विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावण मास में अपार धन ,वैभव एवं संपदा प्राप्ति हेतु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रूद्राभिषेक
Puja

श्रावण मास में अपार धन ,वैभव एवं संपदा प्राप्ति हेतु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रूद्राभिषेक

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Digital Edition

होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों की जान बचाएगा 'सुरक्षा कवच' : अरविंद केजरीवाल  

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि कि दिल्ली में सुरक्षा कवच नामक पल्स ऑक्सीमीटर के माध्यम से होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों की मौतों को कम किया जा सकता है। अगर मरीजों को पता चलता है कि उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है तो वे हमसे संपर्क कर सकते हैं। हम तुरंत ऑक्सीजन उनके घर भेजेंगे या उन्हें अस्पताल ले जाया जाएगा।


राधा स्वामी ब्यास कोविड केयर सेंटर पहुंचे डॉ. हर्षवर्धन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को छतरपुर स्थित राधा स्वामी ब्यास में बने सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर और अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां की व्यवस्था का जायजा लिया।

10 हजार बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में इससे पहले उप राज्यपाल अनिल बैजल, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी दौरे पर आए थे। इसके एक दिन पहले यानी 26 जून को ही 2000 बेड के साथ यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई थीं। 

बता दें कि छतरपुर इलाके में राधा स्वामी सत्संग व्यास के परिसर में बनाए गए इस केंद्र में दो हिस्से हैं। एक हिस्से में ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं, जबकि दूसरे हिस्से में कोविड स्वास्थ्य देखभाल केंद्र है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को केंद्र के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह एक नोडल एजेंसी के तौर पर कार्य कर रही है।
... और पढ़ें
अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

दिल्ली: 10 हजार बिस्तरों वाले राधा स्वामी ब्यास कोविड केयर सेंटर पहुंचे डॉ. हर्षवर्धन

10 हजार बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में इससे पहले उप राज्यपाल अनिल बैजल, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी दौरे पर आए थे। इसके एक दिन पहले यानी 26 जून को ही 2000 बेड के साथ यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई थीं। 
 
बता दें कि छतरपुर इलाके में राधा स्वामी सत्संग व्यास के परिसर में बनाए गए इस केंद्र में दो हिस्से हैं। एक हिस्से में ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं, जबकि दूसरे हिस्से में कोविड स्वास्थ्य देखभाल केंद्र है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को केंद्र के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह एक नोडल एजेंसी के तौर पर कार्य कर रही है।

राजधानी में कमजोर हो रहा वायरस
मालूम हो कि राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक राहत भरी खबर है। दिल्ली में अब वायरस का असर कम होने लगा है। यही वजह है कि बीते एक सप्ताह में होम आइसोलेशन में रहने वाले एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। 

संक्रमण से होने वाली मौतें भी कम हुई हैं। मृत्युदर जून में जहां 3.64 फीसदी थी, वहीं जुलाई में घटकर 3.02 फीसदी रह गई है। खास बात यह कि मृतकों में ज्यादातर वह लोग शामिल हैं, जो गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे और उनमें से अधिकतर को पहले से कोई न कोई बीमारी थी। 

इसका खुलासा दिल्ली सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने रिपोर्ट पेश कर दी है। ... और पढ़ें

अमित शाह बोले, कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को दुनिया देख रही है

इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में से एक है। सभी लोग सोच रहे थे कि भारत जैसा देश कोरोना संक्रमण से कैसे लड़ पाएगा। इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं। 

लेकिन आज पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे हमारे देश में कोरोना के खिलाफ सबसे सफल लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में सुरक्षाबलों के जवान बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। आज में आप सभी कोरोना वॉरियर्स को नमन करता हूं।

हमारे जवानों के आज साबित कर दिया है कि उन्हें केवल आतंक ही नहीं, बल्कि लोगों के सहयोग से कोरोना से भी निपटना आता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जैसे समय हो रहा है वैसा समय पूरी दुनिया में पहले कभी नहीं आया था। मानव जाति के इतिहास में अब तक किसी महामारी का ऐसा उल्लेख नहीं किया गया है। पूरी दुनिया इससे जंग लड़ रही है। 

हमारे देश में जैसी स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जितनी आबादी है, उसे देखकर सबके मन में आशंकाएं थीं कि कहीं हमें बहुत बड़ा नुकसान तो नहीं होगा। हमारे देश में इस जंग को सरकार के साथ-साथ 120 करोड़ की जनता ने भी लड़ा है।

देश में कोरोना को लेकर कहीं डर का माहौल नहीं है, बल्कि सबके मन में इसे हराने का जज्बा है। सुरक्षाबलों ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक नया उदाहरण पेश किया है। हमारे कई जवानों ने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई है।

उन्होंने कहा कि मैं यह सुनिश्तिक करना चाहता हूं कि आपका यह बलिदान कभी भी व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई का इतिहास जब लिखा जाएगा तो स्वर्ण अक्षरों में सुरक्षाबलों के जवानों का नाम दर्ज होगा। ... और पढ़ें

दिल्ली एनसीआर में अगले 24 घंटे में हो सकती है बारिश, दिन भर छाए रहेंगे बादल

दिल्ली: निजामुद्दीन रेलवे यार्ड के शेड में लगी आग, किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं

दिल्ली में मौसम

कोरोना फोबियाः मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं बहुत लोग, बढ़ सकते हैं मरीज

कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीज मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं। इनमें अवसाद, तनाव और नींद न आने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि भविष्य को लेकर चिंता, बीमारी का डर और घबराहट के कारण मरीजों में यह लक्षण नजर आ रहे हैं। आने वाले समय में यह एक बड़ी चिंता का विषय भी बन सकते हैं।

एम्स अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास ने बताया कि मनोरोग एक ऐसी दशा है जो एक दिन में नहीं होती है। यह धीरे-धीरे बनती है। कोरोना के मरीज हो या आम लोग। इस समय सभी मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। कोविड अस्पतालों मे कई मरीज हैं, जिन्हें हर समय डर सताता रहता है। उन्हें नींद न आने जैसी समस्या हो रही है। वह मानसिक दबाव भी महसूस कर रहे हैं। यह सब अवसाद के लक्षण हैं, जो लंबे समय मेें मनोरोग की समस्या बन जाती है।

बीते चार महीनों में उन लोगों की तादाद काफी बढ़ी है, जो पहले से किसी मानसिक परेशानी से ग्रस्त हैं और अब उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। यह समस्या लंबे समय तक रहती है तो लोग मनोरोगी बन जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं।


डॉ. राजकुमार श्रीनिवास

केस : 1
 दिल्ली के मालवीय नगर निवासी मणिकांत ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले वह भी संक्रमित हो गए थे। इसके बाद से उनके दिमाग में एक अजीब सा डर बैठ गया था। हर समय अकेले रहने के दौरान दिमाग में अलग प्रकार के ख्याल आ रहे थे। मनोदशा काफी खराब हो गई थी। उन्होंने डॉक्टरों से सलाह ली। अब वह कोरोना से ठीक हो चुके हैं और फिलहाल किसी प्रकार की समस्या नहीं है।

केस : 2
सुमित्रा देवी 15 दिन पहले जीटीबी अस्पताल में भर्ती थीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उन्हें रात में नींद आना बंद हो गया था। आंखों के सामने हो रही मौतों को देखकर उनके मन में भय हो गया था। अभी तक वह डर दिमाग में बैठा हुआ है। इसलिए वह ठीक होने के बाद हमेशा अपने परिवार के साथ रहती हैं, ताकि उनके दिमाग में कोई ख्याल ना आए।
 
... और पढ़ें

गुरुग्राम में कोरोना वायरस के 112 नए मरीज, एक की मौत , कुल संक्रमितों की संख्या 6860

दिल्ली सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्टः होम आइसोलेशन में एक सप्ताह में एक भी मौत नहीं

राजधानी में कोरोना वायरस का असर कम होने लगा है। यही वजह है कि बीते एक सप्ताह में होम आइसोलेशन में रहने वाले एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। संक्रमण से होने वाली मौतें भी कम हुई हैं। मृत्युदर जून में जहां 3.64 फीसदी थी, वहीं जुलाई में घटकर 3.02 फीसदी रह गई है। 

खास बात यह कि मृतकों में ज्यादातर वह लोग शामिल हैं, जो गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे और उनमें से अधिकतर को पहले से कोई न कोई बीमारी थी। इसका खुलासा दिल्ली सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने रिपोर्ट पेश कर दी है।

इससे पहले बीते दिनों मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया था कि वह 15 दिन में हुई मौतों की वजह का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। विभाग ने 24 जून से 8 जुलाई के बीच मौत के आंकड़ों का आकलन किया।

इसमेें पता चलता है कि इस बीच कुल 691 मौत हुईं। इनमें 505 लोग कोरोना इलाज कराने तब पहुंचे थे जब उनकी हालत गंभीर थी। 291 ऐसे लोग थे, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर वह अस्पताल में भर्ती हुए। यह पहले से किसी न किसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे।

ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन को वजह मान रही सरकार
रिपोर्ट के मुताबिक, होम आइसोलेशन में अब तक कुल 7 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। सभी मौतें 24 से 30 जून के बीच हुई। एक जुलाई के बाद से होम आइसोलेशन में मौत का आंकड़ा शून्य है। सरकार इसके लिए हर घर ऑक्सीमीटर व ऑक्सीजन मुहैया कराने की योजना को बड़ी वजह मान रही है। सरकार ने करीब 59 हजार ऑक्सीमीटर खरीदे हैं। इसमें से 58 हजार का इस्तेमाल भी हो रहा है।

अस्पताल में भर्ती नहीं होने से 28 की मौत
रिपोर्ट से पता चला है कि अस्पताल में भर्ती न होने या इसमें देरी होने से 28 लोगों की मौत हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 23 जून के बाद से मृत्युदर कम हुई है। जून मध्य तक हर दिन औसतन 90 लोगों की मौत होती थी, जो अब रोजाना औसतन 46 हो गई है।

अस्पताल प्रबंधन की जांच हो : केजरीवाल
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सभी अस्पतालों के प्रबंधन व्यवस्था की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। हर अस्पताल में छुट्टी पाने वाले मरीजों की कुल संख्या में मृत्यु के अनुपात की रिपोर्ट तैयार की जाए। जिन अस्पतालों का अनुपात कम होगा, वहां का प्रबंधन बेहतर होगा। ऐसे अस्पतालों का अध्ययन कर दूसरे अस्पतालों को अपनी कार्य प्रणाली सुधार करनी होगी।
... और पढ़ें
Election
  • Downloads

Follow Us

विज्ञापन