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चारधाम श्राइन बोर्ड: एक्ट लागू होते ही बदल जाएगी 80 साल पुरानी व्यवस्था, विरोध से पार पाना भी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 28 Nov 2019 09:40 AM IST
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80 years old system will change after Chardham Shrine Board Act Applicable
- फोटो : फाइल फोटो

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सार

  • 2004 में एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में गठित की गई थी चार धाम विकास परिषद
  • अपना अधिनियम न होने की वजह से सिर्फ नाम भर की ही मानी जाती है यह परिषद

विस्तार

उत्तराखंड विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में चारों धामों के संचालन की करीब 80 साल पुरानी व्यवस्था बदल जाएगी। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के लिए 1939 में अधिनियम लाया गया था। मंत्रिमंडल ने माना कि यह अधिनियम बेहद पुराना हो गया है और यमुनोत्री, गंगोत्री की यात्रा का संचालन अलग से करना पड़ रहा है। इस वर्ष चारों धामों में करीब 36 लाख यात्री आए। 
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चारों धामों को एक छतरी के नीचे लाने की यह पहली कोशिश नहीं है। 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने भी इसके लिए कोशिश की थी। उस समय चारधाम विकास परिषद का गठन किया गया। अधिनियम न होने के कारण यह परिषद सिर्फ नाम भर की रह गई।
बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा व्यवस्था बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति देखती है। 2002 में संशोधन कर इस कमेटी के सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई। कमेटी का यमुनोत्री तथा गंगोत्री की यात्रा व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है। यमुनोत्री और गंगोत्री की यात्रा व्यवस्था के लिए अलग से कमेटी है।  
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विरोध से पार पाने की भी चुनौती

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