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व्यापार मोर्चे पर बढ़ेगी बात

के. एस. तोमर Updated Sun, 16 Feb 2020 05:37 PM IST
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के. एस. तोमर - फोटो : a
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विगत सितंबर में अमेरिकी भारतीयों द्वारा आयोजित 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलेआम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी नवंबर में होने वाले चुनाव में फिर से राष्ट्रपति चुने जाने का समर्थन करते हुए नारा लगाया था-अबकी बार ट्रंप सरकार। अब मोदी आगामी 25 फरवरी को अहमदाबाद के वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में ट्रंप का स्वागत करने के लिए आयोजित केम छो ट्रंप (कैसे हैं ट्रंप) कार्यक्रम के जरिये ट्रंप का समर्थन हासिल कर सकते हैं। यह कार्यक्रम दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों को और मजबूत कर सकता है, दोनों देश लोकतंत्र और बहुलतावाद की प्रतिबद्धता को साझा करते हैं।
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विदेश नीति के विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप की दो दिनों की यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों में नए युग का आगाज करेगी, खासकर तब, जब भारत व्यापार समझौता करने के प्रति आशावादी और अमेरिका से विशिष्टता प्राप्त पनडुब्बी हेलिकॉप्टर लेने के लिए सौदे को अंतिम रूप देना चाहता है। अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा बनाए गए एमएच 60 आर समुद्री लड़ाकू विमान के कारण दुश्मन की पनडुब्बियों को मार गिराने की भारत की क्षमता बढ़ जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद व्यक्त की है कि दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती से हमारे नागरिकों को लाभ पहुंचेगा और यह दुनिया के लिए भी अच्छी शुरुआत होगी। ट्रंप ने भी केम छो ट्रंप रैली के जरिये 50 से 70 लाख भारतीयों की बधाई मिलने की उम्मीद व्यक्त की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जो भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, मगर विरोधाभासों, तकनीकी कारणों और दोनों पक्षों के बीच मतभेदों के चलते लटका हुआ है। ट्रंप की यात्रा से व्यापार मोर्चे पर आगामी चर्चा का मार्ग प्रशस्त होगा, हालांकि मतभेदों के तत्काल समाधान के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन भारत को अपने लोगों के हितों की सुरक्षा के लिए अमेरिका को रियायतें देने में एक संतुलन बनाना होगा।

व्यापार समझौता अमेरिका के विकासशील देशों के लिए व्यापार वरीयता कार्यक्रम-जीएसपी के तहत कुछ भारतीय निर्यातों के लिए शुल्क मुक्त लाभ का गवाह बन सकता है, और भारत इसका सबसे बड़ा लाभार्थी हो सकता है। भारत भी मोटरसाइकिल पर सीमा शुल्क हटा सकता है, जिसका जिक्र ट्रंप कर चुके हैं।

पर्यवेक्षकों का मानना है कि भारत चीन द्वारा पाकिस्तान को खुले समर्थन और नेपाल के पलटने से चिंतित है, इसके अलावा सीएए के कारण बांग्लादेश में हलचल पैदा हो गई है। हालांकि अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है, क्योंकि वाशिंगटन के नई दिल्ली के साथ विदेश नीति से संबंधित कई अनिवार्य मुद्दे लंबित हैं। लेकिन वास्तविकता की पड़ताल से पता चलता है कि अमेरिका ने कई अहम मुद्दों पर भारत का समर्थन किया है, जैसे अनुच्छेद 370 को हटाना, पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई आदि। हालांकि भारत के मित्र ईरान के खिलाफ अमेरिका का सख्त रुख चकित करने वाला है, क्योंकि उसने भारत पर अपने पुराने मित्र से रिश्ता तोड़ने का दबाव बनाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का फिर से राष्ट्रपति बनना भारत के हित में हो सकता है और प्रस्तावित यात्रा से संबंधों में मजबूती आएगी। ट्रंप ने 2016 के बाद से 18 विभिन्न देशों की यात्रा की है और राष्ट्रपति के रूप में वह पहली बार भारत आ रहे हैं। ट्रंप की यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है, खासकर तब, जब उन्होंने ईरान, अफगानिस्तान और रूस के साथ अपने मतभेदों को कम किया है।
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