गीता और गांधी के जरिए सोशल पुलिसिंग में जुटा है यह आईपीएस अधिकारी

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Sun, 29 Dec 2019 12:35 PM IST
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मध्यप्रदेश में एक आईपीएस अफसर अपने सामाजिक सरोकारों के जरिए सोशल पुलिसिंग की नई कहानी लिख रहे हैं।
मध्यप्रदेश में एक आईपीएस अफसर अपने सामाजिक सरोकारों के जरिए सोशल पुलिसिंग की नई कहानी लिख रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला

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मध्यप्रदेश में एक आईपीएस अफसर अपने सामाजिक सरोकारों के जरिए सोशल पुलिसिंग की नई कहानी लिख रहे हैं। गीता और गांधी के प्रति दीवानेपन की वजह से आईपीएस अधिकारी राजाबाबू सिंह को लोग व्याख्यान के लिए बुलाने पर आतुर रहते हैं। इस अधिकारी की चर्चा इन दिनों सूबे में न केवल सोशल पुलीसिंग के लिए हो रही है बल्कि गीता और गांधी के वैचारिक अधिष्ठान को समाज मे मैदानी स्तर पर स्थापित करने के लिए भी  हो रही है।
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राजाबाबू सिंह अब तक लगभग 11 हजार भगवद्गीता की प्रतियां अपने हाथों से बांट चुक हैं। वे कोशिश करते हैं कि युवाओं के बीच गीता को एक जीवन ग्रन्थ के रूप में न केवल प्रतीकात्मक रूप से वितरित करें बल्कि इसके मूल मन्तव्य को भी नई पीढ़ी तक हस्तांतरित कर सकें। राजाबाबू सिंह अपने हर सरकारी दौरे में किसी सरकारी या निजी स्कूल में बच्चों से संवाद जरूर करते हैं। वो बच्चों को समझाते हैं कि 'गीता कोई धर्म या उपासना पद्धति से जुड़ा ग्रन्थ नही है बल्कि यह मानवीय सभ्यता का दिग्दर्शक है। यह हमें अधिकारों के साथ कर्त्तव्य पथ और उसकी अपरिहार्यता का भान कराता है।
 
वह कहते हैं कि आज की सामाजिक समस्याओं का मूल गीता के संदेशों में छिपा है। हम अगर अपानी क्षमता और वैशिष्ट्य के मुताबिक कार्य करें तो सामाजिक दरकन कहां से पैदा होगी? राजाबाबू सिंह इस बात से चिंतित है कि समाज की मौजूदा पीढ़ी का रिश्ता हमारी परंपरा और ज्ञान से पूरी तरह कट रहा है।
 
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