अधिकारियों ने इको सेंसेटिव जोन को बनाया मजाक

अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Nov 2013 08:32 AM IST
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gangotri eco sensitive zone first meeting flop

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उत्तराखंड में गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन को लेकर गंभीरता का आलम यह है कि मॉनिटरिंग कमेटी की पहली बैठक फ्लॉप रही।
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बैठक में सदस्य सचिव पहुंचे ही नहीं। बिना एजेंडे के बैठक शुरू हुई तो मुख्य सचिव सुभाष कुमार मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बुलावे पर बैठक बीच में छोड़ कर चले गए। उनके जाने के बाद कुछ बातचीत हुई भी पर बिना किसी नतीजे के ही बैठक समाप्त हो गई।


इस माह बाद हुई यह बैठक

गंगोत्री को इको सेंसेटिव जोन घोषित किए जाने के करीब दस माह बाद यह बैठक हो रही थी और इसमें क्षेत्र के मास्टर जोनल प्लान पर बातचीत होनी थी। गंगोत्री को इको सेंसेटिव जोन घोषित किए जाने का विरोध प्रदेश सरकार जून माह में ही जता चुकी थी। दिसंबर 2012 में केंद्र सरकार ने गंगोत्री के सौ किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था।

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इस जोन को लेकर हुए गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि प्रदेश सरकार स्थानीय लोगों, विशेषज्ञों और अन्य प्रभावित लोगों का सहयोग लेकर मास्टर प्लान तैयार करेगी। इसी पर बातचीत के लिए सोमवार को सचिवालय में मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई थी।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी की ओर से सदस्यों को इसकी सूचना दी गई थी और समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में यह बैठक होनी थी। ठीक 11 बजे समिति के अन्य सदस्य पहुंचे भी पर सदस्य सचिव नहीं आए। मुख्य सचिव के चले जाने से बैठक बिना किसी नतीजे के ही समाप्त हो गई।

अधिकारियों के इस रुख पर नाराजगी

अपर सचिव वन मनोज चंद्रन ने कुछ देर बैठक को संभालने की कोशिश भी की पर उनकी भी शिकायत थी कि केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार की आपत्तियों का जवाब ही नहीं दिया। बातचीत में सदस्यों ने अधिकारियों के इस रुख पर गहरी नाराजगी जाहिर की। मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य रवि चोपड़ा ने कहा कि पहली बैठक का ही बेनतीजा रहना सही संकेत नहीं है।

दिल्ली से आए एमसी मेहता, मलिक भनोत, डॉ. वीपी उपाध्याय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आदि इस बैठक में शामिल थे।

क्या है मास्टर जोनल प्लान
इको सेंसेटिव जोन में रह रहे लोगों को परेशानी से बचाने के लिए निर्माण कार्य भी होने हैं और विकास कार्य भी किए जाने हैं। यह सब कुछ इस तरह से किया जाना है कि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। इसके लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मास्टर जोनल प्लान तैयार करने को कहा था।

यह जोनल प्लान अधिसूचना की तारीख से दो साल के अंदर बनकर तैयार होना है। केंद्र सरकार ने गौमुख से लेकर उत्तरकाशी तक करीब चार हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था।

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