सेक्स स्कैंडल से पाकिस्तान में तूफान

mariana babarमरिआना बाबर Updated Fri, 19 Jun 2020 05:14 AM IST
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एक चालीस वर्षीय खूबसूरत श्वेत अमेरिकी महिला ने पाकिस्तान में सनसनी पैदा कर दी है। उसने पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, वरिष्ठ मौजूदा जनरलों और मुल्क के कुछ प्रमुख राजनेताओं पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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उसका नाम सिंथिया डेविड रिची है और उसने एक ट्वीट के जरिये तूफान खड़ा करते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के पूर्व गृह मंत्री और अब सीनेटर रहमान मलिक पर कथित रूप से नशीला पेय पिलाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया है।
उसके तुरंत बाद उसने पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मखदूम शाहबुद्दीन पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। गिलानी और रहमान, दोनों न सिर्फ आरोपों को झूठा बताते हुए अदालत में चले गए हैं, बल्कि उन्होंने मानहानि का मुकदमा ठोकते हुए सैकड़ों अरब रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।
रहमान ने कथित तौर पर उसके साथ क्या किया, यह बताने के लिए सिंथिया जब टीवी पर आईं, तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने ब्लॉग में यह भी लिखा कि बेनजीर पर जब हमला हुआ, जिसमें वह मारी गईं, तो वहां से कथित तौर पर भाग खड़े होकर रहमान ने कैसे अपनी नेता को नीचा दिखाया।

लेकिन पीपीपी जिस अपमानजनक दावे के खिलाफ अदालत गई है, वह सिंथिया का एक ट्वीट है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि बेनजीर भुट्टो अपने सुरक्षा गार्डों को उन महिलाओं का बलात्कार करने के लिए कहती थीं, जिनके साथ उनके शौहर आसिफ अली जरदारी रात बिताते थे।

इस ट्वीट के खिलाफ पूरी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी एकजुट हो गई, तो यह स्वाभाविक है, क्योंकि पीपीपी के बाहर के लोग भी मानते हैं कि यह सरासर दुष्प्रचार है। सिंथिया अगर बेहद कमजोर धरातल पर खड़ी हैं, तो इसके लिए वह खुद और उनके ट्वीट्स जिम्मेदार हैं।

उनका दावा है कि वह मई, 2011 की एक रात को सीनेटर रहमान मलिक के पास वीजा के मामले में मिलने गई थीं। लेकिन मौजूदा गृह मंत्रालय द्वारा लीक किए गए दस्तावेजों के अनुसार, सिंथिया को मार्च 2011 में बिजनेस वीजा दिया गया था।

तो फिर वह मई में गृह मंत्री के पास क्यों गई थी? और फिर ऐसा कहीं नहीं होता कि कोई विदेशी नागरिक वीजा मुद्दों को निपटाने के लिए रात में गृह मंत्री के घर जाता हो। सिंथिया ने यह भी ट्वीट किया है कि रहमान मलिक ने उन्हें एक महंगा सैमसंग फोन और 2,000 स्टर्लिंग पाउंड उपहार में दिए थे।

ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि कथित रूप से बलात्कार करने वाले व्यक्ति से आप उपहार कैसे ले सकती हैं। जैसे-जैसे घटनाएं सामने आ रही हैं, यह साफ है कि सत्ता प्रतिष्ठान सिंथिया का बचाव कर रहा है, हालांकि डीजी आईएसपीआर (इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस ऑफ पाकिस्तान) ने पत्रकारों को निजी तौर पर बताया कि सेना का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

पाकिस्तान में मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, पूरी तरह से सरकार के कब्जे में है और यह हैरानी की बात है कि हमारे जिस रूढ़िवादी समाज में कंडोम के विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है, वहां इस अमेरिकी महिला को अपने साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न का वर्णन करने के लिए टीवी पर इतना ज्यादा समय दिया गया।

बहुत कम लोग जानते हैं कि सिंथिया के बिजनेस वीजा को प्रायोजित करने वाले कौन थे। वर्ष 2010 से उनके पाकिस्तान में रहने के बारे में भी बहुत कम लोगों को जानकारी है। लेकिन इसमें शुबहा नहीं कि सिंथिया को अपनी कहानी बताने या इस खास समय में पीपीपी पर निशाना साधने के लिए उकसाया गया है।

कुछ लोग जानते हैं कि सत्ता प्रतिष्ठान केंद्र सरकार को अधिक धन हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए कुछ सांविधानिक बदलाव चाहता है, लेकिन इसके लिए संसद में पीपीपी की मदद की जरूरत है। संभवतः इसलिए पीपीपी पर दबाव बनाया जा रहा हो।

सिंथिया पिछले दस साल से पाकिस्तान में रह रही हैं और पचास से ज्यादा बार पाकिस्तान से बाहर गई हैं। अभी महामारी के कारण उन्होंने सरकार से वीजा बढ़ाने का लाभ लिया है और उन्हें 30 जून तक पाकिस्तान छोड़ना है, क्योंकि उनका वीजा पहले ही खत्म हो चुका है।

सुरक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दिकी कहती हैं, 'रिची के साथ आईएसपीआर का संपर्क स्वाभाविक है, क्योंकि संस्थान पाकिस्तान की सकारात्मक छवि का विदेशों में प्रचार करना चाहता है। लेकिन रिची संभवत: एक नया प्रयोग हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाषण देने या विदेशी राजनयिकों व पत्रकारों को हुस्न के जाल में फंसाने जैसे काम के लिए पहले जिन महिलाओं को रखा जाता था, वे पाकिस्तानी थीं।'

वह कहती हैं कि रिची आईएसपीआर की उस रणनीति का नया संस्करण हैं, जिसका इस्तेमाल पाक सेना का प्रचार विभाग लंबे समय से कर रहा था। जिन इलाकों में अक्सर विदेशी पत्रकारों को रिपोर्टिंग में बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उन सुदूर जनजातीय इलाकों में सिंथिया की पहुंच और उनकी ही स्वीकारोक्ति के मुताबिक, सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें मिली मदद पर पाकिस्तान में अनेक लोग नाराज हैं।

सिंथिया का कहना है कि वह पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) की 'देश विरोधी गतिविधियों' की जांच कर रही है। पीटीएम अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में संघ प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों (फाटा) में पश्तूनों के खिलाफ सैना द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ अभियान चला रहा है।

किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि देश-विरोधी गतिविधियों की 'जांच' के लिए किस कानून के तहत सत्ता प्रतिष्ठान ने एक विदेशी नागरिक को अनुमति दी। सिंथिया कहती हैं कि वह पत्रकार नहीं हैं, उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वर्दीधारी सुरक्षा अधिकारियों के साथ अपनी तस्वीरें साझा की हैं, लेकिन पाकिस्तान के भीतर या बाहर किसी भी सुरक्षा एजेंसी द्वारा काम पर रखे जाने या उसके लिए काम करने से उन्होंने इन्कार किया है।

सिंथिया के आलोचकों का कहना है कि बाहर पाकिस्तान की बेहतर छवि पेश करने के बजाय उनका पूरा ध्यान घरेलू मामलों पर ही केंद्रित रहा। एक बड़ा सवाल यह भी है कि आरोप लगाने के लिए उन्होंने दस साल का वक्त क्यों लिया।
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