जन्मदिन विशेष: 82 साल के हो गए बांसुरी के पर्याय बन चुके पंडित हरिप्रसाद चौरसिया

Atul sinhaअतुल सिन्हा Updated Wed, 01 Jul 2020 06:27 PM IST
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पंडित हरिप्रसाद चौरसिया 82 साल की उम्र में भी लगातार रियाज करते हैं
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया 82 साल की उम्र में भी लगातार रियाज करते हैं

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अभी एक साल भी नहीं बीता है, भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया कांठमांडू गए तो उनका वहां के तमाम युवा कलाकारों ने बांसुरी बजाकर अभिनंदन किया, भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित उनके शो में नेपाल के उप प्रधानमंत्री से लेकर विदेश मंत्री और तमाम मंत्रिगण मौजूद रहे, पूरा हॉल तालियों से गूंज रहा था। नेपाल और भारत के बीच पारंपरिक सांस्कृतिक रिश्तों की एक अद्भुत मिसाल नजर आ रही थी।
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लेकिन इन चंद महीनों में बहुत कुछ बदल गया। नेपाल और भारत के रिश्तों में खटास आ गई। कोरोना काल के पिछले 4-5 महीनों में तो हालात बद से बदतर हो गए। ऐसे वक्त में अगर उस दौरान पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की बातों को याद करें और आज के हालात देखें तो वो चर्चित गीत की पंक्तियां याद आ जाती हैं... ‘वो जो कहते थे, बिछड़ेंगे हम ना कभी, बेवफा हो गए देखते देखते.. क्या से क्या हो गए देखते देखते।‘
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया 82 साल के हो गए। इस दौरान कई दफा नेपाल गए। लेकिन 81 साल की उम्र में पिछले साल अगस्त में उन्होंने वहां जाकर संगीत का जो समां बांधा, बांसुरी पर जो धुनें सुनाईं, उससे सरहदों की सारी दीवारें खत्म हो गईं। 
बाद में दूरदर्शन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा– हमें तो भारत-नेपाल में कभी कोई फर्क नहीं लगता, लगता है अपने घर में बजा रहा हूं। यहां के लोगों में भी संगीत से और खासकर बांसुरी से खासा प्रेम है। बांसुरी एक माध्यम है। भारत और नेपाल में कोई फर्क है ही नहीं। चेहरे एक से हैं, भाषा एक-सी है, खाना एक-सा है। मुझे लगता ही नहीं कि कोई अलगाव है।

लेकिन जमीन के चंद टुकड़े के साथ अपनी अस्मिता को लेकर जो संघर्ष शुरु हुआ, उसने एक सदियों पुराने दोस्ती के रिश्तों में आज दरार ला दी। बेशक हरिप्रसाद चौरसिया सरीखे तमाम शख्सियतों के लिए ये दिल में चुभने वाला माहौल है।  
हालात चाहे जैसे भी हों, लेकिन संगीत सभी मर्ज का इलाज है। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया 82 साल की उम्र में भी लगातार रियाज करते हैं। कोई दिन ऐसा नहीं होता जब उनकी फूंक कई तरह की छोटी बड़ी बांसुरियों से कोई धुन न छेड़ दे। 
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