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महाराष्ट्र की सियासत में किंगमेकर से जमीन पर

Neerja Chowdharyनीरजा चौधरी Updated Sun, 24 Nov 2019 06:51 AM IST
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शरद पवार (फाइल फोटो)
शरद पवार (फाइल फोटो)
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के करीब एक महीने बाद अचानक कल तड़के देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने जिस तरह क्रमशः मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, वह भारतीय राजनीति के बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रमों में से एक है। लेकिन राजनीति में ऐसी घटनाएं अप्रत्याशित नहीं हैं।
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महाराष्ट्र का जनादेश निस्संदेह भाजपा और शिवसेना के लिए था। लेकिन उनका चुनाव पूर्व गठबंधन जब सरकार बनाने में कामयाब नहीं हुआ, तब चुनाव बाद गठबंधन बनाकर सरकार बनाने की कोशिशें शुरू हुईं। शिवसेना ने एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं और इसमें कांग्रेस भी शामिल हुई, क्योंकि इसके बगैर सरकार का गठन संभव नहीं था।

हालांकि तब भी ऐसा माना जा रहा था कि देर-सबेर भाजपा-शिवसेना का सरकार बनना तय है। एक तो इसलिए कि दोनों का साथ बेहद पुराना है। और दूसरा यह कि दोनों की वैचारिकता भी समान है। यह ठीक है कि भाजपा के साथ सरकार बनाने के मामले में शिवसेना ने बेहद तीखेपन का परिचय दिया।

इसके बावजूद भाजपा अपने पुराने गठबंधन सहयोगी को मना सकती थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। शायद वह यह मानकर चल रही थी कि शिवसेना उससे रूठकर आखिर जाएगी कहां? यहां तक कि जब शिवसेना और एनसीपी के बीच मुलाकातों का दौर चल रहा था, तब भी भाजपा को लग रहा था कि महाराष्ट्र में उसकी ही सरकार बनेगी।

इस भरोसे की दो वजहें थीं-वह नहीं मान सकती थी शिवसेना उसका साथ छोड़ देगी। और उसका यह भी मानना था कि शिवसेना के साथ कांग्रेस कोई गठबंधन नहीं करेगी। लेकिन धीरे-धीरे ही सही, जब शिवसेना-एनसीपी-गठबंधन की सरकार बनने की संभावना आकार लेने लगी, तब भाजपा को सक्रिय होना पड़ा।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार अगर महाराष्ट्र चुनाव के मैन ऑफ द मैच थे, तो बदले हुए घटनाक्रम में सबसे ध्वस्त भी वही हैं। ऐन चुनाव के बीच ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जब शरद पवार को तलब किया, तब पवार ने इसे मराठी अस्मिता में बदल दिया। शारीरिक रूप से लाचार पवार ने एक दिन में कई-कई रैलियां कीं और उन्हें लोगों का समर्थन मिला।

यह संदेश फैला कि दिल्ली से टक्कर लेनी है। उसका चुनावी लाभ सिर्फ पवार की पार्टी एनसीपी को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस को भी मिला। शरद पवार भारतीय राजनीति के बेहद चतुर खिलाड़ी हैं, जिन्हें विगत में पार्टी लाइन से अलग जाने में भी हिचक नहीं हुई थी।

महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की महाविकास अघाड़ी सरकार बनाने की कोशिश उन्हीं शरद पवार के अनुभवी कंधों पर थीं। लेकिन उनके जैसे चतुर नेता को भी पता नहीं था कि भाजपा एक वैकल्पिक रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। कल तक जो शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के किंगमेकर थे, जिनकी कोशिशों से महाराष्ट्र प्रगतिशील अघाड़ी की सरकार बनने वाली थी, आज उनकी पार्टी में ही नहीं, परिवार में भी फूट पड़ चुकी है। 
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