रक्षाबंधन पर भी भारी पड़ेगा कोरोना, डीटीसी बसों में सफर मुफ्त होने के बाद भी होगी मुश्किल!

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Jul 2020 06:42 PM IST
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रक्षा बंधन
रक्षा बंधन - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)

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सार

प्रतिवर्ष रक्षाबंधन-भैयादूज पर दिल्ली की डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त होता था सफर, लेकिन अब हमेशा के लिए फ्री है बस सेवा, बसों की संख्या बढ़ाने पर भी कोई विचार नहीं...

विस्तार

इस साल रक्षाबंधन पर दिल्ली की महिलाओं को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी। रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन उन्हें डीटीसी बसों से मुफ्त यात्रा की सुविधा रहेगी, लेकिन शारीरिक दूरी के कारण बसों में सीमित संख्या में ही महिलाएं यात्रा कर सकेंगी।
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त्यौहार के दिन ज्यादा भीड़ होने से बसों के मिलने में परेशानी हो सकती है। इस अवसर पर अतिरिक्त बसें चलाई जा सकती हैं, लेकिन इस दौरान मेट्रो चलाने को लेकर अभी तक कोई योजना नहीं बनी है। लिहाजा बहनों को अपने भाइयों के घर पहुंचने के लिए बसों का ही सहारा लेना पड़ेगा।  
 
इसके पहले हर वर्ष रक्षाबंधन और भैया दूज के अवसर पर महिलाओं के लिए डीटीसी बसों की सुविधा मुफ्त कर दी जाती थी, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिए बसों की सुविधा हमेशा के लिए फ्री कर दी है। यह सुविधा रक्षाबंधन और उसके बाद भी जारी रहेगी। 

लेकिन फीका दिख रहा त्यौहार 

कोरोना संक्रमण के मामले दिल्ली में कम होते जरूर दिख रहे हैं, लेकिन लोग अब इसे लेकर बेहद सावधान हैं और बाजार और मॉल खुलने के बाद भी बेहद कम लोग खरीदारी के लिए निकल रहे हैं। यही हाल मिठाई और दूसरे गिफ्ट आइटम की दुकानों का भी है। इन सब चीजों को देखते हुए इस बार त्यौहार का यह सीजन भी बिलकुल फीका रहना का अनुमान है।

सड़कों पर निकलने से बचेंगे, ऑनलाइन पहुंचेंगी राखियां 

कोरोना के प्रति इस सावधानी को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि लोग इस साल रक्षाबंधन के दिन भी घरों से निकलने से बचेंगे। घर पहुंचकर राखी बांधने की बजाए बहनें ऑनलाइन ही अपने भाइयों को राखियां भेजने को प्राथमिकता दे सकती हैं। अभी से इसे लेकर व्हाट्सएप और फेसबुक पर भावनाएं जाहिर की जाने लगी हैं।  

देसी राखियों का चलन रहेगा 

इसी दौरान चीन से बढ़े गतिरोध के कारण चीन निर्मित राखियों से भी परहेज किया जा रहा है। बाजार में रक्षा सूत्र और देसी निर्मित राखियों की ही मांग देखी जा रही है। स्वदेशी संगठनों के आलावा व्यापारिक संगठनों ने भी चीनी सामान के बहिष्कार का मुद्दा जोर-शोर से उठा रखा है। यही कारण है कि त्यौहार के नजदीक आ जाने के बाद भी अभी तक बाजार में चीनी राखियां नहीं दिख रही हैं।

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