हिंदुस्तान के लिए क्या सोचते हैं भारतीय मूल के कीवी क्रिकेटर्स?

Vimal Kumarविमल कुमार Updated Sun, 22 Mar 2020 07:11 AM IST
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Story of Indian origin New Zealand cricketers

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कोरोना के चलते क्रिकेट जगत में खबरों का अकाल सा पड़ गया है। न्यूजीलैंड दौरे से वापस लौटने के बावजूद एक कहानी मेरे जेहन में तैरती रही है। और वो ये कि कैसे भारतीय या एशियाई मूल के खिलाड़ी कीवी क्रिकेट का हिस्सा बनते जा रहें हैं। न्यूजीलैंड की टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी भी अपने आप में एक सुखद अनुभव है। मुंबई के एजाज पटेल को वेलिंग्टन टेस्ट में भले ही सिर्फ 6 ओवर की गेंदबाजी का मौका मिला, लेकिन उनका इस मुल्क के लिए खेलना दिखाता है तो यहां पर आपको मौका बराबरी के स्तर पर दिया जाता है।
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पटेल से जब हमारी मुलाकात होती है तो हमने उनसे हिंदी में बात करने की गुजारिश की और वो तुरंत तैयार हो गए। उनकी जुबान में किसी भी तरह से न्यूजीलैंड का असर नहीं था। वो 6 साल की उम्र में मुंबई से अपने परिवार के साथ यहां आ गए थे और क्रिकेट में ऐसे रम गए कि अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के तौर पर अलग पहचान मिल रही है।' भारत के खिलाड़ी ही मेरे हीरो रहें हैं। मैं रवींद्र जडेजा से काफी प्रभावित हूं और उनकी गेंदबाजी को काफी गौर से देखता हूं।' पटेल की बातों में ये साफ झलकता है कि उनके घर में अब भी भाषा और संस्कृति के लिहाज से हिंदुस्तान जीवित है। कुछ ऐसा ही हाल साथी खिलाड़ी ईश सोढ़ी का है। सोढ़ी से जब हमने हिंदी में बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा वो हिंदी समझते पूरा है, लेकिन पंजाबी में ज्यादा सहज महसूस करते हैं।'
मैं जब भी भारत दौरे पर जाता हूं तो मेरी पंजाबी और अच्छी हो जाती है। मेरी शादी पूरी तरीके से पंजाबी शैली में ही हुई थी।' पंजाब के लुधियाना से आए सोढ़ी का परिवार अब पूरी तरह से कीवी हो गया है, लेकिन उनके घर में और दिल में भारत भी बसता है। मैनें जब उनसे ये पूछा कि क्या भारत के मुकाबले न्यूजीलैंड के लिए खेलना आसान है तो वो थोड़े नाराज हो गए। 'आपको लगता है कि किसी भी मुल्क के लिए क्रिकेट खेलना आसान है। चाहे वो भारत हो या न्यूजीलैंड। हां, ये तो किसी से छिपा नहीं है कि भारत में आपका मुकाबला लाखों खिलाड़ियों से होता है, लेकिन यहां पर उतने नहीं हैं, जिसकी वजह जनसंख्या है'।
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