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उत्तराखंड: प्रदेशभर की जेलों में रखे गए क्षमता से कई गुना अधिक कैदी, 61 फीसदी विचाराधीन 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर Updated Sun, 29 Mar 2020 12:18 PM IST
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Prisoner In Uttarakhand jail over capacity
- फोटो : डेमो फोटो
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सार

  • हल्द्वानी जेल में 241 और देहरादून में 225 प्रतिशत अधिक
  • प्रदेश में तीन जेलें ऐसी भी जहां क्षमता से कम हैं कैदी

विस्तार

उत्तराखंड की जेलों में उनकी क्षमता से कई गुना अधिक कैदी रखे गए हैं। इन कैदियों में 61 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं, जबकि 39 प्रतिशत ही सिद्धदोष कैदी हैं। हल्द्वानी जेल में क्षमता से 241 प्रतिशत अधिक कैदी रखे गए हैं। उत्तराखंड में तीन जेलें ऐेसी भी हैं जिनमें उनकी क्षमता से कम कैदी हैं। पहली संपूर्णानंद शिविर सितारगंज, दूसरी चमोली और तीसरे स्थान पर केंद्रीय कारागार सितारगंज है।
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बता दें कि कोरोना के बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के कैदियों को रिहा करने के आदेश के पालन में उत्तराखंड में बड़ी संख्या में कैदी रिहा किए जाने हैं। काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीमउद्दीन ने मुख्यालय, महानिरीक्षक कारागार से उत्तराखंड की जेलों की क्षमता तथा उसमें बंद कैदियों के संबंध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में कारागार मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीएस जोशी ने 5 मार्च 2020 तक कारागारों में क्षमता के सापेक्ष कुल निरुद्ध बंदियों की संख्या की सूचना उपलब्ध कराई है।
इसके अनुसार उत्तराखंड में कुल 11 जेलों की क्षमता 3540 कैदियों की है जबकि उसमें सूचना उपलब्ध कराने की तिथि को 5748 कैदी बंद है। इनमें 2259 सिद्धदोष (सजायाफ्ता) और 3489 विचाराधीन कैदी है। कुल कैदियों में 61 प्रतिशत कैदी विचाराधीन है, केवल 39 प्रतिशत ही न्यायालय से सजा पाए कैदी हैं।
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