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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

किसान आंदोलनः महामाया फ्लाईओवर पर बैठे सैकड़ों किसान, दिल्ली से नोएडा जाने का रास्ता खुला

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार सातवें दिन भी जारी है। मंगलवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान संगठन के नेताओं और केंद्र सरकार के बीच बातचीत हुई, लेकिन इसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब तीन दिसंबर को एक बार फिर वार्ता होगी। वहीं, किसान आंदोलन के चलते मंगलवार को सिंधु और टिकरी बॉर्डर के साथ-साथ नोएडा चिल्ला बॉर्डर को भी सील कर दिया गया। मंगलवार शाम को चिल्ला बॉर्डर की ओर से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। आनन-फानन में पुलिस ने बॉर्डर सील कर दिया। जिसके कारण दिल्ली की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ती नजर आई। शाम को कार्यालय से वापस लौटने वाले लोगों को दिल्ली से नोएडा जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जो लोग बिना जानकारी के नोएडा बॉर्डर पहुंचे उन्हें यहां से यू टर्न लेकर फिर से दिल्ली की ओर वापस आना पड़ा। जिसके कारण अक्षरधाम से लेकर चिल्ला बॉर्डर तक भारी जाम लगा रहा। ... और पढ़ें
दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर आज सुबह किसानों ने फिर गिराया बैरिकेड और दिल्ली नोएडा सीमा पर वॉकी टॉकी की मदद से किसानों का प्रबंधन करता एक किसान दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर आज सुबह किसानों ने फिर गिराया बैरिकेड और दिल्ली नोएडा सीमा पर वॉकी टॉकी की मदद से किसानों का प्रबंधन करता एक किसान

प्रियंका गांधी का योगी सरकार पर हमला, यूपी में फेल रहा भाजपा सरकार का ‘मिशन शक्ति’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर चलाया गया ‘मिशन शक्ति’ अभियान विफल साबित हुआ है।

उन्होंने ट्वीट किया कि जब सरकार का उद्देश्य केवल ढोंग व झूठा प्रचार हो तो मिशन फेल हो ही जाएंगे। यूपी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर पर्दा डालने के लिए भाजपा सरकार का मिशन शक्ति फेल रहा। 

इस दौरान प्रियंका गांधी ने एक खबर भी ट्वीट की और लिखा कि युवती को जलाने वालों के खिलाफ एक महीने बाद केस हो रहा है। अपराध बढ़ते जा रहे हैं।

आपको बता दें कि कुछ हफ्ते पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर अंकुश लगाने के लक्ष्य के साथ ‘मिशन शक्ति’ अभियान की शुरुआत की थी। इसकी शुरुआत के समय कहा गया था कि अभियान के पहले चरण में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के संबंध में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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दिल्ली में मंडी के बाहर अनाज बेच सकेंगे किसान, अधिसूचना पर कैप्टन हैरान, भाजपा हमलावर

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली सरकार ने एक कानून को अधिसूचित कर दिया है। इस कानून के तहत अब दिल्ली के किसान मंडी के बाहर भी अपना अनाज, फल, सब्जी बेच सकते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि किसान उत्पाद, व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) 2020 की अधिसूचना जारी हुई थी। बाकी दो कानूनों पर सरकार अभी विचार कर रही है।

दरअसल, दिल्ली में पहले से ही कृषि उत्पाद बाजार समिति कानून लागू है। इस एक्ट के तहत 2014 से ही मंडी से बाहर फल और सब्जी बेचने की सुविधा थी। अधिकारियों का कहना है कि नया कानून लागू होने से किसान अब अपनी दूसरी फसलें भी मंडी से बाहर बेच सकते हैं। इसका खास असर अनाज पर पड़ेगा। इसके साथ इसमें मुर्गी पालन को जोड़ा गया है। नई अधिसूचना से किसानों को मंडी से बाहर अपना उत्पाद बेचने की सुविधा होगी।

अधिकारियों के मुताबिक, नए कानून मौजूदा मंडियों को खत्म करने का कोई प्रावधान नहीं है। उल्टा मंडी के बाहर किसानों के पास अपनी पैदावार बेचने का विकल्प मौजूद होगा। इसके अलावा दोनों अन्य कानून अभी अधिसूचित नही किए गए है। सरकार उन पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि नए कृषि कानूून लागू होने से किसानों मे आशंका है कि मंडिया खत्म हो जाएंगी। इसके खिलाफ किसान सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं।

भाजपा का आप पर हमला, आप बता रही किसानों को भटकाने की चाल
दिल्ली सरकार की तरफ से किसान कानून लागू करने पर भाजपा हमलावर है। सांसद मनोज तिवारी ने कहना है कि अधिसूचना केजरीवाल सरकार की नकल को उजागर करती है। वह किसानों को गुमराह कर कृषि कानूनों का लाभ साझा करना चाहते हैं। 

वहीं, आप ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्र विरोधी अभियान को सुलझा नहीं पा रही है। यही वजह है कि वह जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। मंडियों को हटाया नहीं गया है बल्कि वह चलती रहेगी। जबकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि किसानों से घिरने के बाद अब भाजपा को समझ में नहीं आ रहा है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन से कैसे निपटे। इसके चलते वह मुद्दे से भटकाने का काम कर रहे है। दिल्ली सरकार की जो अधिसूचना है वह किसानों को बाहर कहीं भी सब्जी बेचने का अधिकार देता है। 

मंडी के बाहर भी वह अपने अनाज व सब्जी को बेच सकते हैं। दिल्ली में सब्जियों को लेकर यह व्यवस्था पहले से है। अब अनाज पर भी यही व्यवस्था लागू हुई है। सरकार मंडी को खत्म नहीं करने जा रहे है। किसान इसके खिलाफ नहीं है। वह न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चिंता जता रहे है। हम उनकी इस मांग का समर्थन करते है।



 
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लॉकडाउन की कीमत अब तक चुका रहे मरीज, कइयों का इलाज डॉक्टरों के लिए चुनौती

कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन में बीमारियों का सही से इलाज नहीं करा पाने वाली मरीज अब तक परेशानी झेल रहे हैं। कई मरीज ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि उनका उपचार करना डॉक्टरों के लिए भी चुनौती बन गया है। राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में लॉकडाउन के दौरान मरीजों का व्यवस्थित उपचार न होने या फिर सर्जरी टलने की वजह से यह दिक्कतें आई हैं। इनमें मूत्राशय से जुड़े रोगी भी हैं। हर वर्ष मूत्राशय रोगों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मूत्राशय संबंधी जटिल बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या हजारों में है।

दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. मनोज जैन ने कहा कि हमारे पास मूत्राशय की जटिल समस्याओं से ग्रस्त रोगी काफी संख्या में आ रहे हैं। इनका इलाज काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि कोरोनो के कारण रोगियों ने चिकित्सकीय सहायता लेने में देरी की है। वहीं नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. राजीव सूद का कहना है कि सर्जरी न होने से कुछ रोगियों के केस जटिल हो गए हैं। 

डॉ. मनोज जैन कहते हैं कि गुर्दे की पथरी निकालने जैसी सरल सर्जरी को टालने से गंभीर समस्याओं का जन्म हो सकता है। उपचार में देर करना सही नहीं है। पुरुषों में यूरेनरी रिटेंशन, लॉकडाउन अवधि में सबसे आम समस्या रही है। जबकि महिलाओं में यूरेनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या आम थी। लॉकडाउन के दौरान कई रोगियों को वैकल्पिक दवाइयां दी जाती रहीं, जिससे मरीजों की स्थिति और बदतर हो गई। चिकित्सक से परामर्श के बिना कई लोगों ने गुर्दे की पथरी को निकलवाने में देरी की, ऐसा करना किडनी फेल्योर का कारण हो सकता है।

कोरोना का खौफ सबसे बड़ी वजह
डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में कोरोना का काफी खौफ है। उन्हें लगता है कि अस्पताल जाने पर वह संक्रमित हो सकते हैं, जबकि उन्हीं के परिजन बाजार या शॉपिंग मॉल्स में खरीदारी कर रहे हैं। शादी समारोह आदि में भी सहभागिता की जा रही है। कहने का आशय है कि व्यक्ति अपने रोजमर्रा के कार्यों में किसी प्रकार की कोताही नहीं करना चाहते। ऐसे में मरीजों को समझना चाहिए कि अस्पतालों में कोविड वार्ड और सामान्य मरीजों के वार्ड के बीच स्पष्ट रूप से अलगाव किया गया है। शॉपिग करने वाली जगह की तुलना में अस्पताल सुरक्षित हैं। इसलिए कोरोनो से संक्रमित होने की आशंका के कारण सर्जरी में देरी करना सही नहीं है।
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मम्मा के साथ हम घर रह सकते थे, लेकिन यहां अपना हक लेने आए हैं...

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हम यहां इसलिए नहीं आए है कि घर पर कोई नहीं है। हम अपना हक लेने आए हैं। तीन काले कानून रद्द होने से पहले हम वापस भी नहीं जाएंगे। गुनगुनी धूप में किताब के पन्ने पलट रही छठी की छात्रा गुरमीत कौर ने आंदोलन में शामिल होने के सवाल पर सीधा-सीधा जवाब दिया। इसके बाद उसने अपने हिसाब से तीनों कानूनों की खामियों को सिलसिलेवार ढंग से गिनाया। साथ ही सवाल किया कि यह कैसा कानून है कि जो किसान को कानून तोड़ने पर सजा देता है, लेकिन कंपनियों को नहीं। गुरमीत कौर बताती है कि हम अनपढ़ नहीं है, बस इसका पता सरकार को चल जाना चाहिए।

पंजाब से अपने घर पर ताला लगाकर आईं कई महिलाएं सिंघु बार्डर पर पहुंचीं हैं। जबकि कइयों ने घर की देखभाल का जिम्मा अपने रिश्तेदारों को दे रखा है। अपनी मम्मी-पापा के साथ आंदोलन में शामिल गुरमीत के घर पर ताला लगा है। पंजाब से आई बलकीत कौर ने कहा कि नए कानून से किसानों को फसलों की उचित कीमत नहीं मिलेगी, इससे बच्चों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। अपने परिवार के भविष्य और किसानों के हक के समर्थन में वह यहां आई हैं।

संगरूर निवासी रणजीत कौर ने कहा कि जब फसल पैदा करने वाले ही रो रहे हैं तो हम उनका साथ क्यों नहीं देंगी। घर के अन्य सदस्यों के लिए खाने पीने की दिक्कत के बारे में कहा कि बहू और बेटियां हैं जो सभी के लिए खाना बना रही हैं। खेती में भी सभी मिलजुलकर काम कर रहे हैं। अपनी खेती बचाने के लिए हम अपना आलीशान मकान छोड़कर सड़क पर रोटिंया सेंक रहे हैं। हरविंदर कौर ने कहा है कि हमारे यहां जब रिश्ता होता है तो देखा जाता है कि जमीन कितनी है और खेती-किसानी कैसी होती है। इसके बगैर किसी का कोई वजूद नहीं है। 

जबकि सरकारी कानून किसानों की रीढ़ तोड़ने वाला है। ऐसे में घर बैठने से फायदा क्या। हम अपनी जमीन, अपनी मां को बचाने के लिए निकल पड़े हैं और बगैर आश्वस्त हुए वापस भी नहीं लौटेंगे। किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि आंदोलन में महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। रही बात कि घर के अन्य सदस्यों के लिए रोटियां कौन बनाएगा तो सभी के बेहतर भविष्य के लिए इतनी कुर्बानी तो कुछ नहीं।
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कृषि कानूनों के विरोध में आप की छात्र-युवा इकाई ने बनाई मानव शृंखला

आम आदमी पार्टी (आप) की छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) और युवा इकाई कृषि कानूनो के विरोध में कनॉट प्लेस में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। इसकी अगुवाई आप विधायक जरनैल सिंह ने की। बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ताओं के कनॉट प्लेस पहुंचने पर पुलिस ने करीब 15 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। बाद में सभी को बुराड़ी के निरंकारी मैदान में छोड़ दिया गया। पार्टी का आरोप है कि भाजपा के इशारे पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे आप कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस तानशाही क र रही है।

इससे पहले सीवाईएसएस एवं यूथ विंग के सैकड़ों कार्यकर्ता दोपहर करीब 12:00 बजे किसान कानून के खिलाफ कनॉट प्लेस में मानव श्रृंखला बनाई। कार्यकर्ताओं ने हाथ में बैनर थे, जिसमें कानून के खिलाफ लाइनें लिखी थीं। इसमें कानून को किसान विरोधी बताया गया था। वहीं, इसका विरोध कर कर रहे किसानों के हक में बातें लिखी थीं। आप कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से किसानों की मांग पूरी करने की अपील भी की।

कार्यकर्ताओं की संख्या बढने से कनॉट प्लेस की आवाजाही बाधित रही। बाबा खडग सिंह मार्ग पर पहुंचने पर ट्रैफिक जाम की स्थिति आई। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्यकर्ताओं को सड़क से हटने की सलाह दी। लेकिन ऐसा न होने पर पुलिस ने जरनैल सिंह समेत करीब कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई देख बाकी कार्यकर्ता मौके से हट गए। हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं को बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान में ले जाकर पुलिस ने छोड़ दिया।

आप विधायक ने कहा, केंद्र सरकार को जगाना मकसद
लाखों की संख्या में आज देश भर से किसान अपने परिवारों के साथ  दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले कई दिनों से बैठे हुए हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पास इतनी भी फुर्सत नहीं है कि 2 मिनट के लिए इन किसानों की बात सुन सकें। मानव श्रृंखला का मकसद केंद्र में बैठी भाजपा सरकार को इस बात का अहसास कराना है कि चुनाव प्रचार नहीं, बल्कि किसानों से बातचीत करना, उनकी समस्याओं का समाधान करना ज्यादा जरूरी है।
जरनैल सिंह, आप विधायक व पंजाब प्रभारी
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दिल्ली: पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 4006 संक्रमितों की पुष्टि, 86 लोगों की मौत 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राजधानी में पिछले 24 घंटों में 4006 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं, मंगलवार को 5036 लोगों डिस्चार्ज किया गया है। इसी के साथ 86 मौतें दर्ज की गई हैं। दिल्ली में अभी कुल पॉजिटिविटी रेट 9.05 प्रतिशत है। जबकि पिछले दस दिनों में मृत्यु दर 1.93 प्रतिशत दर्ज की गई है। 
 


दिल्ली में मंगलवार को 58456 कोरोना जांच की गई हैं। इसमें 30297 आरटी-पीसीआर जांच और 28159 रैपिड एंटीजन जांच शामिल हैं। राजधानी में अब तक कुल 63,46,521 कोरोना जांच की गई हैं।

दिल्ली में अब तक कुल 5,74,380 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। इसमें से कुल 5,33,351 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से राजधानी में अब तक कुल 9,260 मौतें हुई हैं। दिल्ली में अभी कुल 31,769 सक्रिय मरीज हैं। इसमें से 19400 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राजधानी में अभी कुल 5669 कंटेनमेंट जोन हैं। 
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किसानों को उम्मीद: अगली बैठक में निकलेगा नतीजा, बोले- मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे

घर और परिवार को छोड़कर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर डटे किसानों को पहले ही वार्ता से कम उम्मीदें थी। दो दिन बाद होने वाली मीटिंग से थोड़ी उम्मीदें जरूर हैं। लाखों किसानों की बात सरकार तक पहुंचाने पहुंचे यूनियन प्रतिनिधियों ने चाय से इनकार करते हुए उन्हें कहा कि सिंघु बॉर्डर पर खीर तैयार है। लाखों किसानों को ठंड में छोड़कर यहां चाय पीने नहीं, उनकी मांगे पूरी करें। किसानों ने साफ कर दिया कि इस मामले पर फैसला लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी बीच महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

किसानों को था अंदेशा, करना पड़ेगा इंतजार
अपनी मांगों को लेकर सीमाओं पर इकट्ठा हुए किसानों ने पहले ही अपने लिए पूरी तैयारियां कर ली थी। किसानों को इस बात का अंदाजा था कि उनकी मांगों पर सुनवाई में वक्त लगेगा। मीटिंग के बाद बाहर निकले किसानों ने आरोप लगाया कि एक एक दिन छोड़कर मीटिंग का फैसला इसलिए लिया गया ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। किसान पहले ही छह महीने तक की तैयारी के साथ आए हैं। हरियाणा के किसानों के अलावा दिल्ली के संगठनों, खाप के अलावा दूसरे प्रदेशों के किसान भी लगातार पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि आगे भी आंदोलन पर किसान डटे रहेंगे।

सरकार को मसले का करना होगा हल
भाकियू के वरिष्ठ नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। परसों फिर मीटिंग होगी। केंद्र सरकार को इस मसले का हल करना पड़ेगा। किसानों के साथ साथ अब जन साधारण भी इस आंदोलन में शामिल होने लगा है, जिसे कोई भी सरकार इंकार नहीं कर सकती है। 

किसान पीछे हटने के लिए नहीं हैं तैयार
जोगिन्दर सिंह उग्राहा ने कहा कि किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। परसों होने वाली दोबारा बैठक से उम्मीदें हैं, लेकिन किसान अपनी मांगों से एक इंच भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि मीटिंग से उम्मीदें तो है, लेकिन मांगे पूरी होने तक किसानों का आंदोलन रुकेगा नहीं। किसानों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई राज्यों के किसानों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। 

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
बलदेव सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से छोटी कमेटी बनाने का प्रस्ताव को भी किसानों ने इसे खारिज कर दिया है। सरकार इसे आंदोलन को लंबा करना चाहती है ताकि इसे कमजोर किया जा सके। उन्होंने शक जताते हुए कहा कि हो सकता है कि इस बीच आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जाए। सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।

कानून रद्द करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि बेनतीजा रही। परसों दोबारा मीटिंग होगी, लेकिन इसमें क्या निर्णय लिया जाएगा, फिलहाल कुछ नहीं कह नहीं कह सकते हैं। किसानों की मांग कृषि कानूनों को रद्द करने की है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर पहुंची शाहीन बाग की बिलकिस दादी को पुलिस ने वापस भेजा

शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आईं बिलकिस दादी भी किसानों के समर्थन करने मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पहुंची थीं।  पुलिस ने उन्हें यहां से वापस भजे दिया।  इससे पहले उन्होंने कहा था  कि हम किसानों की बेटियां हैं। आज हम किसानों के प्रदर्शन स्थल पर जाकर उनका समर्थन करेंगे। हम अपनी आवाज उठाएंगे। सरकार को हमारी बात सुननी पड़ेगी।
 



पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने कहा कि वह एक वरिष्ठ नागरिक हैं और कोविड-19 महामारी के चलते हमने उन्हें सिंघू बॉर्डर पर रोक दिया और उनकी सुरक्षा के लिए वापस जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो इसलिए पुलिस के एक दल ने उन्हें दक्षिण पूर्वी दिल्ली में स्थित उनके घर पहुंचा दिया। 

100 प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार रही हैं शाहीन बाग वाली की बिलकिस दादी  
इस बार टाइम मैगजीन ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में बिलकिस दादी को भी शामिल किया था। शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने इस पर कहा था कि जिस कानून के विरोध में वह धरने पर बैठी थीं, उसी धरने को देखकर दुनिया ने शाहीन बाग का सजदा किया है। उनका कहना है कि हम शांतिप्रिय लोग हैं, इसलिए कोरोना संकट आने के बाद ही खुद प्रदर्शन को समाप्त करने का फैसला लिया। इस सम्मान को पाने के बाद बिलकिस दादी ने टाइम मैगजीन का शुक्रिया अदा किया था। उनका कहना है कि वह मरते दम तक सीएए कानून का विरोध करती रहेंगी। 

विज्ञान भवन में केंद्र सरकार और 35 किसान नेताओं के बीच बातचीत जारी
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी है। वहीं दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान संगठन के नेताओं और केंद्र सरकार के बीच बातचीत शुरू हो गई है। बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम किसानों को जो विकल्प देने वाले हैं वह बिल्कुल उनकी मांगों पर ही आधारित है।

टिकरी बॉर्डर आज भी बंद 
वहीं, ट्रैफिक पुलिस ने जानकारी दी है कि टिकरी बॉर्डर आज भी बंद है। दिल्ली पुलिस को बॉर्डर से ज्यादा नई दिल्ली जिले की सुरक्षा की चिंता है। बॉर्डरो से किसानों को प्रवेश करने की अनुमति मिल रही है लेकिन नई दिल्ली इलाके में जाने की इजाजत नहीं है। जिले में धारा 144 को कड़ाई से लागू कर दिया गया है।

बाकि संगठनों को भी बातचीत के लिए बुलाए सरकार 
पंजाब किसान संघर्ष कमेटी के संयुक्त सचिव सुखविंदर एस सभरन ने कहा कि देश में किसान संगठनों की संख्या 500 से भी अधिक है, लेकिन सरकार ने बातचीत के लिए केवल 32 संगठनों को न्योता दिया है। अन्य संगठनों को सरकार ने नहीं बुलाया। जबतक सभी संगठनों को न्योता नहीं दिया जाता, तबतक हम बातचीत के लिए नहीं जाएंगे।
 
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