हरिद्वार: सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी गंगा सभा,गंगा की धारा को स्कैप चैनल घोषित करने का मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 12 Jul 2020 09:17 PM IST
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Haridwar: Ganga sabha Will go to supreme Court
- फोटो : फाइल फोटो

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सार

  • हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को स्कैप चैनल घोषित करने का मामला
  • गंगा सभा के पदाधिकारी बोले, शहरी विकास विभाग को नहीं किसी नदी के स्वरूप बदलने का अधिकार

विस्तार

हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी श्री गंगासभा ने हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को स्कैप चैनल घोषित करने के आदेश को वापस नहीं लेने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है। गंगासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि शहरी विकास विभाग को यह अधिकार ही नहीं था। यह अधिकार केवल सिंचाई विभाग को है।
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रविवार को हरकी पैड़ी स्थित कार्यालय में गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने पत्रकार वार्ता में कहा कि शहरी विभाग के पास गंगा या किसी भी नदी के स्वरूप को बदलने का अधिकार नहीं है। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर गलत तरीके से निर्णय लिया गया था। उन्होंने सिंचाई विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव आनंद वर्धन की ओर से 17 जनवरी-2017 को लिखे पत्र का हवाला दिया।


उन्होंने अवगत कराया था कि गंगा या राज्य की किसी भी नदी के किसी भाग को स्कैप चैनल माने जाने का विषय सिंचाई विभाग से संबंधित है। सर्वानंद घाट से कनखल दक्ष मंदिर तक बहने वाले भाग को स्कैप चैनल माने जाने का निर्णय आवास विभाग के क्षेत्राधिकार से बाहर है। प्रमुख सचिव ने उक्त बातें अवगत कराते हुए गंगा को स्कैप चैनल माने जाने वाले बिंदु पर पुनर्विचार कर इसको प्राथमिकता के आधार पर संशोधित करने का परामर्श दिया था। महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि पता नहीं किस हित को साधने के लिए या किसी मजबूरी में राज्य सरकार गंगा को गंगा का दर्जा नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर उच्चस्तरीय लड़ाई जाएगी।

गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के माध्यम से मुख्यमंत्री को तीन बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन केवल आश्वासन देने के बावजूद कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है। इस मौके पर गंगा सभा के प्रचार मंत्री शैलेश गौतम, स्वागत मंत्री सिद्धार्थ चक्रपाणी, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के सचिव आशीष मारवाड़ी आदि शामिल हुए। 

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