पर दबाव बनाया जा रहा है। सिंधिया खुद अक्सर सरकार के विरुद्ध बयान देते रहे हैं जिससे मुख्यमंत्री के लिए असहजता की स्थिति निर्मित हो जाती है।

अथिति शिक्षकों की मांगों को लेकर सिंधिया ने एक बार फिर कमलनाथ के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया  है। उन्होंने इस मुद्दे पर सड़कों पर उतरकर सरकार के विरुद्ध संघर्ष का एलान कर दिया।

किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी उन्होंने जिस अतिशय विपक्षी सुर में अपनी सरकार को  कटघरे में खड़ा किया है उसने शांत प्रवृत्ति के कमलनाथ को जवाबी हमले के लिए मजबूर कर दिया।

बताया जाता है कि दिल्ली में कमलनाथ के बंगले पर हुई बैठक में दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर भिंड़त हो गई और सिंधिया बैठक से निकलकर चले गए। मुख्यमंत्री जो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं अब खुलकर कह रहे है कि अगर सिंधिया को सड़को पर उतरना है तो बेशक उतर जाएं।

आमतौर पर कमलनाथ इस तरह के सीधे टकराव से अभी तक बचते रहे हैं। पहला अवसर है जब कमलनाथ ने सीधे सिंधिया को उनकी हद बताने का प्रयास किया है।



 
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