घर में ऐसी पिच तो बाहर कैसे जीतेगी टीम इंडिया?

एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 15 Mar 2020 11:00 PM IST
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टीम इंडिया
टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

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सार

  • रणजी ट्रॉफी फाइनल में सौराष्ट्र की जीत से ज्यादा रही पिच की चर्चा
  • राजकोट की पिच में थी उछाल, दोनों टीमों को करना पड़ा लंबा संघर्ष
  • बंगाल के कोच ने जताई थी नाराजगी, बोर्ड से की थी दखल की मांग

विस्तार

भारत में बनने वाली क्रिकेट की पिचों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। तीन दिन पहले रणजी ट्राफी का फाइनल जीतकर सौराष्ट्र की टीम ने भले ही इतिहास रच दिया हो, लेकिन उसकी इस जीत से ज्यादा चर्चा पिच की रही। राजकोट स्टेडियम की पिच पर गेंद में उछाल नहीं दिख रही थी।
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दोनों टीमों को गेंद से तालमेल बैठाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब सवाल उठने लगे हैं कि जब देश में ऐसी पिच तैयार होंगी तो विदेश दौरों पर भारतीय टीम उछाल भरी तेज पिचों पर कैसे अच्छा प्रदर्शन करेगी। हालिया न्यूजीलैंड दौरे की बात करें तो वहां भारतीय टीम को 0-2 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी।
टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमी यही थी कि उसके बल्लेबाज कीवी गेंदबाजों की उछाल लेती गेंदों को संभाल नहीं पा रहे थे। टीम के बाउंसर खेलने के तरीके पर क्रिकेट के पंडितों ने सवाल खड़े किए थे। लेकिन जब घरेलू क्रिकेट खेलने वाले बल्लेबाजों को उनके घर पर ऐसी पिचें दी जाएंगी, जहां गेंद को घुटनों से कमर तक ऊपर उठने के लिए भी संघर्ष करना पड़े तो फिर वह अचानक विदेशी दौरों पर जाकर बाउंसर को कैसे संभाल सकेंगे।
भारतीय टीम जब भी सीईएनए (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों का दौरा करती है, तो मेजबान टीमें उसका स्वागत तेज और उछाल भरी पिचों से ही करती हैं। यही कारण है कि पिछले 88 सालों से टेस्ट क्रिकेट खेल रही भारतीय टीम का प्रदर्शन सीईएनए देशों में इतना खास नहीं रहा। भारत दक्षिण अफ्रीका में कभी कोई टेस्ट सीरीज नहीं जीता है। अगर घरेलू मैचों में ही खासतौर से रणजी स्तर पर टीम इंडिया को तेज गति और उछाल वाली पिचें दी जाएं तो ही टीम इंडिया इन देशों में जाकर इन्हें चुनौती दे पाएगी।

कोच ने पिच को बताया था घटिया
बंगाल के कोच अरुण लाल ने रणजी फाइनल के पहले ही दिन पिच पर सवाल खड़े करते हुए इसे घटिया श्रेणी का करार दिया था। रणजी स्तर पर ऐसी पिचें देखकर कोच वह बेहद नाराज थे। उन्होंने कहा था, 'बोर्ड को ऐसी चीजों में दखल देना चाहिए। गेंद उछाल ही नहीं ले रही, इसे ठीक से तैयार ही नहीं किया गया। यह बहुत ही खराब है।'

मेजबान सौराष्ट्र टीम के खिलाड़ियों ने माना था कि पिच मुश्किल है और बल्लेबाजों को कड़ा संघर्ष करना पड़ा। तटस्थ क्यूरेटर के कामकाज से भी बंगाल के कोच बेहद नाराज थे। उन्होंने कहा था कि आपके पास यहां तटस्थ क्यूरेटर थे। बोर्ड को मैच से 15 दिन पहले अपने क्यूरेटर भेजने चाहिए। इस बार क्यूरेटर ने अपना काम सही से नहीं किया।
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