पटरी से उतर सकती है नगा शांति वार्ता

Ravishankar Raviरविशंकर रवि रवि Updated Mon, 14 Oct 2019 01:27 PM IST
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बागी नगा नेता मुइवा ने नगाओं की अलग पहचान से समझौता करने से मना कर दिया है।
बागी नगा नेता मुइवा ने नगाओं की अलग पहचान से समझौता करने से मना कर दिया है। - फोटो : social media

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बागी नगा नेता मुइवा ने नगाओं की अलग पहचान से समझौता करने से मना कर दिया है। इससे नगा समस्या के समाधान की राह मुश्किल हो गई है। वे अलग ध्वज और संविधान से कम पर कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं।  यह माना जा रहा था कि भारत सरकार और एनएससीएन (आईएम) और दूसरे नगा संगठनों के बीच जारी शांति वार्ता जल्द ही सफल मुकाम पर पहुंच जाएगी।
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लेकिन गत 10 अक्टूबर को वार्ताकार तथा नगालैंड मे राज्यपाल आर.एन रवि से दिन भर चली बातचीत के बाद बागी नगा नेता टी मुइवा ने साफ कर दिया है कि वे नगाओं की अलग पहचान के सवाल पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
भारत सरकार को पूरा करना चाहिए वादा
उनका मतलब साफ है कि नगालैंड के लिए अलग ध्वज और संविधान से कम पर शांति समझौता को स्वीकार नहीं सकते हैं। मुइवा का कहना है कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में भारत सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा करना चाहिए। इस बैठक के बाद श्री रवि ने प्रधानमंत्री से बंद कमरे में मुलाकात की है। उसके बाद केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन यह माना जा रहा है कि अलग ध्वज और संविधान के प्रस्ताव को स्वीकार करना संभव नहीं होगा।

मुइवा का यह बयान ऐसे समय में आया है, जबकि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से उस राज्य का ध्वज और संविधान समाप्त करने के लिए संविधान की धारा-370 को हटा दिया है। भारत सरकार एक राष्ट्र ध्वज और संविधान की नीति पर चल रही है। ऐसे में नगालैंड के लिए अपना ध्वज और संविधान के प्रस्ताव को स्वीकार करना नामुमकिन है। मुइवा के इस बयान से नगा समस्या के समाधान में एक बाधा आ गई है। मुइवा नगालैंड को भारत में शामिल करने की जगह एक अलग भूभाग के रूप में मान्यता दिलाना चाहते हैं। वे मानते हैं कि नगा कभी भी भारत के अधीन नहीं रहे हैं। भले ही विदेश नीति, मुद्रा, दूरसंचार और रक्षा का दायित्व भारत  के अधीन रहे। यानी वे भारत के अंदर एक  स्वंतत्र नगा भूभाग के लिए प्रतिबद्ध है। जिसे स्वीकार करना भारत सरकार के लिए संभव नहीं है। यदि सरकार  नगाओं को भारत में शामिल करना चाहती है तो यह संभव नहीं होगा।
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