कमलनाथ सरकार अपनाना चाहती है शिक्षा का कोरियाई मॉडल, सरकारी स्कूलों की बदहाली ऐसी है

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Sun, 17 Nov 2019 10:19 AM IST
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मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार प्रदेश में शालेय शिक्षा को कौशल विकास के साथ जोड़ने के लिए दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाना चाहती है ।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार प्रदेश में शालेय शिक्षा को कौशल विकास के साथ जोड़ने के लिए दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाना चाहती है । - फोटो : PTI

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मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार प्रदेश में शालेय शिक्षा को कौशल विकास के साथ जोड़ने के लिए दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाना चाहती है । इसके लिए मप्र के चुनिंदा 35 अफसरों और शिक्षकों का एक दल इन दिनों दक्षिण कोरिया के दौरे पर गया है जो वहां  "स्टीम एजुकेशन" सिस्टम का अध्ययन करेगा और मध्य प्रदेश में इसे कैसे लागू किया जा सकता है इसे लेकर एक रिपोर्ट सरकार को सौपेगा। स्टीम सिस्टम का आशय "साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स औऱ मैथ्स "बेस्ड शिक्षा प्रणाली से है। इसका मूल उद्देश्य किताबी ज्ञान को कौशल विकास के साथ जोड़ने से है।
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कोरिया में यह सिस्टम बेहद सफल साबित हुआ है। इसी सिस्टम को अपनाकर इस छोटे से देश ने तकनीकी के मामले में वैश्विक पहचान अर्जित की है। आज कोरिया इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से लेकर सूचना तकनीकी और प्रौधोगिकी के मामले में अव्वल बना हुआ है। भारत से महज दो साल पहले औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ यह देश आज परिणामोन्मुखी शिक्षा के जरिए आर्थिक  औऱ तकनीकी महाशक्ति बनने के मामले में एक मिसाल है।
कमलनाथ सरकार का यह नवाचार सिद्धांतय तो स्वागत योग्य ही है लेकिन कोरिया और भारत की सामाजिक आर्थिक सरंचना में बड़ा बुनियादी अंतर है,  यह हमें नहीं भूलना चाहिए। यही नहीं राजनीतिक रूप से  शिक्षा कोरियाई शासकों के लिए वोट बैंक का स्रोत नहीं है इसलिए यह कहना जल्दबाजी ही होगा की कोरियन मॉडल को अपनाकर मप्र में  ढर्रे से उतरी स्कूली शिक्षा का कुछ भला हो सकेगा।
 
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