कोरोना संदिग्धों के परिजन शवों से झाड़ रहे पल्ला, इसलिए हो रही निपटान में देर

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Tue, 02 Jun 2020 12:21 AM IST
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नई दिल्ली। कोरोना संदिग्धों के शवों से परिजन पल्ला झाड़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने इन शवों की कोरोना जांच करवाना बंद कर दिया है। इस कारण इन शवों के निपटान में देरी हो रही है। इसके लिए कोरोना से जुड़ी सामाजिक सोच व क्वांरटीन का डर भी जिम्मेदार है।
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दिल्ली सरकार की ओर से यह जवाब सोमवार को संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में दिया गया। हाईकोर्ट ने शवों का निपटान न होने और शवगृहों में जगह न होने की खबरों पर संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की थी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अगुवाई वाली खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से स्थाई अधिवक्ता संजोय घोष ने हलफनामा ने कहा कि जो हालात पैदा हुए थे, वैसा दोबारा न हो, उसके उपाय किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमिता अथवा संदिग्धों के शवों के शीघ्र निपटान की जिम्मेदारी उन अस्पतालों के निदेशकों को दी है जहां उन मरीजों की मौत होगी। स्वास्थ्य विभाग के 30 मई आदेश के मुताबिक इन शवों के निपटान की पूरी व्यवस्था नगर निगम करेगी।
दिल्ली सरकार के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि शवों के निपटान में देरी का एक कारण लोगों को सही जानकारी का अभाव है। लोग यह सोचते हैं कि शव का निपटान अस्पताल करेगा जबकि वह केवल इसमें मदद करता है लेकिन इससे पहले मृतक के परिजनों को शव को दावा करना होता है। इसके अलावा अगर मृतक के परिजन दिल्ली से बाहर के हैं तो भी शव की निपटान की अनुमति मिलने में विलंब होता है।
हाईकोर्ट ने शवों को लौटाए जाने, निपटान में विलंब व शवगृहों में स्थान की कमी पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि यह बेहद असंतोषजनक और मृतक के अधिकारों का हनन है। हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अगर हालात वास्तव में ऐसे हैं तो यह बेहद दर्दनाक है। - एजेंसी
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