मध्य प्रदेश: कोरोना काल में संधि वाले विस्तार में शिवराज के पंच मंत्री     

Satish Aliaसतीश एलिया Updated Tue, 21 Apr 2020 02:15 PM IST
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कोरोना के चलते प्रदेश में शपथ लेेने वालेे 5 मंत्री जनता के लिए सबसे बड़ी जरूरत हैं।
कोरोना के चलते प्रदेश में शपथ लेेने वालेे 5 मंत्री जनता के लिए सबसे बड़ी जरूरत हैं। - फोटो : ANI

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कोरोना संकट के भयावह होने लगने के दिनों में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के तख्तापलट के बाद चौथी दफा मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान ने अंततः 29 वे दिन मंत्रिमंडल कर ही दिया। फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए राजभवन मे हुए शपथग्रहण समारोह में तीन विधायकों और दो पूर्व विधायको ने मंत्री पद की शपथ ली।
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मंत्री पद और विधायकी छोड़कर सिंधिया के साथ भाजपा में आए छह में से दो तुलसीराम सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत फिर मंत्री बन गए हैं। भाजपा से पूर्व मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल और मीना सिंह फिर मंत्री बने। अब भी शिवराज सरकार में 25 और मंत्री बनाए जाने की गुंजाइश है, अब विस्तार कोरोनाकाल के बाद और 24 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव के बाद ही होने के आसार हैं।
असंतोष तो अवश्यंभावी है
भले ही कोरोना काल के चलते 28 दिन मंत्रीमंडल गठन टाला गया, लेकिन इसमें से करीब 15 दिन कम मंत्री बनाने और संतुलन की रस्साकशी में बीते। इस दौरान प्रदेश में अकेले ही कोरोना से जूझते रहे। कांग्रेस लगातार मंत्रिमंडल गठन न होने पर तंज करती रही। इतना ही नहीं कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने संवैधानिक सवाल उठा दिया था। अब मंत्रीमंडल गठन हो तो गया है लेकिन भाजपा में अंदरूनी असंतोष से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल ये है कि वरिष्ठतम विधायक गोपाल भार्गव और इन्दौर की भाजपाई राजनीति के सबसे ताकतवर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इस संक्षिप्त मंत्रीमंडल में दरकिनार होने को किस तरह से व्यक्त करेंगे।

इंदौर से धुर कांग्रेसी रहे और सिधिया के सिपहसालार नव भाजपाई तुलसीराम सिलावट के मंत्री बनने का इन्दौर की सियासत पर अवश्य ही पड़ेगा। वहांं से तीसरी बार के भाजपा विधायक रमेश मेंदोला मंत्री पद के दावेदार रहे ही, वे विजयवर्गीय के बेहद करीबी हैं। मंत्री पद छोड़ भाजपा में आए चार मंत्रियों समेत कुल 20 पूर्व विधायकों में से चार में भी निराशा पनप सकती है। लेकिन समूचे देश के साथ  मप्र भी कोरोना के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। ऐसे में कोरोना मामले में पांचवी पायदान पर बने हुए मप्र की 8 करोड़ जनता को मदद, राहत, भरोसा देने के काम को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है। ये पांंच मंत्री मुख्यमंत्री के पहले से जारी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएंं, उनकी यही भूमिका अब कसौटी पर होगी।                                 
 
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