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प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों से जेएनयू प्रशासन की अपील, विश्वविद्यालय की छवि धूमिल ना करें

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Fri, 05 Jun 2020 08:13 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने यूनिवर्सिटी अध्यापकों से कोरोना वायरस के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर विश्वविद्यालय की छवि धूमिल नहीं करने की अपील की। दो दिन पहले कुछ शिक्षकों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ और गिरफ्तार किए गए छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया था।
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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा और सीएए के खिलाफ पूर्व के प्रदर्शनों के मामले में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जेएनयू के छात्रों की गिरफ्तारी के खिलाफ उन्होंने विरोध कर रहे छात्र संगठनों का भी समर्थन किया । रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पता चला है कि संकाय के कुछ सदस्यों ने तीन जून को सीएए के खिलाफ कैंपस में प्रदर्शन किया।


उन्होंने कहा कि सभी को विरोध करने का अधिकार है लेकिन कोरोना वायरस के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने से गलत उदाहरण कायम होता है, खासकर जब जेएनयू जैसे अग्रणी विश्विविद्यालय में बुद्धिजीवी वर्ग ऐसा करते हैं। ऐसे समय जब कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश कठिन मेहनत कर रहा है, प्रदर्शन करने वाले संकाय के सदस्यों से अनुरोध है कि वो कोरोना वायरस के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल न करें।

हालांकि, जेएनयू अध्यापक संघ (जेएनयूटीए) ने कहा कि अध्यापकों ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया और प्रदर्शन के दौरान सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया गया था। जेएनयूटीए के सचिव सुरजीत मजूमदार ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अध्यापकों के संगठन के फेडरेशन (एफईडीसीयूटीए) ने प्रदर्शन के प्रति एकजुटता प्रकट की है। मजूमदार ने कहा कि संकाय के कुछ सदस्य प्रदर्शन करने के लिए कैंपस में इकट्ठा हुए थे लेकिन उन्होंने सामाजिक दूरी का पालन किया और किसी भी नियम को नहीं तोड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि कुछ अध्यापकों ने तख्तियां लेकर घरों से ही प्रदर्शन किया और कुछ शिक्षक ही एक जगह जमा हुए थे। मजूमदार ने कहा कि महामारी के बीच जब अनुचित गिरफ्तारियां हुई हैं तो यह कहना बेतुका है कि कोरोना के कारण लोगों को विरोध नहीं करना चाहिए। विश्वविद्यालय की छवि तब खराब होगी अगर विश्वविद्यालय की बिरादरी अपने सामने नाइंसाफी को देखकर चुप रह जाए।

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