खास खबरः दिल्ली में कोरोना संक्रमण का अलग है रूप, गंभीर केस कम

परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Sep 2020 05:15 AM IST
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स्वाइन फ्लू की तरह कोरोना वायरस को लेकर भी दिल्ली की स्थिति देश के बाकी राज्यों से अलग मिल रही है। दिल्लीवालों में अन्य राज्यों से अलग कोरोना वायरस का रूप दिखाई दे रहा है। इससे राजधानी में बिना या कम लक्षण वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। 
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हालांकि, दिल्ली में कोरोना वायरस की मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से अधिक है लेकिन संक्रमण की ग्रोथ अन्य राज्यों से कम है। वैज्ञानिकों के अनुसार देश की राजधानी में रहने वाले संक्रमित मरीजों में कोरोना वायरस का ए3आई स्ट्रेन देखने को मिल रहा है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में सबसे ज्यादा ए2ए स्ट्रेन है। इन दोनों स्ट्रेन की तुलना करें तो ए3आई कम प्रसार और प्रभाव की क्षमता रखता है। 
बीते जून माह में ही हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के वैज्ञानिकों ने इस ए3आई स्ट्रेन के भारत में मिलने की पुष्टि की थी। करीब दो महीने के अध्ययन के बाद इन्हें पता चला है कि ए3आई स्ट्रेन का प्रभाव अन्य की तुलना में कम है। 
निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि दिल्ली में सबसे ज्यादा ए3आई स्ट्रेन मिल रहा है। यह स्थिति बाकी राज्यों कीतुलना में एकदम अलग है। दिल्ली में भले ही रोजाना तीन हजार से ज्यादा केस मिल रहे हैं लेकिन इनमें गंभीर मामले काफी सीमित हैं।

दिल्ली में इस समय 31,623 सक्रिय मामले हैं जिनमें आधे से ज्यादा 18,464 मरीज अपने अपने घरों में आईसोलेशन पर हैं। इन मरीजों में कोरोना वायरस के या तो लक्षण नहीं है या फिर मामूली प्रभाव है। दिल्ली के अलग अलग चिकित्सीय संस्थानों से हासिल नमूनों की जांच के बाद स्ट्रेन का पता लगाया है। 

वजह तलाशने में जुटे वैज्ञानिक 
दिल्ली में अन्य जगहों से अलग कोरोना वायरस का स्ट्रेन मिलने के बाद सीएसआईआर के ही वैज्ञानिक अब इसके पीछे की वजह तलाशने में जुटे हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक वैज्ञानिक ने बताया कि महामारी के शुरूआती महीनों में विदेशों से आने वाले लोगों को हवाई अड्डे पर ही आइसोलेट किया जा रहा था लेकिन मार्च के महीने में विदेशों से दिल्ली और फिर यहां से राज्यों तक आवागमन हुआ।

देश के कई शहरों में सीधे भी विदेशों से लौटकर आने पहुंचे थे। ऐसे में अलग अलग देश से भिन्न भिन्न असर वाले स्ट्रेन भारत आए। उम्मीद है कि दिल्ली में इसी तरह से ए3आई स्ट्रेन फैलाव हुआ। हालांकि अभी इसका वैज्ञानिक अध्ययन होना बाकी है। 
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