संविधान का 70 साल का सफरः संविधान में भारतीयता के अनूठे रंग

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Tue, 26 Nov 2019 11:19 AM IST
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constitution of india
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(26 नवंबर 1949) आज हम भारतीयों का संविधान बनकर तैयार हुआ था। आज 70 वर्ष बाद हमारा संविधान क्या अपनी उस मौलिक प्रतिबद्धता की ओर उन्मुख हो रहा है जिसे इसके रचनाकारों ने अपनी भारतीयता के प्रधानतत्व को आगे रखकर बनाया था।
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हम मूल संविधान की प्रति उठाकर पन्नों को पलटते हैं तो हमें उसके अंदर सुविख्यात चित्रकार नन्दलाल बोस की कूची से बनाए हुए कुल 22 चित्र नजर आते हैं।
इन चित्रों के आधार पर ही हम समझ सकते हैं कि हमारे संविधान निर्माताओं के मन और मस्तिष्क में कैसे आदर्श भारतीय समाज की परिकल्पना रही होगी। इन चित्रों की शुरुआत मोहनजोदड़ो से होती  है और फिर वैदिक काल के गुरुकुल, महाकाव्य काल के रामायण में लंका पर प्रभु राम की विजय,गीता का उपदेश देते श्री कृष्ण,भगवान बुद्ध भगवान महावीर,सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म का प्रचार,(मौर्य काल), गुप्त वंश की कला जिसमें हनुमानजी का दृश्य है, विक्रमादित्य का दरबार, नालंदा विश्वविद्यालय, उड़िया मूर्तिकला,नटराज की प्रतिमा, भागीरथ की तपस्या से गंगा का अवतरण,मुगलकाल में अकबर का दरबार, शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह ,टीपू सुल्तान और महारानी लक्ष्मीबाई,गांधी जी का दांडी मार्च,नोआखली में दंगा पीड़ितों के बीच गांधी,नेताजी सुभाषचंद्र बोस,हिमालय का दृश्य,रेगिस्तान का दृश्य,महासागर का दृश्य शामिल है।
 
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