मध्य प्रदेश: पार्टी के दिग्गजों ने गिराई कमलनाथ की सरकार? 

Rajesh Badalराजेश बादल Updated Sat, 21 Mar 2020 12:13 PM IST
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कमलनाथ के लिए आसान नहीं था सरकार बचाना
कमलनाथ के लिए आसान नहीं था सरकार बचाना - फोटो : self

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कमलनाथ की कांग्रेस सरकार मध्य प्रदेश से विदा हो गई। विदाई तो कमोबेश पहले ही तय थी। कमलनाथ ही आख़िरी समय तक क़िला लड़ाते रहे। अगर उनकी सरकार बच जाती तो शायद चमत्कार ही होता। वे पार्टी के दिग्गज क्षत्रप तो पहले ही थे उसमें चार चांंद लग जाते। मगर कांग्रेस की अंदरूनी सेहत ने उनका साथ नहीं दिया। कहने में हिचक नहीं कि इस पूरे प्रसंग में मतदाता की हार हुई है। 
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वैसे कमलनाथ के आत्मविश्वास के तीन बड़े कारण थे। तीन में से एक भी उनके पक्ष में हो जाता तो पांंसा उल्टा पड़ जाता। गुरुवार की शाम जब सुप्रीम कोर्ट ने जब 20 मार्च की शाम पांंच बजे तक फ्लोर टेस्ट का निर्देश दिया तो एक तरह से कमलनाथ अपनी बची-खुची जंग भी हार गए। कमलनाथ उम्मीद कर रहे थे कि सर्वोच्च न्यायालय बहुमत सिद्ध करने के लिए कम से कम दो सप्ताह का समय तो देगा। पर ऐसा नहीं हुआ। कमलनाथ के इस भरोसे का ठोस आधार था।
तीन साल पहले मणिपुर में जब कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी छोड़ी तो सुप्रीमकोर्ट ने बहुमत सिद्ध करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। कांग्रेस के टी श्यामकुमार 2017 में जीते और बाद में बीजेपी में जाकर मंत्री बन गए। उनके साथ आठ विधायक भी भारतीय जनता पार्टी में गए थे। इसी मामले में मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष को चार सप्ताह का वक़्त दिया गया था। इसके बाद कर्नाटक के मामले में भी ऐसा ही हुआ। पंद्रह विधायकों ने अपने त्यागपत्र सीधे अध्यक्ष को सौंपे थे। स्पीकर ने फ़ैसले में देरी की।
नतीज़तन विधायक सुप्रीमकोर्ट में गए। सर्वोच्च अदालत ने व्यवस्था दी कि विधानसभा अध्यक्ष अपने स्तर पर इस्तीफ़ों के बारे में निर्णय लेने के लिए आज़ाद हैं। अदालत इसमें समय सीमा तय नहीं कर सकती। इसी आधार पर कमलनाथ को लग रहा था कि सुप्रीमकोर्ट उन्हें दो तीन हफ़्ते तो देगा ही साथ ही स्पीकर की सदन के भीतर की सर्वोच्चता बरक़रार रखेगा। लेकिन यह निर्णय भी उल्टा हुआ और कमलनाथ टूट गए। 
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