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Valentine Week: सब्र से लिया काम तो मीठा निकला मोहब्बत का अंजाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 10 Feb 2020 12:09 PM IST
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रुचि और दीप
रुचि और दीप - फोटो : अमर उजाला
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सार

  • शादी के तीन वर्ष बीतने के बाद भी लगता है जैसे कल की ही बात है

विस्तार

बात मोहब्बत की होती है तो मुझे मेरी सब्र से भरी कहानी बरबस ही याद आ जाती है। मेरी ऑफिस की एक मित्र ने मुझे जीवनसाथी मैट्रीमोनियल साइट पर प्रोफाइल बनाने की सलाह दी। मैंने फरवरी 2014 में प्रोफाइल बनाया, लेकिन किसी का भी मनमाफिक रिस्पांस नहीं आया।
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दिन, महीने बीतते गए। कोई उपयुक्त लड़का नहीं मिला। सात जून, शनिवार का दिन था। एक लड़के की तरफ  से प्रस्ताव आया कि वह मुझसे बात करना चाहता है। चूंकि उसी दिन मैं अपने पीजी के रिजल्ट से खुश थी, इसलिए मैंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अगले दिन 8 जून को मेरे पास अनजान नंबर से फोन आया। हेलो! मैं संदीप बोल रहा हूं। पहले तो मैं सकपका गई कि ये कौन है?

जब बात की तो पता चला कि इन्हीं का प्रस्ताव आया था। उन्होंने सिर्फ इतना पूछा, क्या करती हो? घर में कौन-कौन हैं? अब आगे क्या करना है? इसके बाद दीप (मैं प्यार से बुलाती हूं) ने मुझसे जन्मपत्री मांगी। मैंने जन्मपत्री अपने मामा के लड़के के हाथ भिजवा दी। एक दिन दीप मेरी और अपनी जन्मपत्री अपने पारिवारिक पंडित के पास से दिखाकर लाए। 28 गुणों का मिलान हुआ। मैं सच में बहुत खुश थी कि सब ठीक हो रहा है।
 
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पिताजी ने रखी थी घर बनाने की शर्त

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