रजनीकांत एक अवधारणा

आर राजगोपालन Updated Wed, 06 Jun 2018 07:04 PM IST
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दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत की बहुचर्चित फिल्म काला में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। प्रदर्शन से पहले यह राजनीतिक विवादों में उलझकर मुश्किल में पड़ गई है। रजनीकांत की दूसरी फिल्मों की तरह इसमें भी काफी निवेश किया गया है। अमूमन उनकी फिल्म प्रदर्शन से पहले दर्शकों के दिलों-दिमाग पर छा जाती है। रजनीकांत के प्रशंसक देश में ही नहीं, विदेशों में भी हैं और उनकी फिल्में देश-विदेश में एक साथ प्रदर्शित होती रही हैं। इस बार मामला कुछ अलग इसलिए है, क्योंकि रजनीकांत के राजनीति में आने का एलान करने और अपनी पार्टी बनाने के बाद उनकी यह पहली फिल्म है। 
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तकरीबन चार दशक लंबे फिल्मी करियर में रजनीकांत ने अपने करोड़ों समर्थक बनाए हैं। उनके अनेक समर्थक उन्हें देवता तुल्य समझते हैं। उनका जादू उनके समर्थकों पर सिर चढ़कर बोलता है। फिर वह उनका ट्रिपल या डबल एेक्शन स्टंट हो, चश्मा पहनने या चुइंगम चबाने से लेकर सिक्का उछालने और थुंडू (तौलिया) लपेटने का उनका अंदाज, उनके समर्थक उनकी एक-एक अदा के दीवाने हैं और उनकी नकल करने की कोशिश करते हैं। उनके ऐसे कुछ स्टंट काला में भी नजर आएंगे। फिल्म के निर्देशक के मुताबिक, फिल्म का नाम काला मृत्यु के देवता यम से लिया गया है। फिल्म के निर्देशक कोई और नहीं, बल्कि उनके दामाद धनुष हैं। 
रजनीकांत के प्रशंसकों में काला को लेकर पहले जैसा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। खबर है कि उनकी फिल्मों के टिकटों की जैसी बुकिंग होती रही है, वैसा काला के मामले में नहीं है। चेन्नई से खबरें आ रही हैं कि सिनेमाघरों के बाहर एडवांस बुकिंग के लिए प्रशंसकों की भीड़ नहीं है। अमूमन उनकी फिल्मों के प्रदर्शन के समय जिस तरह की पूजा-अर्चना होती रही है, वैसा नजारा भी देखने को नहीं मिल रहा है।
दरअसल राजनीतिक तौर पर संक्रमण से गुजर रहे तमिलनाडु में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे रजनीकांत को द्रमुक और अन्य पार्टियां प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देख रही हैं। राज्य की अन्नाद्रमुक सरकार ने तो पहले ही आगाह किया था कि यदि काला के संवाद और गानों से राज्य के लोग भड़कते हैं, तो वह फिल्म से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।  

आखिर ऐसी क्या वजह हो गई कि रजनीकांत की फिल्म के प्रति बेरुखी दिखाई जा रही है? रजनीकांत ने कावेरी जल बंटवारे के मामले में तमिलनाडु के किसानों का खुलकर समर्थन किया था। इससे कन्नड़दिगा भड़क उठे और कर्नाटक में उनकी फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। हालांकि रजनीकांत के हस्तक्षेप के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा प्रतिबंध हटाने के बावजूद फिल्म के प्रदर्शन पर संशय कायम है।  

पिछले महीने जब तूतीकोरिन स्थित कॉपर संयंत्र के प्रदूषण को लेकर स्टरलाइट कंपनी के खिलाफ आंदोलन हुआ था, तब रजनीकांत ने आंदोलन का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि हर मुद्दे पर हर समय आंदोलन का रास्ता आख्तियार करना ठीक नहीं। आंदोलन में असामाजिक तत्व घुस आए हैं।

उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। इसका फायदा उठाकर कुछ वामपंथी तत्वों ने काला के प्रदर्शन का विरोध भी शुरू कर दिया। वहीं द्रमुक रजनीकांत पर आरोप लगा रही है कि उनका नजरिया दक्षिणपंथी है। दरअसल ऐसा कहकर वह रजनीकांत को भाजपा का करीबी बताना चाहती है। 

खुद रजनीकांत के लिए काला एक नया अनुभव लेकर आई है। कर्नाटक, खासतौर से बंगलूरू और कोलार क्षेत्र में उनके व्यापक प्रशंसक रहते हैं, जहां तमिल आबादी काफी है। कावेरी जल बंटवारे पर उनकी टिप्पणी ने अनेक कन्नड़ संगठनों को नाराज कर दिया था। वैसे रजनीकांत को कमल हासन के रूप में एक बड़ा समर्थक मिल गया है। कमल हासन, जिन्होंने खुद हाल ही में राजनीति में आने का एलान कर अपनी पार्टी बनाई है, काला पर चल रहे विवाद को लेकर दूरी बरत रहे थे। ध्यान रहे, खुद कमल हासन कावेरी मामले में कर्नाटक के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी से मिल चुके हैं।

उनका कहना है कि रजनीकांत को कर्नाटक के मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए थी। पांच साल पहले अपनी फिल्म विश्वरूपम के प्रदर्शन के समय विवादों का सामना कर चुके कमल हासन का मानना है कि दर्शकों और फिल्म के बीच किसी को नहीं आना चाहिए। आलोचकों ने याद दिलाया कि विश्वरूपम के प्रदर्शन के समय जब विवाद चल रहा था, तब रजनीकांत ने एक पत्र लिखकर कमल हासन के प्रति समर्थन जताया था। रजनीकांत की फिल्मों का देश के भीतर ही नहीं, विदेशों में भी इंतजार होता है।

लेकिन आज वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित हो रही काला के मामले में नाॅर्वे और स्विटजरलैंड से आई प्रतिक्रियाएं रजनीकांत लिए परेशानी बन सकती हैं। इन दोनों ही देशों में अनेक तमिल संगठन सक्रिय हैं, जिन्होंने तूतीकोरिन वाले प्रसंग में रजनीकांत के बयान का न केवल विरोध किया है, बल्कि धमकी दी है कि वे इन दोनों देशों में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे। इन संगठनों का कहना है कि तमिल सुपरस्टार ने तमिल लोगों की भावनाओं को आहत किया है।

सिर्फ कावेरी या तूतीकोरिन के कारण ही नहीं, बल्कि एक पत्रकार के कारण भी काला की राह में रोड़े हैं। एक पत्रकार जवाहर नडार का कहना है कि यह फिल्म उनके पिता के जीवन पर केंद्रित है, और उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है। लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म को इस आरोप से मुक्त कर दिया है। विवादों के बीच, एक दिलचस्प खबर यह है कि महिंद्रा समूह के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर आनंद महिंद्रा ने काला फिल्म में प्रयुक्त जीप का पोस्टर जारी होने के समय ट्वीट किया था कि वह उस जीप को अपने ऑटो म्यूजियम में रखना चाहेंगे! 

आप चाहे जिस नजरिये से भी देखें,  रजनीकांत को खारिज नहीं कर सकते, वह एक अवधारणा हैं। 
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