National Doctors Day 2020: देश के इस सपूत को था डॉक्टरी का जुनून, बिधान चंद्र रॉय के चिकित्सा कार्यों को समर्पित है यह दिन

surender kumarसुरेंदर कुमार Updated Wed, 01 Jul 2020 12:40 PM IST
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आज राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस है- सांकेतिक तस्वीर
आज राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Shutterstock

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सार

  • डॉ.रॉय मरीज को शारीरिक रूप से स्वस्थ करने के साथ-साथ मानसिक व भावात्मक रूप से भी मजबूत करते थे।
  • सरकार इस दिन चिकित्सा में विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले चुनिंदा चिकित्सकों को सम्मानित भी करती है।
  • अबकी बार आमजन ने डॉक्टरों को पैसों के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए सेवाएं प्रदान करते हुए देखा।

विस्तार

आज राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस है। यह दिन विख्यात चिकित्सक बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में प्रति वर्ष 01 जुलाई को मनाया जाता है। डॉ. रॉय का जन्म 01 जुलाई 1882 को बिहार के एक प्रवासी बंगाली परिवार में हुआ था। वर्ष 1909 में कोलकाता से स्नातक करने के बाद रॉय ने यही से एमडी की उपाधि भी हासिल की।
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तदोपरांत वह अपनी आगामी शिक्षा प्राप्ति के लिए वे विदेश चले गए। उनकी इच्छा लंदन के प्रतिष्ठित सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल में प्रवेश लेने की थी। लेकिन अस्पताल के डीन ने उन्हें प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला देने से सिर्फ इसलिए इंकार कर दिया कि वे एक क्रांतिकारी भारतीय थे। बावजूद इसके डॉ.राय कॉलेज में प्रवेश के लिए आवेदन करते रहे।
अस्पताल के डीन उनका आवेदन हर बार बरखास्त करते रहे तथा बिधान चंद्र रॉय निस्वार्थ भाव से दाखिले के लिए आवेदन करते रहे। डीन ने लागातार 29 बार उनका प्रवेश आवेदन अस्वीकार किया। परंतु डॉक्टर राय 30वीं बार पुनः आवेदन करने के लिए अस्पताल के बाहर खड़े हो गए।

फलस्वरूप अस्पताल प्रबंधन को उनके चिकित्सा जूनून के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा और बिधान चंद्र रॉय को प्रतिष्ठित बार्थोलोम्यू अस्पताल में दाखिला देना पड़ा। रॉय ने लगातार दो वर्ष के गहन अध्ययन के उपरांत अस्पताल से प्रतिष्ठित चिकित्सा डिग्री हासिल की। भारत लौटकर उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में अनेकों आयाम स्थापित किए।

कई बार रोगी का उपचार करते हुए वे इतना खो जाते थे कि उन्हें अपने खाने-पीने का ख्याल भी नहीं रहता था। उनकी डॉक्टरी के चर्चे इतने मशहूर थे कि वे मरीज का चेहरा देख कर ही सहजता से मरीज की मर्ज टटोल लेते थे। उनके रोगी पर हाथ फेरने मात्र से आधा रोग छूू मंतर हो जाते थे।

डॉ.रॉय मरीज को शारीरिक रूप से स्वस्थ करने के साथ साथ मानसिक व भावात्मक रूप से भी मजबूत करते थे। चिकित्सा क्षेत्र में मीलों उपलब्धियां हासिल करने के उपरांत राय की शख्सियत एक समान सुधारक एवं कुशल शासक के रूप में भी प्रसिद्ध होती गई।

बतौर स्वतंत्रता सेनानी उन्होंने 1920 में असहयोग अंदोलन के दौरान महात्मा गांधी जी के साथ मिलकर अंग्रेजों की नाक में दम किया। इससे भी अहम बात यह है कि 01 जुलाई 1961 में अपने स्वर्गवास से ठीक पहले डॉ. रॉय ने अपनी सम्पूर्ण चल व अचल संपत्ति जनता को भेट कर दी थी।
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वर्तमान परिपेक्ष्य में यह धारण बखूबी चरितार्थ हो रही है...

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