महात्मा गांधी ने दुनिया को नैतिकता का नया आधार दिया

Dr.Naaz Parveenडॉ. नाज परवीन Updated Sat, 03 Oct 2020 12:57 PM IST
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गांधी के जीवन का एक भी क्षण ऐसा नहीं रहा जिसमें उन्होंने लोगों से घृणा का भाव रखा हो।
गांधी के जीवन का एक भी क्षण ऐसा नहीं रहा जिसमें उन्होंने लोगों से घृणा का भाव रखा हो। - फोटो : social media

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विनय, शांति, दया और आम-जनमानस के विचारों के प्रति आदर, लोगों को समझने की शक्ति और सत्य के प्रति भक्ति भाव से भरपूर महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 में (पिता) करमचंद गांधी और (माता) पुतलीबाई के घर हुआ था। बचपन से ही उनके कोमल मन में सत्य, अहिंसा और असमानता से जूझते कई प्रश्न उठते थे, जिनका हल वे स्वयं ही ढूंढ़ने का प्रयास करते।

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उनके इन्हीं प्रयासों का परिणाम था कि आगे जाकर न सिर्फ उन्होंने भारत को आजाद कराया बल्कि जीवन के हर पहलुु को चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हो या धार्मिक उसे नैतिकता का नया आधार दिया। सत्य का गांधी से गहरा नाता है।



सत्य और गांधी एक दूसरे के पर्याय ही समझ आते हैं। गांधी की जीवनी सत्य के प्रयोग पर नजर डाले तो ऐसे कई घटनाक्रम हैं, जिनमें गांधी सत्य में और सत्य गांधी में समाया हुआ नजर आएगा। यहीं नहीं गांधी से जब कोई व्यक्ति असत्य बोलता, तो वह उस व्यक्ति से नाराज नहीं होते बल्कि स्वयं की कमियों को तलाशने में लग जाते।

सत्य की कसौटी पर अजीवन वे स्वयं को कसते रहे और सत्यनारायण के सामने सत्यस्वरूप बनकर ही अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। सत्य पर आरूढ़ होना ही गांधी का सत्याग्रह है। महात्मा गांधी का सत्य के लिए आग्रह प्रत्येक उस व्यक्ति के लिए था, जो शोषित था, प्रताड़ित था, परेशान था।

फिर वह परेशानी ब्रिटिश हुकूमत से हो या भारतीय साहूकारों और पूंजीपतियों से। गांधी अड़ि़ग थे, अन्याय के विरूद्ध चाहे दक्षिण अफ्रीका हो या भारत हर सरजमीं पर गांधी के जीवन में सत्य को सर्वोच्च और उत्कृष्ट स्थान प्राप्त था। जो उन्हें मोहन से महात्मा बनाता है।

गांधी के जीवन का एक भी क्षण ऐसा नहीं रहा जिसमें उन्होंने लोगों से घृणा का भाव रखा हो। उनके जीवन की पारदर्शिता मन के भीतर और बाहर एक समान थी। उनकी वाणी में संयम और प्रेम था। इसलिए आज भी दुनिया महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा लेती है।  

गांधी ने जीवन के हर मोड़ पर मानवता की सेवा को ही अपना धर्म माना। अस्पृश्यता और असमानता को मिटाने के लिए मीलों यात्राएं कीं, असंख्य सभाएं कीं, लोगों से हृदय परिवर्तन की अपील की, किसानों और मजदूरों की लड़ाई लड़ी।

लोगों को संगठित करके अंग्रेजी हुकूमत के विरूद्ध कई आंदोलन किए। उनकी वाणी में गजब का जादू था। जिस स्थान पर ब्रिटिश हुकूमत भी अपने लश्कर के साथ जाने में कतराती थी, वहां गांधी बे-खौफ अकेले जाते थे। भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने का उनका प्रयास निरंतक जारी रहा।

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