कोरोना से जंग में पाकिस्तान की मुश्किलें

mariana babarमरिआना बाबर Updated Fri, 10 Apr 2020 12:46 AM IST
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पाकिस्तान- कोरोना वायरस
पाकिस्तान- कोरोना वायरस - फोटो : social media

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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनेटर और कभी बेनजीर भुट्टो के नजदीकी रहे फरहतुल्लाह बाबर ने कहा है कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से पूरी दुनिया का ध्यान गरीबों पर केंद्रित हुआ है। उन्होंने कहा है, 'यह धारणा बनी है कि अगर सरकारें गरीबों व दैनिक मजदूरों को स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा देने में विफल रही, तो यह महामारी उस पूंजीवादी ढांचे को ध्वस्त कर देगी, जो पूरी दुनिया पर काबिज है, और सिर्फ गरीबों को नहीं, बल्कि सबको मिटा देगी।' पाकिस्तान में ज्यादा से ज्यादा लोग अब सरकार से कहने लगे हैं कि मुल्क को सैन्य सुरक्षा केंद्रित मुल्क बनाने के बजाय एक कल्याणकारी मुल्क बनाने का यही सही समय है।
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पाकिस्तान में कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीज ठीक भी हो रहे हैं। लाहौर में स्वस्थ हो चुके मरीजों के प्लाज्मा से संक्रमितों के इलाज का ट्रायल शुरू हुआ है। इसके शुरुआती संकेत चूंकि उत्साहजनक हैं, ऐसे में, बड़े पैमाने पर इस तरह से इलाज करने के बारे में सोचा जा रहा है।
पाकिस्तान फिलहाल जिस सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, वह डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी है। दुनिया के अनेक देश इन दिनों इस मुश्किल का सामना कर रहे हैं। चूंकि संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और पाकिस्तान के अनेक अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में, सुरक्षा उपकरणों की कमी महसूस होने लगी है।
आलम यह है कि इलाज करने वाले अनेक डॉक्टर भी संक्रमित पाए गए हैं। इसी हफ्ते कराची के एक नामचीन डॉक्टर की मौत तक हो गई। ऐसे में, सरकारी और निजी अस्पतालों के अनेक डॉक्टर, नर्स, यहां तक कि प्रयोगशालाओं में काम करने वाले भी कह रहे हैं कि उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है, लिहाजा वे उन वार्डों में काम करने नहीं जाना चाहते, जहां कोरोना के मरीज रखे गए हैं।

डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) बेहद जरूरी है, जिसमें खास तरह के कपड़े, डिस्पोजेबल मास्क, गाउन, दस्ताने, शू-कवर, फेस शील्ड, प्रोटेक्टिव गॉगल्स आदि होते हैं। क्वेटा में डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और सुरक्षा उपकरणों के बगैर अस्पतालों और क्लीनिकों में काम करने से इन्कार कर दिया। पुलिस बुलाई गई और कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। मीडिया में  यह खबर आई, तो देश भर में इन गिरफ्तारियों की निंदा की गई। सेना ने तुरंत इसका संज्ञान लिया और सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा ने बलूचिस्तान में चिकित्साकर्मियों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने का हुक्म दिया। उसके बाद ही डॉक्टरों ने काम पर लौटने का एलान किया।

पाकिस्तान में कोरोना का पहला मामला पाक-ईरान सीमा पर रेल और हवाई रूटों के जरिये आया। दरअसल हजारों पाकिस्तानी श्रद्धालु ईरान के कोम में गए थे। पाकिस्तान सरकार ने तुरंत ही सीमा सील कर दी। लेकिन ईरान की सरकार के साथ सहयोग के कारण आज भी श्रद्धालु सरहद पार कर पाकिस्तान पहुंचते हैं, तयशुदा वक्त क्वारंटीन में बिताते हैं, फिर अपने-अपने सूबों में लौट जाते हैं।

कोम से लौटे ज्यादातर लोग जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं, और अब खासकर सिंध में यह वायरस समुदायों में फैलने लगा है। अफगानिस्तान से लगती सीमा भी सील कर दी गई थी, लेकिन अफगान सरकार के अनुरोध के बाद पड़ोस के देश में जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए ट्रक जा रहे हैं। लोग अफगानिस्तान से लौटकर आने वाले ट्रक ड्राइवरों और कर्मचारियों के लिए चिंतित हैं और उन्हें क्वारंटीन में रखने के इंतजाम भी किए गए हैं।

लेकिन यह आसान काम नहीं होगा, क्योंकि तोर्खान पाकिस्तान के प्रमुख शहरों से बहुत दूर है और वहां इलाज की वैसी व्यवस्था भी नहीं है। इसी हफ्ते वहां अफगानियों की भारी भीड़ देखी गई, जिनमें से बहुत कम लोगों ने मास्क लगा रखा था और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कोई नहीं कर रहा था। उनके लिए तोर्खान सरहद को फिर से खोला गया। उनमें से कितने लोग संक्रमित थे, यह अल्लाह ही जानता है। हवाई अड्डों पर चूंकि कम भीड़ होती है, ऐसे में, वहां हरेक मुसाफिर पर नजर रखी जा सकती है, लेकिन जमीनी सरहद पर यह मुमकिन नहीं है।

पाकिस्तान के गांवों में सोशल डिस्टेंसिंग का कोई सुबूत नहीं है। वहां जीवन पहले की ही तरह सामान्य है, और मास्क लगाने के प्रति कोई भी संजीदा नहीं है। सरकार को शहरों में ही हालात को काबू में रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ी है, गांवों पर नजर रखने के लिए तो उसके पास क्षमता भी नहीं है। लाहौर और कराची के दृश्य बताते हैं कि लॉकडाउन के शुरुआती दिनों के बाद अब लोग खुलेआम कानून तोड़ते हुए बाजारों में जा रहे हैं।

पाकिस्तान में संक्रमण का आंकड़ा 4,000 को पार कर गया है, फिर भी सड़कों पर सभी तरह की गाड़ियां हैं और लोग शिकायत करते पाए जा रहे हैं कि उनके लिए घर से बाहर निकलना जरूरी है। हालांकि सरकार दुकानों पर नियम-कानून लागू कराने में सफल हुई है। जरूरी सामान की दुकानें हर हाल में शाम पांच बजे बंद हो जाती हैं।

सबसे बड़ी समस्या असंगठित क्षेत्र के लाखों लोगों की है, जो बेरोजगार हो गए हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के 12 करोड़ गरीबों और दैनिक मजदूरों को चार महीने तक 12,000 रुपये प्रति महीने देने का एलान किया है। लेकिन यह काफी नहीं है, और राहत सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को हथियारबंद समूहों द्वारा लूट लेने के कई मामले सामने आए हैं। लोगों को लॉकडाउन को संजीदगी से न लेते देख इमरान खान को कहना पड़ा है कि आने वाले दिनों में हालात बेहद संगीन हो सकते हैं।

हालांकि लॉकडाउन का एक फायदा यह हुआ है कि पाकिस्तान के जिन शहरों में कभी वायु प्रदूषण बहुत अधिक होता था, वहां नीला आसमान दिखने लगा है। तरह-तरह के पक्षी दिखने लगे हैं और गाड़ियों की आवाजाही बंद होने से सड़कों और गलियों में जानवर भी दिखाई देने लगे हैं। कराची में समंदर का पानी एकदम साफ है। इससे साफ है कि राजनेता अगर चाहें, तो पर्यावरण का मुद्दा सुलझा सकते हैं। (लेखिका वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार हैं।)
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