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दिल्ली

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

2015 में स्टार प्रचारकों की हाजिरी पड़ी थी कांग्रेस-भाजपा को भारी, इस बार बदली रणनीति

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने या उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए स्टार प्रचारकों को बुलाती हैं। जब स्टार प्रचारक आते हैं, तो उनके लिए अच्छी खासी भीड़ जुटानी पड़ती है। अभी तक यह काम पार्टी कार्यकर्ता ही करते आए हैं। दिल्ली में 2015 के विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारकों की हाजिरी भरना कांग्रेस और भाजपा के लिए भारी पड़ गया था।

दोनों ही पार्टियों के निष्ठावान कार्यकर्ता स्टार प्रचारकों के लिए महज भीड़ जुटाने का एक साधन बनकर रह गए। इस काम में वरिष्ठ पदाधिकारी और बूथ कार्यकर्ता, दोनों को लगा दिया गया। नतीजा, वोटरों के साथ बूथ कार्यकर्ताओं का सीधा संपर्क टूट गया। दूसरी ओर 'आप' ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और अपने वालंटियर को एक नहीं, बल्कि कई बार लोगों के घर भेज दिया।

इस बार के चुनाव में तो खासतौर पर भाजपा की ओर से स्टार प्रचारकों की लंबी चौड़ी सूची आई है। कोई एक दो नहीं, अपितु हजारों जनसभाएं करने का लक्ष्य रखा गया है। भाजपा ने इस बार भीड़ जुटाने के लिए पार्टी में अलग एक इकाई का गठन कर दिया है। उस इकाई का कार्य केवल स्टार प्रचारकों की जनसभाओं को सफल बनाना है, जबकि बूथ कार्यकर्ता केवल वोटरों से संपर्क करेंगे।

आप की इस रणनीति में उलझीं पार्टियां 

गत विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा अनेक केंद्रीय मंत्री व मुख्यमंत्रियों का समूह प्रचार में जुटा थे। चूंकि ये स्टार प्रचारक थे, इसलिए इनकी जनसभाओं को सफल बनाना भी जरूरी था। वजह, आम आदमी पार्टी के वालंटियर दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर मौजूद थे। उनका काम भाजपा और कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की जनसभाओं पर नजर रखना था। उन्हें जिस किसी स्टार प्रचारक की जनसभा फीकी दिखाई पड़ती या कुर्सियां खाली रहतीं, तो वे उसका फोटो या वीडियो बनाकर सोशल मीडिया एवं पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड कर उसे वायरल कर देते थे।

इसका पार्टी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता था। यही वजह रही कि भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने स्टार प्रचारकों की जनसभाएं सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। भाजपा ने तो अपने सभी कार्यकर्ताओं, जिनमें बूथ स्तर के पदाधिकारी भी शामिल थे, उन्हें स्टार प्रचारकों की हाजिरी भरने और भीड़ जुटाने का जरिया बना दिया। दूसरी ओर आप ने केवल इकलौते स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल के दम पर वालंटियर्स करे जरिये लोगों को उनके घर जाकर अपनी बात समझाई।

बूथ कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा

2015 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली चुनाव के बाद कहा था कि हमारी प्रचार सामग्री जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद जो चुनावी विश्लेषण हुआ, उसमें सामने आया कि चुनाव प्रचार में बाहरी नेताओं की भीड़, जिनमें स्टार प्रचारक भी शामिल रहे, ने वोट बैंक बढ़ाने की बजाए बूथ कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया था।

पार्टी के लिए लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को महज भीड़ जुटाने का साधन बना दिया गया। इसके चलते वोटरों के साथ इन जमीनी कार्यकर्ताओं का संपर्क टूट गया। अगर उनके पास कोई कार्यकर्ता पहुंचा भी तो वह स्टार प्रचारकों की जनसभा का निमंत्रण देने। दूसरी तरफ स्टार प्रचारकों की भीड़ और बूथ कार्यकर्ताओं में छाई निराशा से आम आदमी पार्टी को खासा फायदा पहुंचाया। मीडिया सर्वे में मिली बढ़त और केजरीवाल की रैलियों में उमड़ती भीड़ से आप के वालंटियर्स का हौसला लगातार बढ़ता गया।

भाजपा ने अपने 120 सांसद उतारे थे

भाजपा ने 2015 में अपने केंद्रीय मंत्रियों, कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और 120 सांसदों को दिल्ली के चुनाव प्रचार में उतारा था। ये नेता जहां भी जाते, वहां के बूथ कार्यकर्ताओं को पहले से ही यह हिदायत दे दी जाती कि वे उनकी जनसभा या पदयात्रा में मौजूद रहें। ये कार्यकर्ता जैसे ही वहां से फ्री होते तो उन्हें किसी दूसरे नेता के साथ लगा दिया जाता। इस बीच अगर किसी मुख्यमंत्री की जनसभा होती है, तो इन कार्यकर्ताओं को दोहरी मशक्कत करनी पड़ती।

पहली, ये लोगों को किसी तरह जनसभा स्थल तक लाते और दूसरी, इन्हें खुद की भी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी। किसी बड़े नेता का रोड शो होता तो भी इन्हीं बूथ कार्यकर्ताओं को वहां भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी मिलती थी। इस वजह से इन कार्यकर्ताओं में निराशा एवं हताशा बढ़ती रही। भाजपा एवं कांग्रेस के कई बूथ कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस समय उनकी ड्यूटी केवल मतदाताओं के साथ संपर्क करने की होनी चाहिए।

अगर उन्हें बाहरी नेताओं की हाजिरी भरने में ही लगाया जाएगा तो पार्टी की वोटरों से दूरी बढ़ना भी लाजिमी है। इस बार भाजपा और कांग्रेस ने अपने बूथ कार्यकर्ताओं को भीड़ जुटाने के काम से निजात दे दी है। भाजपा ने तो इसके लिए अलग से एक इकाई गठित की है। इसका काम केवल स्टार प्रचारकों की जनसभाओं का इंतजाम करना है। आरएसएस की कई टीमें और बूथ कार्यकर्ता लोगों के घरों में जाकर उनके बातचीत करेंगे। इसी तरह कांग्रेस भी अपने बूथ कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी दे रही है।
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निर्भया के गुनहगारों से तिहाड़ जेल प्रशासन ने पूछी अंतिम इच्छा

क्या हिंदू ध्रुवीकरण की धुन पर भाजपा लड़ेगी दिल्ली विधानसभा चुनाव?

भाजपा अब दिल्ली विधानसभा चुनाव को हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण का रंग देने में जुट गई हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार नागरिकता कानून का विरोध मुसलमान कर रहा है। इसके केंद्र में शाहीन बाग में महिलाओं की तरफ से 15 दिसंबर से किया जा रहा विरोध प्रदर्शन है। भाजपा प्रवक्ता सांबित पात्रा ने बुधवार की अपनी प्रेस वार्ता में जमकर आक्रमकता दिखाई। एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन और असदुद्दीन ओवैसी के वक्तव्य को आधार बनाया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौव्हाण को केंद्र में रखकर हमला बोला।

कानपुर से लेकर दिल्ली तक

कानपुर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इन लोगों (सीएए, एनपीआर, एनआरसी का विरोध करने वालों) में आंदोलन करने की हिम्मत नहीं है। इन्होंने अपने घरों की औरतों को आंदोलन के लिए  चौराहे-चौराहे पर आगे कर दिया है। योगी आदित्यनाथ ने यह वक्तव्य शाहीन बाग जैसा प्रदर्शन करने वाली महिलाओं और अल्पसंख्यक (मुसलमान) समाज को केन्द्र में रखकर दिया है।

योगी की तरह ही भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर हमला बोला है। सांबित पात्रा ने कहा है कि कांग्रेस मुसलमानों से पूछकर सरकार बनाती है और हिंदुओं को गाली देती है। पात्रा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भी मुस्लिम लीग कांग्रेस की संज्ञा दी है। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने 39 दिन से शाहीन बाग में सड़क पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं के इस प्रयास पर सवाल उठाया है।

क्या कह रहा है विपक्ष

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव का कहना है कि भाजपा के खाते में सांप्रदायिकता फैलाने के सिवा है क्या? यह पार्टी केवल नफरत, बंटवारा की भावना, लोगों को लड़ाना और राजनीति की रोटी सेंकना बड़े काम ही कर सकती है। सुष्मिता देव का कहना है कि यह भाजपा के ट्रैक रिकार्ड में है। वह इस चुनाव में भी हिन्दू बनाम मुसलमान करने से भला पीछे क्यों रहेगी?
 
हालांकि कांग्रेस पार्टी की नेता का कहना है कि भाजपा को इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। दिल्ली का चुनाव गवर्नेंस पर हो रहा है। गवर्नेंस का रिकार्ड दो ही पार्टी के पास है। कांग्रेस ने दिल्ली में 15 साल का शासन करके दिल्ली का विकास किया है। इसे लोग आज भी याद करते हैं। दूसरा गवर्नेंस का रिकार्ड आम आदमी पार्टी के पास है। दिल्ली में पढ़े लिखे लोग, जागरुक जनता, नौकरशाह रहते हैं। यहां अर्थव्यवस्था, मंहगाई, विकास के मुद्दे अहम हैं। मुझे नहीं लगता कि भाजपा इसमें कुछ कर पाई है। उसका दिल्ली में गवर्नेंस का भी कोई ट्रैक रिकार्ड नहीं है।

शाहीनबाग पर भाजपा का रवैय्या

भाजपा ने शाहीन बाग के प्रदर्शन को किनारे कर रखा है। यह प्रदर्शन नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकर, एनआरसी के विरोध में हो रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों को कांग्रेस, वामदल समेत अन्य विपक्ष की साजिश का हिस्सा बता रहे हैं।

यहां तक कि केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को अदालत, दिल्ली पुलिस के ऊपर छोड़ दिया है। 15 दिसंबर से 22 जनवरी तक भाजपा और केन्द्र सरकार का कोई मंत्री शाहीन बाग नहीं गया। न ही किसी तरह की सरकार ने कोई खास दिलचस्पी दिखाई है। वैसे भी इस प्रदर्शन में अल्पसंख्यक समाज की मुसलमान महिलाएं हैं।
 
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दिल्ली चुनाव : कपिल मिश्रा का भारत-पाक वाला ट्वीट होगा डिलीट , आयोग ने ट्विटर से की सिफारिश

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020

जेएनयू छात्रों को हाईकोर्ट ने दी राहत, कहा- पुरानी फीस पर ही कराएं रजिस्ट्रेशन

जेएनयू छात्रसंघ ने विवि प्रशासन के हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उस पर अदालत ने छात्रों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने सुनवाई के बाद छात्रों को राहत देते हुए कहा कि जहां तक रजिस्ट्रेशन करने से बचे 10 प्रतिशत छात्रों की बात है तो उन्हें एक हफ्ते के अंदर पुरानी फीस पर ही अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इन छात्रों से कोई लेट फीस भी नहीं ली जाएगी। अदालत ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 28 फरवरी तय की है।

इससे पहले जब सुनवाई की शुरुआत हुई तो छात्रसंघ के वकील ने अदालत को बताया कि कुछ बच्चे जो बढ़ी हुई फीस जमा कर रहे हैं, वह विश्वविद्यालय प्रशासन के डर से कर रहे हैं क्योंकि प्रशासन ने उनसे कहा है कि अगर वो बढ़ी हुई फीस नहीं भरते तो उनकी सेवाएं वापस ले ली जाएंगी। इस पर कोर्ट ने छात्रों को अंतरिम राहत देते हुए फैसला सुनाया।
 

 

क्या है याचिका
गौरतलब है कि जेएनयू छात्रसंघ ने विंटर सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन में देरी पर विलंब शुल्क वसूली के निर्णय पर रोक लगाने का निर्देश देने की भी मांग की है। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष, उपाध्यक्ष साकेत मून और अन्य पदाधिकारियों की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि चर्चा के बिना अक्टूबर में पारित इंटर हॉस्टल मैनेजमेंट मैनुअल अवैध है और इससे छात्र समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

छात्रसंघ ने कहा कि संशोधित हॉस्टल मैनुअल में हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी, हॉस्टल के कमरों के आवंटन में आरक्षित श्रेणियों के अधिकार प्रभावित करने और इसमें छात्रसंघ प्रतिनिधियों की संख्या घटाने के प्रस्ताव शामिल हैं।
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बीटिंग रिट्रीट समारोह का हिस्सा बना रहेगा 'अबाइड विद मी', वंदे मातरम भी हुआ शामिल

29 जनवरी को होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान अबाइड विद मी का प्रदर्शन होगा या नहीं, इसे लग रहे कयासों पर अब सेना ने विराम लगा दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार पहले यह कहा जा रहा था कि सरकार ने फैसला लिया है कि इस बार महात्मा गांधी का पसंदीदा ईसाई भजन बीटिंग रिट्रीट का हिस्सा नहीं होगा। 



अब स्पष्ट है कि, विजय चौक पर 29 जनवरी को होने वाले मशहूर बीटिंग रिट्रीट समारोह का समापन इस भजन के साथ ही होगा। इस भजन 'अबाइड विद मी' को स्कॉटलैंड के एंग्लिकन हेनरी फ्रांसिस लाइट ने लिखा है और पिछले साल के कार्यक्रम में यह एक मात्र पश्चिमी धुन थी।

गुरुवार को सूत्रों ने बताया कि, 'पहले बैंड को इस भजन 'अबाइड विद मी' का अभ्यास बंद कर देने को कहा गया था लेकिन पिछले 2-3 दिन में इसका अभ्यास करने का निर्देश दिया गया। यह समारोह का अंतिम भजन होगा जैसा कि पारंपरिक तौर पर होता आया है।'

गुरुवार को सेना ने बीटिंग रिट्रीट के लिए जो आधिकारिक धुनों की पुस्तिका निकाली है, उसमें भी यह धुन शामिल है। बैंड द्वारा बजाए जाने वाले धुनों में 'वंदे मातरम' भी शामिल है।

एक सप्ताह पहले सूत्रों ने कहा था कि समारोह का अंत 'वंदे मातरम' से किया जा सकता है। पारंपरिक तौर पर यह समारोह 'अबाइव विद मी' के साथ खत्म होता है।
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Nirbhaya Case में नया मोड़, अब तीन दोषी फिर जाएंगे कोर्ट, वकील ने जेल प्रशासन से...

Nirbhaya Case

दिल्ली चुनाव : तेज हुआ चुनाव प्रचार का सिलसिला, आज शाह की तीन रैलियां तो नड्डा की दो

दिल्ली विधानसभा चुनाव में रैली और सभाओं का सिलसिला जोर पकड़ रहा है। आज दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तीन रैलियां हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी दो रैलियां करने वाले हैं। अपने प्रचार रथ को गति देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और पार्टी के सबसे बड़े प्रचारक अरविंद केजरीवाल भी राजधानी में रोड शो करने वाले हैं।  

कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मटियाला विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में आप व कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने सीएए, अनुच्छेद 370, जेएनयू मामला, शाहीन बाग को लेकर आप व कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। 

शाह ने कहा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कहते हैं कि वह शाहीन बाग वालों के साथ है। यह बयान उनका दिल्ली की शांति को तोड़ने वाला है। आप व कांग्रेस युवा व अल्पसंख्यकों को भड़काने का काम कर रही है। शाह ने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों (आप व कांग्रेस) ने दिल्ली में दंगा करवाया। जेएनयू में बच्चे नारा लगाते है कि भारत तेरे टुकड़े हों एक हजार। 

ऐसे लोगों को जेल में होना चाहिए। जब उन्हें जेल भेजा गया तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मफलर पहन कर विरोध करने पहुंच गए थे। थोड़ी देर बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी समर्थन में पहुंच गए। शाह ने टुकड़े-टुकड़े गैंग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत माता के टुकड़े करने की बात करने वालों को जेल में भेजने से कोई नहीं रोक सकता। 

कल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कार्यकर्ताओं को दिल्ली फतह करने का मंत्र दिया था। पालम और महरौली विधानसभा में संगठनात्मक बैठक की। इस अवसर पर मिजोरम प्रभारी पवन शर्मा भी मौजूद रहे।

जेपी नड्डा ने कहा कि तय है कि अबकी बार दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी। क्षेत्र में की गई मेहनत हमें जीत दिलाएगी। भाजपा का रिकॉर्ड काम करने का है। दिल्ली की सत्ता में बिना रहे भी कार्यकर्ता काम करते रहे हैं। 

वहीं आप के केजरीवाल भी चुनावी जंग में जीत हासिल करने के लिए जुटे हुए हैं।  दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी आज सभा करने वाले हैं। 
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निर्भया के दोषी फिर पहुंचे कोर्ट, तिहाड़ प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह ने शुक्रवार को एक बार फिर पटियाला हाउस कोर्ट का रुख किया है। इस बार उन्होंने एक आवेदन डालते हुए अदालत से कहा है कि तिहाड़ प्रशासन ने अभी तक उन्हें वो कागजात उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिससे वह दोषी विनय, पवन और अक्षय की क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दाखिल कर सकें।

गौरतलब है कि तीनों में विनय की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है। अब उसे दया याचिका दाखिल करनी है। वहीं पवन और अक्षय को क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दोनों दायर करने हैं। ऐसे में दोषियों के वकील ने कहा है कि 1 फरवरी को फांसी की तारीख निर्धारित है और उन्हें तिहाड़ प्रशासन ने अब तक कागजात उपलब्ध नहीं कराए हैं।
 


निर्भया के तीन दोषी दाखिल करेंगे सुधारात्मक याचिका
निर्भया मामले के तीन दोषी विनय, अक्षय और पवन एक-दो दिन में सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक याचिका दाखिल करेंगे। इसमें तीनों जेल मेें अपने व्यवहार में सुधार का जिक्र कर फांसी की सजा उम्रकैद में बदलने की मांग करेंगे।

तीनों के वकील एपी सिंह ने बताया कि जेल से कागजात नहीं मिलने की याचिका दाखिल करने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि बुधवार को वह मुवक्किलों से मिलने जेल पहुंचेे, लेकिन काफी देर तक मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक याचिका में नए तथ्य देने होते हैं, इसलिए जेल प्रशासन से दोषियों के अच्छे कार्यों का ब्यौरा मांगा है।

एपी सिंह ने कहा कि विनय ने जेल में एक तनावग्रस्त कैदी को खुदकुशी से बचाया है। उसने कई अच्छी पेंटिंग बनाई हैं। ब्लड डोनेशन कैंप में शामिल हुआ। वहीं, अक्षय जेल में सुधार कार्य के तहत चलाए जा रहे योगा शिविर में शामिल हुआ।
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गणतंत्र दिवस परेड: सीएए के विरोध को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम 

गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी वारदात को रोकना मुख्य चुनौती रहती है। इस बार देश भर में सीएए व एनआरसी के विरोध में हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस काफी सतर्क है। 

गणतंत्र दिवस के मौके पर नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले कहीं कोई उत्पात न मचा दे, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गणतंत्र दिवस परेड देखने आने वाले लोगों की इस बार जैकेट उतरवा कर चेकिंग की जाएगी। 

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया विभाग ने इनपुट्स दिए हैं कि इस बार गणतंत्र दिवस पर सीएए व एनआरसी का विरोध कर रहे लोग व्यवधान पैदा कर सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। परेड देखने के लिए जाने वालों की कड़ी चेकिंग की जाएगी। 

आगंतुकों की जैकेट व स्वेटरों को खोलकर चेक किया जाए कि कहीं उसने जैकेट के अंदर सीएए व एनआरसी के विरोध में नारे तो नहीं लिखे हैं। या फिर उसने कोई पोस्टर आदि तो नहीं ले रखा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहां लोग बैठेंगे उसके आगे की तरफ रस्सी का घेरा बनाया जाएगा ताकि परेड में न जा सके। इन जगहों पर सादा वर्दी में पुलिसकर्मी भी तैनात किए जाएंगे। 
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शाहीन बागः प्रदर्शनकारियों को सता रहा है पुलिस बल का खौफ, फरवरी के पहले हफ्ते में कार्रवाई का अंदेशा

शाहीन बाग में महिलाओं का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने लगा है। लेकिन प्रदर्शन में शामिल वॉलंटियर्स को एक खौफ अंदर से परेशान कर रहा है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ वॉलंटियर्स का कहना है कि दिल्ली पुलिस के सहारे सरकार कभी भी सड़क बंद होने से जनता को हो रही परेशानी का हवाला देकर प्रदर्शन स्थल से उठा सकती है। बताते हैं इसका जाल बुना जा रहा है और फरवरी के पहले सप्ताह में इसे अंजाम दिया जा सकता है।
 
एक वॉलंटियर ने बताया कि दिल्ली पुलिस की भाषा बदल रही है, जबकि प्रदर्शन पूरी तरह से सहयोगात्मक, अहिंसात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चेा शाामिल हैं। एक अन्य वॉलंटियर का कहना है कि हम तो केवल इतनी सी मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या केंद्र सरकार का वरिष्ठ जिम्मेदार मंत्री यहां आकर भरोसा दिलाए और कह दे कि भारत में रहने वाले सभी भारतीय हैं और नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है।

नेताओं के बयान बढ़ा रहे खौफ

वॉलंटियर्स का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा नेताओं के सुर बदल रहे हैं। जिसमें हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ का दिया वह बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं और बच्चे चौराहे पर बैठे और पुरुष रजाई में। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करेगी। वहीं दिल्ली से भाजपा के उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने बयान दिया था कि आठ फरवरी को सड़कों पर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होगा, जिसे भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने समर्थन भी दिया। वहीं दिल्ली के चुनाव में प्रचार अभियान में हिन्दू और मुसलमान में बंटवारा कर वोट ध्रुवीकरण के जरिए नफरत को हवा देने की कोशिशें की जा रही हैं।

वॉलंटियर्स का यह है तर्क

  • डीयू की छात्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री हमारे भी हैं। वह पूरे देश के हैं। हम परेशान हैं और वह नहीं आए, न किसी जिम्मेदार को भेजा। हम 15 दिसंबर से बैठे हैं, वह कम से कम हमारी पीड़ा तो सुन लेते? साफ है, हमें अपना नहीं मानते।
  • एक प्ले स्कूल की टीचर का कहना है कि हमने अपनी आवाज उठाई है। आवाज उठाना, सरकार से परेशानी बताना, देश का नागरिक होने के नाते यह अधिकार संविधान ने दिया है। सरकार हमें सुनती क्यों नहीं? उनका कहना है क्योंकि सरकार जो चाह रही है, वह यहां आने से बेकार हो जाएगा।
  • गाजियाबाद के एक इंजीनियरिंग कालेज की पास आउट छात्रा का कहना है कि सरकार देश को दिशा नहीं दे पा रही है। बेरोजगारी चरम पर है, अर्थव्यवस्था की हालत खराब है, उद्योग, उत्पादन क्षेत्र सरकारी नीति में गड़बड़ हो रहे हैं। आए दिन राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी नकारात्मक रिपोर्ट दे रही हैं। बैंक हो या शिक्षा का क्षेत्र सब तंग हैं और सरकार को तीन तलाक का कानून, सीएए, एनआरसी, एनपीआर के बहाने लोगों को लड़ाने की पड़ी है।
  • असलम, फराज, जाकिर जैसै वॉलंटियर्स के मुताबिक सरकार का ध्यान फूट डालो, राज करो पर है। इसलिए ऐसे प्रावधान के बहाने वह जिम्मेदारी छिपाने और लोगों का ध्यान भटकाने में लगी है। 

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कहा सीएए नागरिकता देगा

वॉलंटियर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री एचएम शाह के स्पष्टीकरण कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। किसी की नागरिकता नहीं जाने वाली। वॉलंटियर का कहना है कि भरोसा करें? वह हमारे बीच जानबूझकर नहीं आ रहे हैं। सीएए में मुस्लिमों को बाहर रखा और हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन सब शामिल हैं। यहां तमिल समेत तमाम हिन्दू हैं जो पीड़ित हैं और भारत आना चाहते हैं।

क्या विदेशी हो....क्यों डर रहे हो?

वॉलंटियर का कहना है कि असम में एनआरसी हुआ। असमिया भी विरोध कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिजन, वायुसेना, सेना के पूर्व अधिकारी, गैलेंट्री अवार्ड पाए या राज्य सरकार से सम्मानित लोग नागरिक पंजीकरण रजिस्टर से बाहर हैं। मुसलमानों में शिक्षा का स्तर, सामाजिक विकास अपेक्षाकृत कम है। मजदूर, कामगार, छोटे पेशे के लोग ज्यादा हैं। लोगों के पास अपना और पीढ़ियों के दस्तावेज का हिसाब-किताब नहीं है। बुलंदशहर से आई 50 साल की एक महिला का कहना है कि उसके पास कागज नहीं है, वह अंगूठाछाप है। नागरिकता के दस्तावेज कहां से लाएगी।

क्या हो रोडमैप?

वॉलंटियर्स का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक यहां रहना है। वॉलंटियर सावधान हैं। स्कूल बस, एंबुलेंस और अनिवार्य सेवाओं को रास्ता देने में सहयोग कर रहे हैं। इनका आरोप है कि पुलिस ही एंबुलेंस आदि को रास्ता देने की बजाय उन्हें वापस कर दे रही है। वॉलंटियर की कोशिश बिना किसी से टकराए, शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक, सहयोगात्मक, प्रदर्शन जारी रखने की है। वह इसे अब सत्याग्रह भी बताने लगे हैं।
 
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जामिया हिंसाः पुलिस ने पूर्व कांग्रेस विधायक आसिफ मोहम्मद को भेजा नोटिस, एक हिरासत में

दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 15 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान, स्थानीय नेता आशू खान को नोटिस भेजा है।

अपराध शाखा ने यह नोटिस सीआरपीसी की धारा 160 के तहत भेजा है। इन सभी को 24 जनवरी यानी शुक्रवार को अपराध शाखा के चाणक्यपुरी कार्यालय में उपस्थित होना है, जहां इन सभी से पूछताछ की जाएगी।

वहीं एक स्थानीय नागरिक फुरकान को जामिया हिंसा मामले में अपराध शाखा की विशेष जांच दल(एसआईटी) ने हिरासत में लिया है। इस तरह इस मामले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अपराधा शाखा से जामिया हिंसा को लेकर मिले नोटिस पर कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान का कहना है कि पुलिस के पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है। जब बसें जलाई गईं तब मैं शाहीन बाग के उस प्रदर्शन में था जो आज भी चल रहे हैं। पुलिस भी मेरे स्पीच रिकॉर्ड कर रही थी, यह मेरा सबसे बड़ा सबूत है।
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