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कश्मीर में खुद की बुलाई मुसीबत, विदेशी नेताओं को इस मामलों से रखा गया दूर

Ramchandra Guha रामचंद्र गुहा
Updated Sun, 03 Nov 2019 12:48 AM IST
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अनुच्छेद 370
अनुच्छेद 370 - फोटो : Amar Ujala

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से वाशिंगटन में मुलाकात की थी। उस मुलाकात के बाद हुए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर विवाद के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की।
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उन्होंने कहा, 'यदि मैं मदद कर सकता हूं, तो मुझे मध्यस्थ बनना अच्छा लगेगा।' ट्रंप ने यह दावा भी किया कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मदद के लिए आगे आने को कहा है। उन्होंने कहा, 'दो हफ्ते पहले मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ था। और हमने इस विषय (कश्मीर) पर बात की थी। और उन्होंने वास्तव में कहा, 'क्या आप मध्यस्थ या पंच बनना पसंद करेंगे?' मैंने कहा, 'कहां?' (मोदी ने कहा) 'कश्मीर'।'


राष्ट्रपति ट्रंप के दावों को हमारे विदेश मंत्रालय ने तुरंत खारिज कर दिया। इसके तीन हफ्ते बाद पांच अगस्त को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया, जम्मू और कश्मीर का दर्जा पूर्ण राज्य से घटाकर सिर्फ केंद्र शासित कर दिया, हजारों कश्मीरियों को जेल में डाल दिया गया, इंटरनेट और फोन लाइनें बंद कर दी गईं, पहले से भारी-भरकम सैन्यीकृत घाटी में हजारों अतिरिक्त बल भेजे गए, और इसकी बेबस आबादी पर रात और दिन का कर्फ्यू लाद दिया गया।
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