घाटे के बावजूद असम के चाय बागानों में उम्मीद जगी लेकिन उत्पादन पर होगा बड़ा असर

Ravishankar Raviरविशंकर रवि Updated Sun, 19 Apr 2020 07:56 PM IST
विज्ञापन
असम में 800 से अधिक चाय बागान और 6 हजार से ज्यादा छोटे बागान हैं। करीब 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
असम में 800 से अधिक चाय बागान और 6 हजार से ज्यादा छोटे बागान हैं। करीब 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने के लिए जारी लॉकडाउन के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर असम के ज्यादातर चाय बागानों में काम शुरू हो गया है। इसलिए लॉकडाउन के संकट से गुजर रहे असम के चाय उद्योग के लिए नई उम्मीद जगी है। पहली बात तो यह कि असम के चाय बागानों में जरूरी दूरी रखते हुए चाय मजदूरों ने पत्तियां तोड़ना शुरू कर दिया है और  चाय फैक्ट्रियों में चाय उत्पादन चल पड़ा है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि असम सरकार ने गुवाहाटी टी ऑक्शन में चाय की नीलामी की अनुमति दे दी है। 
विज्ञापन

असम सरकार ने चाय की बिक्री के लिए 16 अप्रैल से नीलामी की अनुमति दे दी थी, लेकिन बंद बड़े नीलामी केंद्र और बिक्रेताओं की व्यवस्था में समय लगा। इसलिए 23 अप्रैल से चाय की नीलामी आरंभ की जाएगी। लेकिन इस सुविधा का लाभ उन्हीं बिक्रेताओं, खरीददारों और वेयर हाउस के गोदामों और तथा चाय की ढुलाई करने वाले परिवहन संस्थानों को मिलेगा, जिनके पंजीकृत कार्यालय गुवाहाटी में हैं। पिछले वर्ष गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में 195 मिलियन किलोग्राम चाय की नीलामी हुई थी। जबकि असम ने पिछले वर्ष 655 मिलियन किग्रा चाय का उत्पादन किया था। चाय बागानों में काम आरंभ होने तथा चाय की नीलामी जारी होने से संकट में फंसे चाय उद्योग को थोड़ी राहत मिलेगी। 
असम देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। असम में 800 से अधिक चाय बागान और 6 हजार से ज्यादा छोटे बागान हैं। करीब 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। चाय बागान में कामकाज शुरू होने और चाय की नीलामी आरंभ होने के बावजूद असम के चाय उद्योग को संभलने में समय लगेगा। अब तक असम के चाय उद्योग को बड़ा झटका लग चुका है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक इस दौरान राज्य के चाय उद्योग को लॉकडाउन के कारण तकरीबन 1218 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है। 
नॉर्थ ईस्टर्न टी एसोसिएशन के सलाहकार बिद्यानंद बरकट की की ओर से दी गई जानकारी काफी चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि राज्य में चाय उत्पादन मौसमी प्रकृति का है। इस बार तीन माह के अनुत्पादक ऑफ-सीजन के बाद मार्च माह के दूसरे सप्ताह में ही नया सीजन शुरू हुआ था। लेकिन विगत 22 मार्च को कोरोना वायरस के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर घोषित लॉकडाउन के कारण राज्य के चाय बागान बंद हो गए थे। सीजन शुरू होने के चंद दिन बाद माह के दौरान पैदा होने वाली लगभग 30 मिलियन किग्रा चाय फसल का नुकसान झेलना पड़ा। 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us