भांग से कैंसर जैसे असाध्य रोगों से लड़ने की कवायद, नई प्रजाति विकसित करने में जुटे सीमैप के वैज्ञानिक

सुरेंद्र कुमार वर्मा, अमर उजाला, पंतनगर Updated Tue, 11 Aug 2020 02:30 AM IST
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Scientific of CIMAP Research New Species of Cannabis For Cancer treatment
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

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सार

  • अधिकतम टीएचसी, सीबीडी और कैनविनायड युक्त प्रजाति विकसित करने में जुटे सीमैप के वैज्ञानिक

विस्तार

भांग को अतीत में नशे का ही एक रूप माना जाता रहा है लेकिन अब वैज्ञानिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भांग (कैनाबिस) से करने का उपाय ढूंढ रहे हैं। केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिक भांग की ऐसी प्रजाति विकसित करने में जुटे हैं, जिसमें अधिकतम टीएचसी-ए, सीबीडी व कैनाविनायड होगा। ये तत्व कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों की दवा बनाने में उपयोगी साबित होंगे। इसके लिए उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से भांग की लगभग 60 प्रजातियां चयनित की गई हैं।
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काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के उपक्रम सीमैप के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि यहां-वहां बहुतायत में स्वयं उगने वाली भांग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर है। इसके बाद से सीमैप अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक जनवरी 2019 से भांग की नई प्रभावकारी प्रजाति विकसित करने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। 98 लाख की यह परियोजना एक निजी संस्था आशीष कांसंट्रेट्स इंटरनेशनल (मुंबई) की ओर से सीमैप अनुसंधान केंद्र को सौंपी गई है।


सीमैप लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान पर्यवेक्षक डॉ. बीरेंद्र कुमार की देखरेख में इस परियोजना के तहत पूरे देश से भांग के जर्मप्लाज्म एकत्र करके प्रजनन विधि एवं खेती की तकनीकों के जरिये उच्च गुणवत्ता युक्त प्रजाति विकसित की जाएगी। इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है।

सीमैप अनुसंधान केंद्र पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि भांग की वांछित प्रजाति विकसित कर उसमें उपलब्ध तत्व जैसे टीएचसी, सीबीडी, केनाविनायड और टीएचसी-ए के प्रयोग से असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर, मिर्गी, डिप्रेशन आदि की दवा बनाने में मदद मिलेगी, जो चिकित्सा क्षेत्र में भांग का स्वर्णिम भविष्य होगा।

उन्होंने बताया कि अभी तक उत्तराखंड से 50 से अधिक भांग के जर्मप्लाज्म एकत्र किए गए हैं। इनके रासायनिक तत्वों के आधार पर मानक अनुसार शोध कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि आने वाले एक वर्ष में उच्च गुणवत्ता की प्रजाति एवं सस्य तकनीक विकसित हो जाएगी।
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