पसोपेश में पाकिस्तान और बढ़ते तनाव के बीच उम्मीद की किरण

मरिआना बाबर Updated Thu, 29 Aug 2019 06:47 PM IST
विज्ञापन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : ट्विटर

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
बगीचे में जाकर ही लोगों को बदलते मौसम का एहसास होता है। रावलपिंडी को हिला देने वाली आखिरी बारिश हवा में नमी लेकर आई थी और जैसे ही आसमान साफ हुआ, तो हर सुबह घास पर ओस की बूंदें नजर आने लगी हैं। मोगरे के पौधों में अब फूल कम हो गए हैं। लीची और आम का मौसम भी नहीं रहा। जापानी सेब पकने लगे हैं। पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों में जल्द ही शरद ऋतु दस्तक देगी। लेकिन भारत के साथ पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्तों में सर्दियों से भी कहीं अधिक ठंडापन है।
विज्ञापन

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त करने के फैसले से एक बार फिर दोनों परमाणु शक्ति संपन्न मुल्कों के बीच तनाव बढ़ गया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि करतारपुर साहिब कॉरीडोर पर दोनों मुल्क काम जारी रखने पर सहमत हुए हैं और शीघ्र ही दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत होने वाली है।
इसके अलावा पाकिस्तान के अधिकारी उन खबरों पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, जिनमें कहा गया है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जब हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात गए थे, तो उन्हें पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने की अनुमति दी गई थी। द्विपक्षीय रिश्तों में कभी नरमी तो, कभी गर्मी आम बात है। इससे पहले भी जब पाकिस्तान ने बालाकोट हवाई हमले के बाद अपनी पूर्वी सीमा में हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था, तो तनाव के बावजूद भारतीय विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज को पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने की विशेष अनुमति दी गई थी।
अपने नवीनतम नीतिगत फैसले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय कश्मीर के लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तान के लोगों से हफ्ते में आधे घंटे अपने घरों, दफ्तरों और कार्यस्थलों से बाहर निकलने का आह्वान किया है। खुद को कश्मीरियों का राजदूत घोषित करते हुए उन्होंने हरेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाने की कसम खाई है। मगर पाकिस्तान में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। जहां इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और ट्वीट करके युवाओं, खिलाड़ियों, मनोरंजन उद्योग के सदस्यों से कहा है कि वे कश्मीरियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बड़ी संख्या में बाहर आएं, वहीं कई लोगों ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं।

इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में ले जाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बारे में एक और नीतिगत घोषणा की, जिस पर विशेषज्ञों ने सरकार को सावधान रहने के लिए कहा है। राजनीतिक विश्लेषक और लेखक जाहिद हुसैन कहते हैं, 'जैसा कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने का संकेत दिया, उस पर फिर से विचार करने की जरूरत है। पहला सवाल तो यही है कि क्या यह विवाद अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है। दूसरा, ऐसे किसी भी कदम के लिए विवाद में शामिल दोनों पक्षों की सहमति की जरूरत होगी। ऐसे कदम के परिणाम की जांच किए बिना पाकिस्तानी नेतृत्व द्वारा आईसीजे में जाने की सार्वजनिक घोषणा महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले पर सरकार की अधीरता को ही दर्शाती है।'

पाकिस्तान में इस बात को लेकर भी निराशा है कि मुस्लिम मुल्कों ने कश्मीरी मुसलमानों के बजाय भारत के साथ व्यापार संबंधों को तवज्जो दी और कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। सेवानिवृत्त जनरल तलत मसूद कहते हैं, 'इस उदासीनता का स्पष्ट कारण भारत के साथ इन देशों के मजबूत आर्थिक और व्यापारिक संबंध तथा क्षेत्रीय व वैश्विक मामलों में उसकी उभरती भूमिका है। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की सरकारों ने नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया, जो इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे मुस्लिम मुल्क भारतीय नेतृत्व के साथ लाड़ जता रहे हैं। यह पारस्परिक हित है, जो भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 66 अरब डॉलर के व्यापार में परिलक्षित होता है।'

इन दिनों पाकिस्तान में व्हाट्सऐप पर एक संदेश घूम रहा है कि पाकिस्तानियों को अमीरात और एतिहाद एयरलाइंस से उड़ान भरना बंद कर देना चाहिए, इस पर तलत मसूद कहते हैं कि रिश्ते समान धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि समान हितों के आधार पर संचालित होते हैं। ईरान का मुकाबला करने के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और पश्चिम एशिया के अन्य मुस्लिम देशों का इस्राइल के पक्ष में एकजुट होना एक और उदाहरण है, जहां समान धर्म जैसे कारक पर उनके हित भारी पड़े हैं।

जिस तरह कश्मीर में तालाबंदी और कर्फ्यू को लेकर भारत के भीतर कई लोग चिंतित हैं, उसी तरह पाकिस्तान में बहुत से लोगों की नजर भारतीय उच्चतम न्यायालय पर है कि वह इस सांविधानिक बदलाव की कैसी व्याख्या करता है। इमरान खान ने चेतावनी दी है कि अगर यह मसला नहीं सुलझा और कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हुए, और दोनों परमाणु शक्ति संपन्न मुल्कों के बीच कुछ प्रतिकूल हुआ, तो इसके लिए दुनिया को दोषी ठहराया जाएगा।
   
पाकिस्तान स्थित आक्रामक लोग पहले से कहते रहे हैं कि अगर भारत ने कश्मीर में सैन्य आक्रामकता दिखाई, तो पाकिस्तान को विश्व के कई महत्वपूर्ण मुल्कों का कूटनीतिक समर्थन मिलेगा। पूर्व विदेश सचिव सलमान बशीर जैसे बेहद पेशेवर राजनयिक कहते हैं कि पाकिस्तान द्वारा कूटनीतिक समर्थन हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सत्ता की वास्तविकता कठिन शक्ति की मांग करती है। लेकिन पाकिस्तान की बहुसंख्यक खामोश आबादी इससे सहमत नहीं है। वे कहते हैं कि दोनों मुल्कों को सीधे आपस में बात करनी चाहिए और इस दशकों पुराने मुद्दे का समाधान ढूंढ़ना चाहिए। जनरल तलत मसूद कहते हैं, यदि कश्मीर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान नहीं तलाशा जाता है, तो जिहादी तत्व, जिसे पाकिस्तान सफलतापूर्वक अक्षम कर चुका है, अपने हाथ-पैर फैलाना शुरू कर सकते हैं। इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी समूह भी अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अराजक स्थितियों का पूरा फायदा उठा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X