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एथिकल हैकिंग की दुनिया में शुभम गुप्ता बने जाना-पहचाना नाम, बताया कहां से मिली प्रेरणा

भारत के एक छोटे से शहर में जन्मे शुभम गुप्ता एथिकल हैकिंग की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं। हालांकि आज के दौर में भी एथिकल हैकिंग को लोग करीब से नहीं...

20 जुलाई 2020

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Digital Edition

चिंता की बातः इस बार सर्दियों में वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, इटली में हो चुका है ऐसा

सर्दियों में वायु प्रदूषण से कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ सकता है। देश की राजधानी दिल्ली के डॉक्टर व पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में अक्सर वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। चूंकि कोरोना वायरस और प्रदूषण के बीच संबंध की पुष्टि विज्ञान भी कर चुका है। ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर आने वाले दिनों में सर्दियों के साथ प्रदूषण बढ़ा तो कोरोना संक्रमण का दायरा भी बढ़ सकता है। 

दरअसल दिल्ली में हर वर्ष दीपावली के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है। दिल्ली गैस चैंबर बन जाती है जिसके चलते सांस, अस्थमा और काला दमा जैसे रोगियों को सबसे ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड महामारी में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो यह बहुत ज्यादा खतरनाक कारगर हो सकती है। 

सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इटली में कोरोना वायरस और वायु प्रदूषण के बीच संबंध साबित हो चुका है। अब तक कई चिकित्सीय अध्ययन सामने आ चुके हैं जिनमें यह साबित होता है कि पीएम 2.5 कणों में बढ़ोतरी होने से कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से होगा। इटली के जिन इलाकों में सबसे ज्यादा और गंभीर कोरोना वायरस के मामले मिले हैं वहां पीएम 2.5 का स्तर भी सबसे ज्यादा रहा है। 

चीन, हॉवर्ड और इटली के वैज्ञानिकों के कई अध्ययन भी सामने आ चुके हैं। साइंस डायरेक्ट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिक डेनियल फेटोरिनी और फ्रांसेस्को रेगोली ने पीएम 2.5 का स्तर उच्च होने पर उन इलाकों में कोरोना वायरस का फैलाव और उसकी आक्रामकता में भी तेजी पाई है।

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भी ऐसा ही एक अध्ययन हाल में ही पूरा किया है जिसमें उन इलाकों की कोविड-19 को लेकर तुलना की गई जहां बीते 17 वर्ष में पीएम 2.5 सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। अध्ययन में यह साबित हुआ है कि पीएम 2.5 की वजह से कोरोना मृत्युदर में 15 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार का कहना है कि लॉकडाउन में 80 से 100 औसत स्तर देखने को मिला लेकिन 3 मई के बाद से लॉकडाउन को लेकर छूट दी जाने से प्रदूषण का स्तर बढऩे लगा तो मरीजों की संख्या भी अब सामने आ रही है। हालांकि इसमें और स्पष्टता भी जल्द आएगी।

पुणे स्थित पल्मोकेयर रिसर्च एंड एज्युकेशन (प्योर) फाउंडेशन के निदेशक डॉ. संदीप साल्वी का कहना है कि वायु प्रदूषण को लेकर हर साल स्थिति गंभीर बनती है लेकिन इस बार कोरोना की वजह से यह और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अभी तक के अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि प्रदूषण कोरोना वायरस को बढ़ावा देने में मददगार है।

आश्चर्य : दिल्ली-एनसीआर के 84 फीसदी लोग एक्यूआई से अनजान
बीते जून माह में लंग केयर फाउंडेशन की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली एनसीआर के लोग एक्यूआई से अनजान हैं। इसी साल फरवरी में दिल्ली-एनसीआर के 1757 लोगों पर तैयार की गई। इस सर्वे में 38.80 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले एक वर्ष में छाती की परेशानी को लेकर किसी न किसी डॉक्टर या अस्पताल में सलाह के लिए गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि 83.60 फीसदी लोगों ने एयर क्वालिटी इंडेक्स की जानकारी न होने का हवाला दिया। 57.7 फीसदी लोगों ने माना है कि उनके शहर की हवा प्रदूषित या ज्यादा प्रदूषित है।

दोहरी मार करता है प्रदूषण
विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण की वजह से दोहरी मार देखने को मिलती है। यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करने के सा थ साथ प्रतिरोधक प्रणाली को भी प्रभावित करता है। यह कहना है सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विशेषज्ञ सुनील दहिया का। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण अत्यधिक होने के पीछे सिर्फ पराली का जलना ही मुख्य कारण नहीं हैं। सरकार को वायु गुणवता में गिरावट को रोकने के लिए सर्दियों के दौरान कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों को बंद करने का आदेश देना चाहिए।  
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दिल्ली की सर्दी दिल्ली की सर्दी

एक्सक्लूसिवः देश की राजधानी में 110 ब्लैक स्पॉट, रोज रहता है हादसों का खौफ

पुलिस ने सड़क हादसों के 110 ऐसे स्थान चिन्हित किए हैं, जहां वाहन चालक की जरा सी चूक से दुर्घटना हो जाती है। इन स्थानों पर खराब इंजीनियरिंग और वाहनों का अतिरिक्त भार हर दिन हादसों को दावत दे रहा है। इसमें आईएसबीटी कश्मीरी गेट, मुकुंदपुर, शास्त्री पार्क, वजीराबाद, पीरागढ़ी सरीखे उन इलाकों में दुर्घटना की आशंका ज्यादा रहती है, जहां लोगों की भीड़ ज्यादा है। यह सभी प्वाइंट ट्रैफिक जंक्शन के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। वाहनों की अदला-बदली के लिए होने वाली भागमभाग के बीच कई बार लोग हादसे के शिकार हो जाते हैं।

ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि ब्लैक स्पॉट की पहचान कर इसकी डिजाइन में बदलाव और यात्रियों की सहूलियत के लिए अतिरिक्त सुविधाएं तैयार करने की सिफारिश पीडब्ल्यूडी को की गई है। इससे हादसों को सीमित किया जा सकता है। वहीं, दिल्ली सरकार का कहना है कि दिल्ली की बड़ी सड़कों की रि-डिजाइन की जा रही है। इस प्रोजेक्ट में ब्लैक स्पॉट को खत्म करने पर जोर है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद साल भर के भीतर आवाजाही बेहतर हो जाएगी।

इन 5 स्थान पर सबसे अधिक होते हैं सड़क हादसे
  • कश्मीरी गेटः मौत-10, सामान्य हादसे-14, कुल-24
  • मुकुंदपुर चौकः मौत-8, सामान्य हादसे-16, कुल-24
  • शास्त्री पार्कः मौत-5, सामान्य हादसे-17, कुल-22
  • वजीराबादः मौत-6, सामान्य हादसे-16, कुल-22
  • पीरागढ़ी चौकः मौत-5, सामान्य हादसे- 15, कुल-20

आए दिन हो रहे हादसे
देश की राजधानी में हो रहे आए दिन हादसों के बाद ट्रैफिक पुलिस भी ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां सुधार लाने का प्रयास कर रही है। पिछले साल दिल्ली में जो इन स्थानों पर हादसे हुए उनमें 44' हिट एंड रन के केस हुए हैं जो पैदल रास्ता पार रहे थे। पुलिस ने अपनी एक रिसर्च में ये पाया कि प्राइवेट कार और टैक्सी सबसे ज्यादा हादसे को अंजाम दे रहे हैं। इसके बाद दूसरे नंबर दो पहिया गाड़ी आते हैं। 

साइकिल वाले भी हुए शिकार
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, साइकिल से चलने वालों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा केस सुबह के समय के हैं। वजीराबाद और कश्मीरी गेट पैदल चलने वालों के लिए सबसे खतरनाक साबित हुए हैं। वहीं, सबकी बात की जाए तो रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर भी हर दिन हादसे हो रहे हैं। यहां अचानक से लूप लेने पर टर्न लेने वालों की वजह से हादसे सामने आ रहे हैं। 

दूसरी संस्थाएं भी कर रही काम
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार व पुलिस के साथ दूसरी संस्थाएं भी काम कर रही है। कंद्रीय सड़क रिसर्च संस्था की इसके लिए मदद ली जा रही है। ज्यादातर रास्तों पर खराब इंजिनियरिंग की हादसों की मुख्य वजह सामने निकल आ रही है।
-रविकांत सिंह, सड़क-परिवहन विशेषज्ञ
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दिल्ली दंगा: पुलिस का आरोप, सलमान खुर्शीद और बृंदा करात जैसे नेताओं ने दिए थे भड़काऊ बयान

 सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, बृंदा करात और उदित राज जैसे नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए थे। दिल्ली पुलिस ने यह दावा दिल्ली दंगों के मामले में दाखिल आरोप पत्र में इशरत जहां और खालिद सैफी तथा सुरक्षित गवाह के बयानों के आाधार पर किया है।

कड़कड़डूमा अदालत में दाखिल आरोप पत्र में पूर्व कांग्रेसी पार्षद इशरत जहां तथा सुरक्षित गवाह के बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि इन्होंने अपने बयानों में नेताओं के भड़काऊ भाषणों का जिक्र किया है।

आरोप पत्र में कहा गया है कि सुरक्षित गवाह ने अपने बयान में कहा है कि उदित राज, खुर्शीद और करात जैसे कई बड़े नेता और जेएनयू का पूर्व छात्र नेता उमर खालिद खुरेजी धरना स्थल पर आए थे और वहां सीएए तथा एनपीआर के खिलाफ भाषण दिए थे।

वहीं आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि इशरत जहां ने अपने इकबालिया बयान में कहा है कि सीएए के खिलाफ धरने को लंबा खींचने के लिए खुर्शीद, फिल्मकार राहुल रॉय, भीम आर्मी सदस्य हिमांशु, चंदन कुमार समेत कई बड़े नेताओं को उसने तथा खालिद सैफी ने जामिया कॉर्डीनेशन कमेटी (जेसीसी) के कहने पर बुलाया था। इन लोगों ने भड़काऊ भाषण दिए थे जिसके कारण धरने में बैठे लोग सरकार के खिलाफ हो गए थे।

पुलिस ने सैफी के इकबालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा है कि जनवरी 2020 में सीएए विरोधी धरने में स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, खुर्शीद इन भाषणों में आते थे। सैफी के पूरक बयान में यह भी कहा गया है कि धरने को लंबा खींचनेे के लिए खुर्शीद, शरजील इमाम, जेसीसी के सदस्य मीरान हैदर को खुरेजी धरना स्थल पर बुलाया गया था। इन लोगों को सैफी व इशरत जहां ने बुलाया था।- एजेंसी
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खास खबरः दिल्ली में कोरोना संक्रमण का अलग है रूप, गंभीर केस कम

स्वाइन फ्लू की तरह कोरोना वायरस को लेकर भी दिल्ली की स्थिति देश के बाकी राज्यों से अलग मिल रही है। दिल्लीवालों में अन्य राज्यों से अलग कोरोना वायरस का रूप दिखाई दे रहा है। इससे राजधानी में बिना या कम लक्षण वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। 

हालांकि, दिल्ली में कोरोना वायरस की मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से अधिक है लेकिन संक्रमण की ग्रोथ अन्य राज्यों से कम है। वैज्ञानिकों के अनुसार देश की राजधानी में रहने वाले संक्रमित मरीजों में कोरोना वायरस का ए3आई स्ट्रेन देखने को मिल रहा है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में सबसे ज्यादा ए2ए स्ट्रेन है। इन दोनों स्ट्रेन की तुलना करें तो ए3आई कम प्रसार और प्रभाव की क्षमता रखता है। 

बीते जून माह में ही हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने इस ए3आई स्ट्रेन के भारत में मिलने की पुष्टि की थी। करीब दो महीने के अध्ययन के बाद इन्हें पता चला है कि ए3आई स्ट्रेन का प्रभाव अन्य की तुलना में कम है। 

निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि दिल्ली में सबसे ज्यादा ए3आई स्ट्रेन मिल रहा है। यह स्थिति बाकी राज्यों कीतुलना में एकदम अलग है। दिल्ली में भले ही रोजाना तीन हजार से ज्यादा केस मिल रहे हैं लेकिन इनमें गंभीर मामले काफी सीमित हैं।

दिल्ली में इस समय 31,623 सक्रिय मामले हैं जिनमें आधे से ज्यादा 18,464 मरीज अपने अपने घरों में आईसोलेशन पर हैं। इन मरीजों में कोरोना वायरस के या तो लक्षण नहीं है या फिर मामूली प्रभाव है। दिल्ली के अलग अलग चिकित्सीय संस्थानों से हासिल नमूनों की जांच के बाद स्ट्रेन का पता लगाया है। 

वजह तलाशने में जुटे वैज्ञानिक 
दिल्ली में अन्य जगहों से अलग कोरोना वायरस का स्ट्रेन मिलने के बाद सीएसआईआर के ही वैज्ञानिक अब इसके पीछे की वजह तलाशने में जुटे हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक वैज्ञानिक ने बताया कि महामारी के शुरूआती महीनों में विदेशों से आने वाले लोगों को हवाई अड्डे पर ही आइसोलेट किया जा रहा था लेकिन मार्च के महीने में विदेशों से दिल्ली और फिर यहां से राज्यों तक आवागमन हुआ।

देश के कई शहरों में सीधे भी विदेशों से लौटकर आने पहुंचे थे। ऐसे में अलग अलग देश से भिन्न भिन्न असर वाले स्ट्रेन भारत आए। उम्मीद है कि दिल्ली में इसी तरह से ए3आई स्ट्रेन फैलाव हुआ। हालांकि अभी इसका वैज्ञानिक अध्ययन होना बाकी है। 
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दिल्लीः प्रेम-प्रसंग पर बवाल, सिर की हड्डियां तोड़ीं, युवक की मौत

सांकेतिक तस्वीर...
रोहिणी जिले के कंझावला स्थित सवादा इलाके में मंगलवार रात एक लड़की से प्रेम-प्रसंग को लेकर लड़कों के एक गुट ने दूसरे गुट पर हमला कर दिया। इस दौरान वहां से गुजर रहे स्थानीय निवासी शौकत (24) ने बीच-बचाव किया तो हमलावरों ने उसके सिर की हड्डियां तक तोड़ डाली। घायल शौकत व एक अन्य युवक को संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें सफदरजंग रेफर कर दिया गया। इस बीच शौकत की मौत हो गई।

आरोपियों ने डेढ़ घंटे से ज्यादा देर तक बलवा किया। पुलिस ने दंगा और हत्या का मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी अंकित, विकास समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है। कुछ लोगों ने झगड़े को सांप्रदायिक रंग देने का भी प्रयास किया।

पुलिस के मुताबिक, घायल युवक रिहान (18) ने बताया कि वह परिवार के साथ ओ-ब्लॉक, जेजे कालोनी सवादा में रहता है और ओपन स्कूल से 10वीं कर रहा है। घर के पास उसका दोस्त सैदर रहता है। वह इलाके में रहने वाली एक युवती से प्यार करता है। एम-ब्लॉक में रहने वाला अंकित भी उसी युवती को चाहता है। पता चलने पर अंकित कई बार अपने साथियों को लेकर सैदर को ढूंढने उसके मोहल्ले में गया। मंगलवार रात फिर अंकित अपने दोस्त आकाश, विकास, रोहन, अन्नू, हिमांशु, राहुल, चोली, सुनील आदि के साथ सैदर को ढूंढते हुए ओ-ब्लॉक उसके घर के पास पहुंचे।

सभी के हाथों में डंडे, हॉकी, बेसबॉल के बैट, तलवार थे। पास में रिहान खड़ा था। अंकित ने कहा कि यह सैदर का दोस्त है। इतना सुनते ही लड़कों ने रिहान पर हमला कर दिया। इस बीच जी-ब्लॉक में रहने वाला शौकत वहां पहुंचा और बीच-बचाव कराने लगा। उसने रिहान को छुड़ा लिया। इस बीच रिहान पड़ोसी अब्बास के मकान में घुस गया। यह देख आरोपियों ने शौकत पर हमला कर दिया और कुछ लड़कों ने अब्बास के मकान पर पथराव कर दिया, परंतु रिहान बाहर नहीं निकला। इस दौरान लोग लगातार पुलिस को कॉल करते रहे, लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। करीब एक घंटे बाद पहुंची पुलिस ने घायल रिहान व शौकत को अस्पताल पहुंचाया, जहां शौकत को मृत घोषित कर दिया गया। रिहान के हाथ-पैर में फ्रैक्चर हो गया है।

बीच-बचाव कराने की मिली शौकत को सजा
शौकत के भाई सैलाब ने बताया कि वह परिवार के साथ जी-87, सवादा में रहता है। उसका भाई प्राइवेट नौकरी करता था। मंगलवार को वह अपनी नौकरी पर गया था। रात को वापस लौटते समय उसने रिहान को पिटते हुए देखा तो बीच-बचाव कराने लगा। इसी की उसे सजा मिली। सड़क पर उसके भाई को आरोपी बेरहमी से पीटते रहे, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। आरोपी एक घंटे से ज्यादा सड़क पर बलवा करते रहे और उसका भाई सड़क पर पड़ा तड़पता रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया। बाद में परिवार को खबर मिली तो उन्होंने अस्पताल पहुंचकर उसकी पहचान की। सैलाब ने बताया कि उसके भाई के सिर में कई फ्रैक्चर थे। बेसबॉल के बैट से सिर की हड्डियां तोड़ दी गई। पुलिस ने बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया। इसके बाद लोगों ने झंडा चौक पर शव रखकर हंगामा किया। उनकी मांग थी कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ी। पुलिस ने समझा-बुझाकर लोगों को शांत किया।

9.53 से 11.52 के बीच 19 पीसीआर कॉल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हथियारों से लैस लड़के इलाके में बवाल करते रहे, लेकिन पुलिस ने सुध नहीं ली। दावा किया कि पुलिस को 100 से अधिक कॉल की गई। कुछ लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी वहां आए भी थे, लेकिन हालात देखकर चुपचाप निकल गए। पुलिस के रिकॉर्ड में रात 9:53 से 11:52 के बीच 19 पीसीआर कॉल की गईं। वहीं, कुछ लोगों ने झगड़े को सांप्रदायिक रंग देने का भी प्रयास किया और कहा कि पुलिस इसी वजह से जान-बूझकर वहां नहीं पहुंची। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सारे आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती, बुखार और ऑक्सीजन की थी शिकायत

नोएडा: दवा बनाने वाली कंपनी में लगी भीषण आग, बाहर निकाले गए कर्मचारी, दमकल की गाड़ियां मौजूद

नोएडा सेक्टर 59 स्थित जुबलिएंट कंपनी में बुधवार शाम को अचानक भीषण आग लग गई। आग कंपनी की दूसरी मंजिल पर लगी है। मौके पर आधे दर्जन से अधिक दमकल की गाड़ियां आग बुझाने की कोशिश में लगी हुई हैं। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं हैं।

अग्निशमन अधिकारी कुंवर सिंह ने बताया कि सेक्टर 59 के सी-26 स्थित जुबलिएंट कंपनी के दूसरे माले पर बुधवार शाम को अचानक आग लग गई। इस कंपनी में दवाओं की रिसर्च और डेवलपमेंट का काम होता है। 






सूचना के बाद मौके पर आधा दर्जन से अधिक दमकल की गाड़ियां पहुंचीं और सबसे पहले सभी कर्मचारियों को बाहर निकाला। अभी आग बुझाने का काम चल ही रहा है। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाए जाने के बाद ही घटना के कारणों की जांच की जाएगी।
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शाहीन बाग वाली 'दादी' हुईं दुनिया की 100 प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार, टाइम मैगजीन ने जारी की लिस्ट

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने साल 2020 के शीर्ष सौ प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें जगह पाने वालों में शाहीन बाग की दादी बिलकिस भी शामिल हैं जो सीएए के खिलाफ पूरे भारत में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का चेहरा रहीं।

टाइम मैगजीन में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल होने के बाद शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने कहा कि, जिस कानून के विरोध में वह धरने पर बैठी थीं, आज उसी धरने को देखकर दुनिया ने शाहीन बाग का सजदा किया है। यूपी के हापुड़ जिले में अपने रिश्तेदार के घर गई बिलकिस दादी बताती हैं कि, वह मोदी सरकार से अब भी कानून को वापस लेने की अपील करती हैं। 

उनका कहना है कि हम शांतिप्रिय लोग हैं, इसलिए कोरोना संकट आने के बाद ही खुद प्रदर्शन को समाप्त करने का फैसला लिया। इस सम्मान को पाने के बाद बिलकिस दादी ने टाइम मैगजीन का शुक्रिया अदा किया है। उनका कहना है कि वह मरते दम तक सीएए कानून का विरोध करती रहेंगी।  

पीएम मोदी को भी मैगजीन ने किया शामिल
इस साल टाइम मैगजीन ने शाहीन बाग आंदोलन के दौरान 'दादी' के नाम से मशहूर हुईं बिलकिस को भी दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है। 82 वर्षीय दादी बिलकिस उस वक्त सुर्खियों में आईं, जब नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग आंदोलन में वह धरने पर बैठी थीं। इसके अलावा 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर से जगह दी गई है। इस लिस्ट में अभिनेता आयुष्मान खुराना और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई शामिल हैं। 

एनआरसी-सीएए के विरोध के बाद उभरा दादी का चेहरा
एनआरसी-सीएए विरोध का चेहरा बनकर उभरीं बिलकिस यूपी के बुलंदशहर की रहने वाली हैं। उनके पति की करीब ग्यारह साल पहले मौत हो चुकी है। बिलकीस फिलहाल शाहीनबाग में अपने बहू-बेटों और पोते-पोतियों के साथ रहती हैं। 

शाहीनबाग प्रदर्शन में दादी के नाम से मशहूर हुईं बिलकिस ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नारा दिया था कि, जब तक रगों में खून बह रहा है, तब तक यहीं बैठी रहूंगी। उनके साथ दो दादी और भी थीं, जो हर वक्त प्रदर्शन में साथ ही रहती थीं।

 
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गाजियाबाद में कार चोरों को ट्रेन ने दी सजा, रेलवे ट्रैक पर घटी अजीबो गरीब घटना

गाजियाबाद के कविनगर इलाके में चोरी की एक अजीब वारदात सामने आई है। कविनगर क्षेत्र की बागवाली कॉलोनी में कुछ बदमाश एक घर से कार चोरी कर ले जा रहे थे और वह रेलवे ट्रैक पार कर भागने वाले थे, लेकिन उनकी किस्मत ने धोखा दे दिया।

जब वह ट्रैक पार कर भाग रहे थे तभी एक ट्रेन आने लगी जिसे देखकर चोर कार में से निकले और उसे वहीं छोड़कर भाग गए। हालांकि ट्रेन के पायलट ने कार देख ली थी जिसके तहत एहतियातन ट्रेन रोक दी। हालांकि ट्रेन से कार को धक्का जरूर लगा, जिससे उसके आगे का शीशा टूट गया।

इस घटना के बाद दिल्ली-लखनऊ रेल रूट कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया फिर वहां से कार हटाकर रूट खोला गया।
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