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उत्तराखंड: मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भी नहीं मिली केवि के लिए जमीन

बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 16 Dec 2019 03:42 PM IST
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो
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सार

  • जमीन और अस्थायी भवन के लिए जनपदों से अब तक नहीं मिला एक भी प्रस्ताव

विस्तार

प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में केंद्रीय विद्यालय के लिए मानक के अनुसार जमीन उपलब्ध कराने के मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद किसी भी जिलाधिकारी को स्कूल के लिए जमीन नहीं मिली। शासन की ओर से इसके लिए प्रस्ताव मांगे तीन महीने होने जा रहे हैं, लेकिन एक भी जनपद से कोई प्रस्ताव नहीं मिला। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारियों को एक बार फिर पत्र लिखा है।
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 मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर प्रत्येक ब्लाक में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि निर्धारित मानक के अनुसार उपयुक्त स्थान पर निशुल्क भूमि एवं छात्र संख्या उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय विद्यालय खुलने से प्रदेश की जनता को विकासखंड स्तर पर उपयोगी शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
पत्र में यह भी कहा गया था कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षण की व्यवस्था है, लेकिन जन अपेक्षाओं के अनुसार गुणवत्तापरक अंग्रेजी माध्यम के शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस मनोवृत्ति के कारण राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों से पलायन की प्रवृत्ति विकसित हो रही है। केंद्र सरकार विकासखंडवार एक-एक केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय ले।
मुख्यमंत्री के इस पत्र के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से स्कूल के लिए मानकों को पूरा करते हुए संबधित जिलाधिकारी द्वारा सचिव शिक्षा के माध्यम से केंद्रीय विद्यालय संगठन को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया था। जिस पर शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने 18 सितंबर 2019 को प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्कूल के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करते हुए सूचना शासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा था। प्रस्ताव में विद्यालय के स्थायी भवन के लिए 2.5 से 5 एकड़ भूमि चिह्नित करने एवं अस्थायी भवन के रूप में 15 कमरों की व्यवस्था करनी थी।

हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के 95 विकासखंडों में से एक भी विकासखंड में किसी भी जिलाधिकारी को न जमीन मिली न ही 15 कमरों का अस्थायी भवन। यही वजह है कि अब तक एक भी प्रस्ताव शासन को नहीं मिल पाया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने एक भी जनपद से प्रस्ताव न मिलने पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारियों को फिर से एक पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगा है। 

शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है कि संबंधित जिलाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर तत्काल स्कूल के लिए प्रस्ताव भेजें ।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक   
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