विज्ञापन

महिला और मताधिकार

क्षमा शर्मा Updated Mon, 17 Feb 2020 07:04 PM IST
विज्ञापन
क्षमा शर्मा
क्षमा शर्मा - फोटो : a
ख़बर सुनें
पिछले दिनों आए दिल्ली के चुनाव परिणाम लगभग वैसे ही रहे, जैसा अनुमान एग्जिट पोल्स ने लगाया था। बाद में लोकनीति और सीएसडीएस के सर्वे में बताया गया कि 60 प्रतिशत महिलाओं ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया, इसलिए यह चमत्कार हुआ। लोकनीति वालों का कहना है कि शीला दीक्षित के प्रति भी औरतों का इतना समर्थन नहीं देखा गया था। औरतों के वोट प्रतिशत ने इस बार यह बात भी खारिज कर दी कि औरतें घर के पुरुष सदस्यों की इच्छा से वोट देती हैं। पुरुषों के मुकाबले ग्यारह प्रतिशत अधिक महिलाओं ने आप को वोट दिया। महिलाएं अपने मताधिकार का बढ़-चढ़कर प्रयोग तो कर ही रही हैं, अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देकर चुन भी रही हैं।
विज्ञापन
दिल्ली का चुनावी नतीजा आने के अगले दिन एक टेलीविजन चैनल ने राह चलती औरतों से बातचीत दिखाई। महिला रिपोर्टर ने राह चलती महिलाओं से औरतों की सुरक्षा के मामले में आप के रिकॉर्ड पर सवाल पूछे, तो एक महिला ने कहा, सरकार सुरक्षा कर तो रही है। पहले बसों में जो धक्कमपेल हुआ करती थी, वह अब कहां है। बसों में सिपाही हैं। उसका मतलब बसों में तैनात मार्शल्स से था। दरअसल विपक्षी दल समझ ही नहीं सके कि महिलाएं आप को इतनी बड़ी संख्या में वोट देंगी। चाहे दिल्ली के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी अधिक सुविधा संपन्न बनाने की बात हो, मुफ्त बिजली-पानी की सुविधा हो या मोहल्ला क्लीनिक, इन सबका लाभ न केवल महिलाओं ने उठाया, बल्कि परिवार को भी इसका लाभ मिला। हर महिला अपने परिवार और बच्चों की भलाई चाहती है। साथ ही, यदि शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था ठीक हो, तो फिर उसे और क्या चाहिए। दिल्ली में हुए चुनाव के अगले दिन इन पंक्तियों की लेखिका ने अपनी घरेलू सहायिका से पूछा कि उसने किसे वोट दिया है, तो घर में झाड़ू लगाते हुए उसने झाड़ू हिलाकर दिखाया। फिर उसने बताया कि उसके मोहल्ले में सभी ने झाड़ू को वोट दिया है। उसका कहना था कि अब किसी का बिजली का बिल नहीं आता। सरकारी अस्पताल में दवा भी मिल जाती है। पहले तो अस्पतालों में दवा ही नहीं होती थी। फिर उसने यह भी बताया उसके यहां जो लोग झाड़ू को वोट देने से मना कर रहा था, सब उससे लड़ रहे थे। गरीब औरतों का एकजुट होकर आप को वोट देना बता रहा है कि सरकारों की सब्सिडी का फायदा अगर सचमुच लोगों तक पहुंचे, तो वह वोट में तब्दील होता है।

अरविंद केजरीवाल के चुनावी अभियान में शिक्षा और रोजगार के अलावा औरतों की सुरक्षा और उनके लिए मुफ्त बस सेवा जैसे मुद्दे छाए रहे थे। केजरीवाल ने औरतों से अपील भी की थी कि चूंकि वे घर-बार संभालती हैं, इसलिए अपने घर के लोगों से वोट देने के लिए कहें। इस पर केजरीवाल की आलोचना भी हुई थी कि औरतें क्या केवल घर-बार ही संभालती हैं? इस बार आप की बासठ में से आठ सीटें महिलाओं ने जीती हैं। इसलिए बहुतों को किसी महिला के मंत्री बनने की उम्मीद थी। जब औरतों ने केजरीवाल को इतनी बड़ी संख्या में वोट दिया है, तो किसी महिला को मंत्री न बनाया जाना सवाल तो खड़े करता ही है। जिस तरह  बिहार में नीतीश ने लड़कियों को साइकिलें दीं और उन्हीं साइकिलों पर बैठाकर वे अपने परिवार वालों को वोट दिलाने ले गईं। और नीतीश चुनाव जीत गए। वैसा ही नतीजा दिल्ली में आया है। महिलाओं ने केजरीवाल को दिल्ली का सिंहासन सौंप दिया। ये वे महिलाएं हैं, जो शायद ही कभी मीडिया में जगह पाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us