नसबंदी को लेकर कब बदलेगी आखिर पुरुषों की मानसिकता?

Bhawna Masiwalभावना मासीवाल Updated Fri, 29 Nov 2019 07:39 AM IST
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पुरुष नसबंदी की तुलना में महिला नसबंदी बेहद जटील है और इसके फेल होने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा रहता है।
पुरुष नसबंदी की तुलना में महिला नसबंदी बेहद जटील है और इसके फेल होने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा रहता है।

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विश्व में जनसंख्या के स्तर पर भारत दूसरा बड़ा देश है। अगर जनसंख्या ऐसे ही बढ़ती रही तो आने वाले समय में भारत,  चीन को भी पीछे छोड़कर नंबर वन की भूमिका में आ जाएगा। इसका कारण जनसंख्या विस्फोट और जनसंख्या को नियंत्रित करने वाला कोई पैमाना नहीं होना है। जनसंख्या का तेजी से बढ़ना भारत को सामाजिक, आर्थिक दोनों ही क्षेत्रों में पीछे कर रहा है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव से हमारे सीमित प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन हो रहा है, बेरोजगारी का स्तर भी उसी तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ते जनसंख्या की वजह से सामाजिकता खत्म हो रही है और शहरों में एकल प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह जनसंख्या विस्फोट भारत के लिए हर दृष्टि से खतरनाक साबित होगा।
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जनसंख्या के नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी सामाजिक स्तर पर सोच में बदलाव लाना है। परिवारों में आज भी बच्चों के नियंत्रण का दबाव महिलाओं पर होता है। जबकि पुरुष अपने पुरुषार्थ के दंभ में इस पर विचार नहीं करते हैं। यदि विचार करते भी हैं तो नसबंदी के विकल्प को स्वीकार नहीं करते। क्योंकि नसबंदी उनकी समाज निर्मित मानसिक संरचना में पुरुषार्थ पर प्रश्न चिन्ह अंकित कर देती है। हालांकि विकल्प के तौर पर गर्भ निरोध गोलियां भी मौजद हैं लेकिन ये गोलियां किसी न किसी तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। ये ही वजह है कि महिलाएं इन दवाओं की जगह नसबंधी के विकल्प को अपनाती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं। 1960 के दशक में गर्भनिरोधक गोलियों की शुरुआत के बाद से ही इसके इस्तेमाल से अलग-अलग तरह के साइड इफेक्ट्स देखने को मिले हैं। फैकल्टी ऑफ़ सेक्सुअल एंड रिप्रॉडक्टिव हेल्थकेयर के उप-निदेशक डॉ. सारा हार्डमैन कहती हैं कि गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से प्रति दस हज़ार में से पांच से बारह महिलाओं में खून का थक्का जमने की शिकायत सामने आती है। और इनमें से कुछ महिलाओं की मौत होती है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि गर्भनिरोधक गोलियां महिलाओं के लिए असुरक्षित हैं।
 
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