दिल्ली की सियासतः शपथ ग्रहण समारोह से भाजपा और कांग्रेस ने बनाई दूरी

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Mon, 17 Feb 2020 06:02 AM IST
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शपथ ग्रहण समारोह
शपथ ग्रहण समारोह - फोटो : अमर उजाला

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विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह में जाने की जहमत तक नहीं उठाई। नवनिर्वाचित भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता को छोड़कर ना तो भाजपा के जीते हुए सात विधायक पहुंचे और ना ही दिल्ली के सातों सांसद। एमसीडी पार्षद तक समारोह में शामिल नहीं हुए।
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दिल्ली के रामलीला मैदान में आम आदमी पार्टी की सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया। आप ने विपक्षी पार्टियों के नेताओं को भी आमंत्रित किया था, लेकिन विपक्ष ने इस आयोजन से दूरी बनाए रखी। भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने कहा कि उन्हें कोई आमंत्रण पत्र नहीं मिला और न ही आप की ओर से कोई फोन किया गया। 
लक्ष्मीनगर के नवनिर्वाचित भाजपा विधायक अभय वर्मा ने बताया कि उन्हें निमंत्रण तो मिला था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद पहला रविवार था। ऐसे में समर्थकों को कैसे ठुकराया जा सकता है। विधायक बनने के बाद इलाके की जनता धन्यवाद देने पहुंच रही है। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह में जाने का कोई औचित्य नहीं था। भाजपा पार्षदों का कहना था कि एमसीडी के साथ भेदभाव करने वाली सरकार है। दिल्ली के सांसदों का कहना है कि चुनाव बीतने के बाद पहला रविवार था। समर्थकों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कार्यक्रम में पहले से तय था।
समारोह में शरीक हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी समझकर शपथ ग्रहण में पहुंचा। ना सीट मिली, ना गाड़ी की पार्किंग। यह समारोह राजनीतिक कार्यक्रम बनकर रह गया। दिल्ली सरकार ने दो करोड़ रुपये खर्च कर भव्य समारोह का आयोजन किया। विपक्ष को सम्मान देने के लिए बैठने तक का इंतजाम नहीं किया गया था।

उधर, चुनावी मैदान से पत्ता साफ होने के बाद कांग्रेस ने भी शपथ ग्रहण समारोह से भी दूरी बनाए रखी। यदि कोई पूर्व नेता आसपास पहुंचा भी तो दूसरों से नजरें बचाते हुए, कहीं कोई उसे देख ना ले। हालांकि, रामलीला मैदान में हुए समारोह के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरे लिए दिल्लीवासियों समेत सभी पार्टियां भी बराबर हैं।

विधानसभा में नहीं तो क्या, सड़कों पर जारी रहेगा विरोध
चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस की दो महिला प्रत्याशियों ने कहा कि ध्रुवीकरण के कारण इस चुनाव में कांग्रेस की स्थिति कमजोर रही, लेकिन इससे पार्टी ने हार नहीं मानी है। विधानसभा न सही, लेकिन किसी भी मुद्दे पर विरोध क्यों न हो, वह सड़कों पर जारी रहेगी। एलपीजी सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी पर भी इन्होंने विरोध जताया है।
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