ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन की जीत के मायने और भारतीय राजनीति

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Mon, 23 Dec 2019 01:39 PM IST
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नरेंद्र मोदी, बोरिस जॉनसन के साथ
नरेंद्र मोदी, बोरिस जॉनसन के साथ - फोटो : social media

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नागरिकता संशोधन कानून के शोर-शराबे के बीच एक दूसरी खबर भी भारत में चर्चा का विषय है। ब्रिटिश संसद के चुनाव में बोरिस जॉनसन का प्रधानमंत्री चुना जाना। जॉनसन ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के उम्मीदवार थे उन्होंने निचले सदन की 650 सीटों में से 363 सीट जीतकर लेबर पार्टी के जेरेमी कार्बिन को तगड़ी शिकस्त दी है।
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भारत के लिए बोरिस जॉनसन का राजनयिक महत्व अपनी जगह मोदी के साथ उनके घोषित रिश्तों को लेकर तो है ही लेकिन इससे बड़ा सवाल भारत के उन बुद्धिजीवियों के लिए बहुत कचोटने वाला है जो वैश्विक दक्षिणपंथी उभार को लेकर प्रयोजित प्रोपेगैंडा चला रहे हैं।
यह नतीजे इस चिन्हित वर्ग के लिए किसी सदमे से कम नही है क्योंकि एशियाई मूल के लगभग सभी मोदी विरोधियों ने ब्रिटिश चुनाव में बोरिस जॉनसन को मोदी और हिंदुत्व के प्रति उनकी उदारता को आधार बनाकर सभी प्रचार माध्यमों में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रखी थी। ब्रिटिश समाज मे पाकिस्तानी मूल के नागरिकों का साथ भी मोदी विरोधियों को यहां भरपूर मिला हुआ था।
लेबर पार्टी के भारत विरोधी रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है 15 अगस्त को हजारों पाकिस्तानी मूल के लोगों ने भारतीय हाईकमिश्नर के सामने कश्मीर में 370 हटाए जाने के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया था।
 
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