पाकिस्तान में कोरोना के बीच पर्यटन

mariana babarमरिआना बाबर Updated Fri, 05 Jun 2020 08:19 AM IST
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पाकिस्तान में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या करीब 90,000 तक पहुंच गई है। इस हफ्ते सिंध में, जहां लॉकडाउन में ढील दी गई, एक दिन में करीब 2,000 नए मामले सामने आने की सूचना है। मास्क लगाना कानूनी तौर पर अनिवार्य है और मास्क न लगाने पर जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन देखा यह जा रहा है कि सार्वजनिक परिवहन, जैसे बसों और टैक्सियों में भी लोग मास्क नहीं लगा रहे।
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संकट के इस दौर में प्रधानमंत्री इमरान खान ने खासकर पाकिस्तान के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को फिर से खोलने का एलान किया है, जिस पर नागरिकों ने सख्त प्रतिक्रिया जताई है। लोगों का कहना है कि जब पाकिस्तान के अधिकांश गांवों समेत उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र कोरोना वायरस से मुक्त हैं, तब उन्हें पर्यटन के लिए खोलना सनकी फैसला है, क्योंकि इससे संक्रमण फैलेगा।
नतीजतन उत्तरी क्षेत्र समेत खूबसूरत स्वात घाटी, जिसे पाकिस्तान का स्विट्जरलैंड कहा जाता है, के लोगों ने प्रधानमंत्री के विचार को खारिज कर दिया। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान के गांव कोरोना से मुक्त हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चूंकि उनकी स्वास्थ्य प्रणाली बेहद ही कमजोर है, ऐसे में, अगर बड़े शहरों के लोग पर्यटन के लिए आते हैं, तो उनकी आबादी संक्रमित हो जाएगी।
उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि वे पर्यटन के बगैर गुजर-बसर कर लेंगे। लोगों का कहना है कि उत्तरी क्षेत्र को पर्यटन के लिए खोलना दरअसल राजस्व इकट्ठा करने की सरकार की एक चाल है। इस सप्ताह देश भर से संकलित रिपोर्टों से पता चला कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में आश्चर्यजनक रूप से ज्यादातर महिलाएं हैं।

जबकि इससे पहले संक्रमित होने वालों में अधिकांश पुरुष थे। महिलाओं के ज्यादातर संक्रमित होने की वजह यह पता चली कि ईद से पहले लॉकडाउन में जो ढील दी गई थी, महिलाओं ने उसका भरपूर फायदा उठाया और जमकर खरीदारी की। छोटी बच्चियों को मेहंदी, चूड़ियां, कपड़े और जूतियां खरीदते हुए देखा गया। अनेक लोग यह देखकर हैरान रह गए।

उस लापरवाही की कीमत अब देश चुका रहा है। अनेक अस्पतालों ने कह दिया है कि उनके पास बेड नहीं हैं। डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्साकर्मी हर दिन संक्रमित हो रहे हैं। इस हफ्ते पंजाब के फैसलाबाद शहर में सौ डॉक्टर संक्रमित हो गए।

दरअसल पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार उस्मान बुजदार ने प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट छिपाई थी, जिसमें कहा गया था कि राजधानी लाहौर में कोई भी कार्यस्थल और आवासीय क्षेत्र वायरस  मुक्त नहीं है और शहर में कुल संक्रमित मामलों का अनुमान लगभग सात लाख है।

मुख्यमंत्री को यह बताया गया था कि स्मार्ट लॉकडाउन काम नहीं करेगा, क्योंकि शहर के सभी इलाके संक्रमण से प्रभावित हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि महानगर में बिना लक्षणों वाले मामले ही ‘संक्रमण और स्थानीय संचरण के मुख्य स्रोत’ बन गए थे।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि नियमित अंतराल के साथ किए गए स्मार्ट सैंपलिंग के परिणामों की समीक्षा करने के बाद लॉकडाउन को उठाने, ढील देने या हटाने का कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए। अफसोस की बात है कि कोरोना वायरस ने धार्मिक पर्यटन को भी नुकसान पहुंचाया है, जो पाकिस्तान में बढ़ रहा था, खासकर भारत से आने वाले धार्मिक पर्यटकों की वजह से, क्योंकि सरकार ने हिंदू मंदिरों और सिख गुरुद्वारों का नवीनीकरण शुरू किया था।

शारदा पीठ एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर है, जिसे महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरियों के लिए खोलने की मांग की थी। यह मुजफ्फराबाद से 150 किलोमीटर और नियंत्रण रेखा से मात्र दस किलोमीटर दूर नीलम घाटी में स्थित है। यह जीर्ण मंदिर और ज्ञान का प्राचीन केंद्र इस समय पाक अधिकृत कश्मीर में है।

छठी और 12 वीं सदी के बीच यह यह भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे प्रमुख मंदिरों-विश्वविद्यालयों में से एक था। शारदा पीठ को सबसे प्राचीन हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है। इसका निर्माण कब हुआ, इसकी कोई स्पष्ट तिथि नहीं है, लेकिन अशोक महान के शासनकाल के दौरान 237 ईसा पूर्व में हजारों साल पहले इसके बने होने का अनुमान है।

अनुमान लगाया जाता है कि यहां एक प्राचीन विश्वविद्यालय भी था। सबसे लोकप्रिय दावों में से एक यह है कि एक राजकुमार ने अपनी इच्छा से राजकुमारी से शादी करने के लिए निवास स्थान के रूप में इस भवन का निर्माण किया। राजकुमारी ने यह शर्त रखी थी कि सुबह होने से पहले यह बन जाना चाहिए।

लेकिन जैसे ही अजान शुरू हुई, मंदिर का निर्माण रुक गया। आज भी यह मंदिर अधूरा और बिना छत के है। इसका सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है कि राजकुमारी ने उससे शादी की होगी या नहीं। बिल्हण द्वारा वर्णित एक अन्य किंवदंती में कहा गया है कि देवी शारदा ने खुद को एक हंस में बदल दिया, जो पानी में तैरती थी और मधुमती नदी में धोने के कारण उनका मुकुट सोने का हो गया था, जो वर्तमान नीलम नदी का प्राचीन नाम था।

शारदा पीठ के तीर्थयात्री अब अपनी यात्रा में इसे भी शामिल कर लेते हैं और वे अपने पाप  धोने के लिए नीलम नदी में स्नान करते हैं। कश्मीर में मोदी सरकार द्वारा सांविधानिक परिवर्तन लाने के बाद बहुत कुछ बदल गया है, और यह जानना मुश्किल है कि क्या भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए पाकिस्तान इस मंदिर को खोलने पर विचार करेगा।

करतारपुर का अनुभव तो बताता है कि पाकिस्तान और भारत के बीच बहुत खराब द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद दोनों देशों ने सिख समुदाय को समायोजित किया। यह बहुत अफसोस की बात है कि कोरोना वायरस ने भारत के सभी यात्रियों को रोक दिया है, नतीजतन दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय इस तीर्थयात्रा पर भी रोक लग गई है।
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