किस ओर जा रहा है पाकिस्तान

कुलदीप तलवार Updated Wed, 26 Nov 2014 08:35 PM IST
विज्ञापन
what nawaj sharif wants

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
मुंबई हमले में अपनी सीधी भूमिका साबित होने और भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदायों की नाराजगी के बावजूद पाकिस्तान थोड़ा भी नहीं बदला है। हमारी सरकार द्वारा सुबूत देने के बावजूद मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद छुट्टा घूम रहा है। हमारे गृह मंत्री बता रहे हैं कि दाऊद इब्राहिम अफगानिस्तान सीमा पर है। सबसे चौंकाने वाला पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का रवैया है। वह दोबारा सत्ता में आए, तो लगा कि भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने में वह संजीदा भूमिका निभाएंगे। लेकिन आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर ओबामा की भारत यात्रा को देखते हुए शरीफ की प्रतिक्रिया और दक्षेस बैठक में उनके रुख से साफ है कि वह कट्टरवादी राजनीति के बंधक बन चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के प्रति मतदाताओं का सकारात्मक रवैया भी पाकिस्तान के कट्टरवादी लोगों को परेशान करने वाला है।
विज्ञापन

आतंकी हिंसा के प्रति नवाज शरीफ का यह उदासीन रवैया तब और घातक है, जब पाकिस्तान की अंदरूनी स्थिति दिनोंदिन चिंताजनक होती जा रही है।  सीरिया और इराक के बाद खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) पाकिस्तान में तेजी से अपनी पैठ बढ़ा रहा है। खैबर पख्तूनख्वाह के जिले हंगू और खुर्रम जैसे कबायली इलाकों में उसने हजारों समर्थकों की भर्ती की है। हाल ही में बलूचिस्तान प्रांत की सरकार ने केंद्र को भेजी एक खुफिया रिपोर्ट में आईएस के बढ़ते असर के प्रति आगाह किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएस ने लश्कर-ए-झांगवी और अहल-ए-सुन्नत के कुछ तत्वों को मिलने का प्रस्ताव दिया है। काबिले गौर है कि पाकिस्तान में ये दोनों सुन्नी समर्थक संगठन हैं। आईएस ने इन दोनों के साथ मिलकर सैन्य प्रतिष्ठानों, सरकारी इमारतों तथा अल्पसंख्यक शिया समुदाय को निशाना बनाने की योजना बनाई है।
देखा जाए, तो पिछले कुछ समय से आईएस की गोपनीय गतिविधियां पाकिस्तान के सभी इलाकों में बड़ी तेजी से बढ़ी हैं। हाल ही में आईएस के समर्थन वाले पोस्टर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लाहौर स्थित आवास के निकट दीवारों पर लगे देखे गए। कराची, खानेवाल, डेरा इस्माइलखान समेत दूसरे शहरों में भी आईएस के समर्थन में दीवारों पर नारे नजर आए हैं। कुछ दिनों पहले कबायली क्षेत्रों में आईएस के झंडे लहराए गए थे। पाकिस्तान के कुछ इलाकों से आईएस को स्थानीय स्तर पर सहयोग मिलने के संकेत आ रहे हैं।
मसलन, दीवारों पर लिखकर कहा जा रहा है कि हम अबू बकर अल बगदादी का स्वागत करते हैं। पेशावर के कई स्थानों तथा अफगान शरणार्थी शिविरों में भी आईएस की प्रचार सामग्री के पर्चे बांटे गए हैं। तक्षशिला जैसे भारी सुरक्षा क्षेत्र में भी पाक ऑर्डिनेंस फैक्टरी के पास आईएस के झंडे लहराते हुए देखे गए। ये झंडे उन खबरों के बाद नजर आए, जिनमें कहा गया था कि आईएस के नेताओं ने अशांत बलूचिस्तान के नेताओं से गुप्त मुलाकातें की हैं। माना यह जा रहा है कि अगर नवाज शरीफ सरकार बलूचियों को उनके मौलिक व सांविधानिक अधिकार देने में नाकाम रही, तो यह प्रांत आईएस के कब्जे में चला जाएगा। उल्लेखनीय है कि बलूचिस्तान देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान में शामिल ही नहीं होना चाहता था। दरअसल पाक नागरिक इंसाफ न मिलने, भ्रष्टाचार जारी रहने और प्रशासनिक अक्षमता से तंग आ चुके हैं। ऐसे में, आईएस उन्हें धर्म के नाम पर अपनी तरफ खींच सकता है।

यह सच्चाई है कि आंतरिक सुरक्षा, स्थिरता तथा सामाजिक व आर्थिक तरक्की के मामले में पाकिस्तान सही रास्ते पर नहीं है। इसकी बड़ी वजह लोकतांत्रिक सरकार और सेना के नेतृत्व वाली सुरक्षा व्यवस्था का ढुलमुल रवैया है। नवाज शरीफ का कहना है कि जनता 2018 में बेहतर पाकिस्तान का चेहरा देखेगी। लेकिन वहां जिस तरह के हालात हैं, उन्हें देखते हुए ऐसी कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। वहां ऐसे लोगों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है, जो किसी और सुरक्षित देश को अपना स्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं। ऐसे लोगों का पाकिस्तान से पलायन भी जारी है।

यह भी देखने में आ रहा है कि आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पिछले कुछ सप्ताह के दौरान विरोधी धड़ों में बंट गया है। इससे यह अफवाह जोर पकड़ने लगी है कि इस तहरीक को आईएस संभाल सकता है। इसके अलावा आर्थिक लालच या आकर्षण भी वहां के बेरोजगार युवकों को अपनी तरफ खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आईएस इस्लामी राज्य के विस्तार के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। पहले ही सीरिया और इराक के 35,000 वर्ग मील क्षेत्र पर आईएस का सीधा नियंत्रण हो गया है। कई महत्वपूर्ण शहर उसके कब्जे में हैं। उसे हर महीने करीब 180 करोड़ रुपये की कमाई कच्चे तेल के अवैध व्यापार से होती है।

इसे विडंबना ही कहेंगे कि पाकिस्तान में जारी संगीन हालात के बावजूद पाक गृह मंत्री चौधरी निसार अली का कहना है कि मुल्क में अभी तक आईएस का कोई वजूद नहीं है। जाहिर है, इस तरह की टिप्पणियां अपनी कमजोरी छिपाने और देश-दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कवायद ज्यादा लगती है। पड़ोस में आईएस की बढ़ती पैठ भारत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। हालांकि नवाज शरीफ सरकार को भी पता है कि नई दिल्ली सीमापार आतंकवाद के खिलाफ बहुत कठोर है। इसके बावजूद भारत से बेहतर संबंध जारी रखने के बजाय वह कश्मीर मुद्दे की रट लगाए हुए हैं। सार्क देशों के बीच बेहतर आवागमन संबंधों पर उन्होंने जैसी उदासीनता दिखाई, उससे भी लगता है कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान कट्टरवाद की ओर जा रहा है। ऐसे में, सीमा पर सख्ती के साथ सजगता भी जरूरी होगा, ताकि पाक प्रायोजित आतंकवाद खतरनाक रूप न ले ले।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us