क्या पिता माधवराव सिंधिया से हुए राजनीतिक धोखे का बदला लिया ज्योतिरादित्य ने?

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Fri, 13 Mar 2020 01:45 PM IST
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माधव राव सिंधिया- ज्योतिर्दित्य सिंधिया
माधव राव सिंधिया- ज्योतिर्दित्य सिंधिया

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जो हिम्मत स्व.माधवराव सिंधिया अपने विराट राजनीतिक प्रभाव के बाजूद नही दिखा पाए उसे उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिखा दी। कांग्रेस में रहते हुए जिन गुटीय परिस्थितियों से ज्योतिरादित्य दो चार हो रहे थे। कमोबेश उन्हीं हालात से उनके पिता भी गुजरे हैं। यह अलग बात है कि माधवराव सिंधिया कांग्रेस में धोखे खाने के बावजूद डटे रहे। लेकिन स्टेनफोर्ड से प्रबन्धन की बारीकियों की तालीम लेकर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति शास्त्र पर अपने  प्रबन्धशास्त्र की प्रमेय अपनाने से नहीं चुके।
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कहा जाता है कि स्व.माधवराव सिंधिया मन से बहुत भोले इंसान थे, वह सियासत की निर्मम चालबाजी में भी माहिर नहीं थे इसीलिए मप्र की राजनीति में वह ज्योतिरादित्य की तरह अपरिहार्य नहीं हुए। लेकिन उनका निजी कद इतना विस्तृत औऱ समावेशी था कि वह स्वतः कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति की अपरिहार्यता बन गए थे।
दरअसल, माधवराव सिंधिया औऱ ज्योतिरादित्य में बुनियादी फ़र्ख तालीम औऱ पीढ़ीगत् बदलाव का भी है।योग्यता के मामले में ज्योतिरादित्य अपने पिता से 21 ही हैं, साथ ही वह सियासत के निष्ठुर प्रहारों को अपने पिता की तरह झेलने या उनसे किनारा करने की जगह जूझना पसन्द करते हैं।
2018 में मप्र की सीएम कुर्सी पर उन्होंने पूरी दम से अपना दावा दिल्ली दरबार मे ठोका। न केवल 10 जनपथ की चारदीवारी बल्कि मप्र में अपने सभी समर्थकों के बीच यह संदेश भी स्थापित किया कि हम अपना दावा छोड़कर त्याग कर रहे हैं और इसका सन्तुलन कमलनाथ औऱ 10 जनपथ को बनाकर रखना होगा। याद कीजिए 1993 का घटनाक्रम अविभाजित मप्र में कांग्रेस सरकार बनाने जा रही थी।
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