आखिर दिल्ली में फिर जमीनी कार्यकर्ता पर भाजपा ने जताया भरोसा, कभी ट्यूशन पढ़ा कर करते थे गुजारा

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 02 Jun 2020 06:37 PM IST
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Adesh Kumar Gupta
Adesh Kumar Gupta - फोटो : Social Media

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सार

  • मुख्यमंत्री केजरीवाल की राजनीति को उनके ही दांव से पटकी देने की तैयारी
  • बड़े संघर्ष के साथ नेता बने हैं आदेश कुमार कुमार गुप्ता
  • कभी पढ़ाते थे ट्यूशन, अब बढ़ाएंगे भाजपा का जनाधार

विस्तार

दिल्ली में भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद से मनोज तिवारी की छुट्टी करके वेस्ट पटेल नगर से पार्षद आदेश कुमार गुप्ता को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्षद गुप्ता ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य के रूप में छात्र राजनीति शुरू की थी।
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पार्टी के पुराने कार्यकर्ता के साथ वह संगठन में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 2018 में उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के चेयरमैन ने कभी ट्यूशन पढ़ाकर जीवन के संघर्ष को जिया है।
समझा जा रहा है कि व्यापारी समुदाय से आने वाले जुझारू गुप्ता भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी देकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनौती देने का लक्ष्य तय किया है।

दिग्गजों को छोड़ भाजपा ने जुझारू को चुना

दिल्ली विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद से प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे में बदलाव की उम्मीद की जा रही थी। भाजपा के पास ऐसे कई दिग्गज चेहरे हैं, जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती थी।
इस कड़ी में सांसद मीनाक्षी लेखी, सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और कुलजीत चहल जैसे चेहरे हैं, लेकिन शीर्ष पार्टी नेतृत्व ने इससे उलट नए जुझारू चेहरे पर दांव खेला।

वैसे पिछले दो-तीन बार से भाजपा इसी तरह का प्रयोग कर रही है। इससे पहले मनोज तिवारी और उनसे पहले सतीश उपाध्याय को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर भाजपा ने दिल्ली के राजनीतिक पंडितों को चौंकाया था।

मनोज को बदलना ही था

पूर्व प्रदेश मनोज तिवारी का कार्यकाल दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले ही समाप्त हो गया था, लेकिन चुनाव के ठीक पहले उन्हें हटाकर केंद्रीय नेतृत्व कोई गलत संदेश नहीं देना चाहता था।

यही कारण है कि मनोज तिवारी को विस्तार मिल गया था। वैसे भी दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी को हुई करारी हार से प्रदेश अध्यक्ष पद से उनका हटना तय माना जा रहा था।

प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मनोज तिवारी का कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं रहा। वे भाजपा को दिल्ली की स्थानीय राजनीति में उसका खोया जनाधार वापस लाने में कामयाब नहीं हो सके।

उनके अध्यक्ष कार्यकाल में पार्टी ने लोकसभा की सातों सीटों पर रिकॉर्ड जीत जरूर हासिल की है, लेकिन इस उपलब्धि को पार्टी के केंद्रीय नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का करिश्मा ही माना गया था।

आदेश गुप्ता में क्या है खास

आदेश गुप्ता भाजपा के पुराने कार्यकर्ता हैं। जमीन से उठकर राजनीति करते हुए पार्षद बने हैं। व्यापारी समुदाय (गुप्ता) से हैं और दिल्ली में व्यापारी वर्ग भाजपा का पुराना मतदाता रहा है।

इस समय दिल्ली का व्यापारी वर्ग आम आदमी पार्टी के साथ दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि दो बार पूरब (सतीश उपाध्याय, मनोज तिवारी) को अजमाने के बाद भाजपा एक बार फिर अपनी जड़ों की तरफ लौटना चाह रही है।

दिल्ली में कभी भाजपा का दबदबा होता था। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना का सिक्का चलता था। खुराना के बाद साहिब सिंह वर्मा और फिर कुछ महीने के लिए सुषमा स्वराज भी मुख्यमंत्री बनी थीं।

विजय गोयल, विजेंद्र गुप्ता उसी जमाने के भाजपा नेता हैं। इस तरह से आदेश कुमार गुप्ता को तरजीह देकर भाजपा एक बार फिर स्थानीय को महत्व दे रही है।

नये प्रदेश अध्यक्ष की चुनौती

आदेश कुमार गुप्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली नगर निगम चुनावों में भाजपा की सत्ता बरकरार रखना होगी। इसके लिए अभी उनके पास साल भर से अधिक समय है।

लेकिन उनके सामने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल से निबटने की कठिन चुनौती है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार दो बार प्रचंड बहुमत हासिल कर पार्टी ने साफ कर दिया है कि अब वह यहां एक मजबूत दल के रूप में भाजपा और कांग्रेस के लिए कठिन चुनौती साबित होगी।
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