कोरोना संकट: क्या चीन के पूरी तरह से नियंत्रण में है WHO?

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Fri, 29 May 2020 12:43 PM IST
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क्या इन आरोपों को सच माना ही जाना चाहिए जो अमेरिका ने डब्लूएचओ की भूमिका को लेकर लगाए हैं
क्या इन आरोपों को सच माना ही जाना चाहिए जो अमेरिका ने डब्लूएचओ की भूमिका को लेकर लगाए हैं - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • वैश्विक परिदृश्य में चीन की बढ़ती स्वेच्छाचारिता और अमानवीयता।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन 2017 से ही चीन की तरफदारी में जुटा है।
  • पूरी दुनिया चीन के गैर जिम्मेदाराना रवैये के विरुद्ध लामबंद हो रही है।
  • चीन की बढ़ती पूंजीवादी ताकत के आगे 72 साल पुराना यह संगठन बंधक सा बनकर रह गया है।

विस्तार

अफ्रीका के जीका जंगल से फैला वायरस जीका कहलाया, इबोला नदी से पैदा हुआ वायरस इबोला वायरस के नाम से जाना गया है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यही नामकरण किए थे इन वायरस के। चीन के वुहान प्रांत से निकला वायरस" चीनी या वुहान वायरस" क्यों नही कहलाया? उसे नया नाम दिया गया 'कोविड19'। 
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यह नामकरण असल में चीन की करतूतों पर पर्देदारी का प्रयास ही था। अब दुनियाभर के देशों के दबाव में इस संगठन की कोरोना पर भूमिका की जांच का निर्णय हो चुका है। सवाल यह है कि चीन के आगे एक तरह से सरेंडर कर चुके डब्ल्यूएचओ चीफ क्या वुहान के इस पाप की वास्तविक तथाकथा पता करने का साहस जुटा पाएंगे? और चीन क्या वाकई दुनिया के दबाव में अपने यहां विकसित इस जैविक हथियार की अंतर्कथा को सामने आने देगा?
वैश्विक परिदृश्य में चीन की बढ़ती स्वेच्छाचारिता और अमानवीयता के मद्देनजर यह असंभव ही लगता है। असल में विश्व स्वास्थ्य संगठन 2017 से ही चीन की तरफदारी में जुटा है क्योंकि उसके डीजी ट्रेडोस घ्रेबेयसस जिनपिंग के रहमोकरम पर ही इस पद को पा सके थे।
कोरोना संकट की स्पष्ट पदचाप के बीच इस साल जनवरी में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस अदनोम घेब्रेयसस चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मिलने बीजिंग जाते हैं और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की तारीफ में कसीदे गढ़ते है। वुहान में फैली बीमारी से निबटने के लिए चीन को निपुणता का प्रमाण-पत्र भी जारी करते हैं।

11 फरवरी को डब्लूएचओ ने इसे कोविड -19 का नाम दिया तब तक 44 देश इसके संक्रमण की चपेट में आ चुके थे। इस दौरान अधिकृत रूप से डब्लूएचओ ने यह भी कहा कि कोविड आदमी से आदमी में नही फैलता है। न कोई एडवाइजरी जारी की गई कि लोग वुहान आने में एहतियात बरतेंं।

पूरे 57 दिन तक चीनी वायरस ने दुनिया के 79 देशों में चार हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली तब जाकर डब्लूएचओ ने 11 मार्च को इसे वैश्विक महामारी घोषित किया। आज कोविड-19 से संक्रमित संख्या 50 लाख और मरने वालों का आंकड़ा 3 लाख को पार कर गया है।

तो क्या इन आरोपों को सच माना ही जाना चाहिए जो अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सहित अन्य देशों ने डब्लूएचओ की भूमिका को लेकर लगाए हैं।
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कोरोना संकट पर जो वैश्विक परिदृश्य है उस पर भारत में कोई विमर्श ही नही करना चाहता है...

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